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बेसहारा पशुओं को पकड़ने का अभियान रूका, नगरपरिषद देगी ठेका
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सड़क पर घूम रहा बेसहारा गोवंश।
- फोटो : Jind
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जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में हुए फैसले के अनुसार प्रशासन सड़कों से बेसहारा पशुओं को पकड़ने का काम शुरू नहीं कर पाया है। नगर परिषद के अधिकारियों व कर्मचारियों ने बिना सुरक्षा उपकरणों के पशुओं को पकड़ने में जोखिम बताया है। ऐसे में नगर परिषद द्वारा इसके लिए ठेका दिया जाएगा। इसके लिए पुराने ठेकेदार से भी बात चल रही है। लेकिन इस पर अभी फैसला नहीं हो पाया है।
दरअसल डीसी नरेश कुमार ने सड़क सुरक्षा समिति की मीटिंग में बेसहारा पशुओं को पकड़ने के निर्देश दिए थे। इसके बाद एडीसी साहिल गुप्ता नगर परिषद, आरटीओ व गोशाला संचालकों के साथ मीटिंग कर योजना बनाई। ठेकेदार द्वारा करीब दो साल पहले तक 486 रुपये प्रति पशु के हिसाब से यह काम किया जा रहा था। ऐसे में अधिकारी उसके ठेके का अध्ययन कर रहे हैं। यदि इसमें अधिकारियों को सही जचा तो पुराने ठेकेदार को ही ठेका दिया जाएगा और जरूरत पड़ी तो दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
बिना पूरी तैयारी के पशुओं को पकड़ने का काम जोखिम भरा है। कर्मचारियों के साथ-साथ पशु राहगीरों को भी चोट पहुंचा सकते हैं। ऐसे में इसके लिए ठेका देने पर विचार चल रहा है। इसके लिए पुराने ठेके को भी देखा जा रहा है। जल्द ही इस पर फैसला लिया जाएगा।
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सुशील कुमार, कार्यकारी अधिकारी, जींद नगर परिषद।
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दरअसल डीसी नरेश कुमार ने सड़क सुरक्षा समिति की मीटिंग में बेसहारा पशुओं को पकड़ने के निर्देश दिए थे। इसके बाद एडीसी साहिल गुप्ता नगर परिषद, आरटीओ व गोशाला संचालकों के साथ मीटिंग कर योजना बनाई। ठेकेदार द्वारा करीब दो साल पहले तक 486 रुपये प्रति पशु के हिसाब से यह काम किया जा रहा था। ऐसे में अधिकारी उसके ठेके का अध्ययन कर रहे हैं। यदि इसमें अधिकारियों को सही जचा तो पुराने ठेकेदार को ही ठेका दिया जाएगा और जरूरत पड़ी तो दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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बिना पूरी तैयारी के पशुओं को पकड़ने का काम जोखिम भरा है। कर्मचारियों के साथ-साथ पशु राहगीरों को भी चोट पहुंचा सकते हैं। ऐसे में इसके लिए ठेका देने पर विचार चल रहा है। इसके लिए पुराने ठेके को भी देखा जा रहा है। जल्द ही इस पर फैसला लिया जाएगा।
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सुशील कुमार, कार्यकारी अधिकारी, जींद नगर परिषद।