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Jind News: पराली जलाने से होता है पर्यावरण को नुकसान

Tue, 01 Oct 2024 02:04 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद Updated Tue, 01 Oct 2024 02:04 AM IST
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Burning of stubble causes harm to the environment
30जेएनडी15-हमेटी में हुए व्याख्यान के दौरान पराली न जलाने की शपथ दिलााते हुए निदेशक डॉ. कर्मचंद
जींद। हमेटी के निदेशक डॉ. कर्मचंद ने कहा कि किसान अपने खेतों में धान कटाई के बाद बची हुई पराली को न जलाएं। इसे कृषि यंत्रों की मदद से जमीन में ही मिला दें। फसल अवशेष जलाने से भूमि में मौजूद फसलों के लिए आवश्यक तत्व व लाभकारी जीव जल कर नष्ट हो जाते हैं तथा भूमि बंजर बन जाती है। डॉ. कर्मचंद सोमवार को हमेटी में फसल अवशेष प्रबंधन पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
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उन्होंने बताया कि फसल अवशेषों को जलाने से भूमि के जैविक कार्बन का स्तर कम हो जाता है। अगर उसे मिट्टी में मिलाते हैं तो इससे भूमि में जैविक कार्बन व आवश्यक तत्वों की मात्रा बढ़ती है, जिससे जमीन और ज्यादा उपजाऊ बनती है। सूक्ष्म जीव सुरक्षित रहते हैं, जो हमारी फसलों की पैदावार बढ़ाने में मदद करते हैं। फसल अवशेष जलाने से पर्यावरण को भी भारी नुकसान होता है। पराली जलाने से जहरीली गैसें निकलती हैं, जो मानव सहित हर जीव जंतु के जीवन के लिए खतरनाक होती हैं। पराली प्रबंधन में प्रयोग होने वाले सुपरसीडर, बेलर, स्लैसर जैसे कृषि यंत्रों पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। पराली की गांठें बनवाने या मिट्टी में ही मिलाने वाले किसानों को एक हजार रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। किसानों को इन योजनाओं का फायदा उठाना चाहिए तथा पराली को जलाने के बजाय गांठ बनाकर या मिट्टी में मिला कर इसका लाभ लेना चाहिए। प्रशिक्षण सलाहकार डॉ. सुभाष चंद्र ने प्रशिक्षणार्थियों को पराली न जलाने की शपथ भी दिलवाई। सभी प्रशिक्षणार्थियों ने स्वयं पराली न जलाने के साथ अन्य दूसरे किसानों को भी इसके लिए जागरूक करने की जिम्मेदारी ली। इस दौरान प्रशिक्षक डॉ. बीपी राणा, डॉ. युद्धवीर सिंह, डॉ. अजीत खर्ब भी मौजूद रहे।

30जेएनडी15-हमेटी में हुए व्याख्यान के दौरान पराली न जलाने की शपथ दिलााते हुए निदेशक डॉ. कर्मचंद

30जेएनडी15-हमेटी में हुए व्याख्यान के दौरान पराली न जलाने की शपथ दिलााते हुए निदेशक डॉ. कर्मचंद

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