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Jind News: अवशेष जलाने से जमीन और आमजन को भी नुकसान
Fri, 21 Nov 2025 12:09 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Fri, 21 Nov 2025 12:09 AM IST
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20जेएनडी14 :किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के बारे में जागरूक करते एसडीएम पुलकित मल्होत्रा। स्रोत
सफीदों। धान की पराली अवशेष जलाना कानूनी जुर्म तो है ही साथ ही अवशेष जलाने से जमीन और आमजन को भी नुकसान हो रहा है। एसडीएम पुलकित मल्होत्रा ने वीरवार को कलावती, खरक, हाडवा, गांगोली व हाट सहित आधा दर्जन से अधिक गांवों के धान उत्पादित खेतों का दौरा किया।
यहां किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन बारे भी जागरूक किया। उन्होंने कहा कि फसल अवशेषों में लगी आग के धुएं से प्रदूषण बढ़ता है, इससे आमजन व पशुधन में बीमारियों की आशंका बढ़ती है और जमीन की ऊपरी परत जलने से काश्तकार भूमि बंजर बनने का अंदेशा रहता है। इसका परिणाम यह होता है कि भविष्य में फसल बर्बादी के कगार पर चली जाती है, इसलिए किसान अवशेष जलाने की बजाय उनका प्रबंधन सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि किसान धान अवशेष प्रबंधन कर जहां अपनी जमीन की उपजाऊ शक्ति को बचा पाएंगे वहीं मानवता के प्रति भी सामाजिक जिम्मेदारी निभाएंगे। उन्होंने कहा कि किसानों को गेहूं बिजाई के लिए जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए और कृषि संयंत्र उपलब्धता के लिए धैर्य रखना चाहिए।
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अवशेष प्रबंधन करने वाले कृषि संयंत्र के लिए विभागीय किसान सहायता केद्रों पर संपर्क कर सकते हैं। अवशेष प्रबंधन करने वाले किसानों को सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि उपलब्ध करवाई जा रही है।
किसानों को स्कीमों का लाभ उठाकर वैज्ञानिक व आधुनिक तरीके से अवशेषों का प्रबंध करना चाहिए। सरकार की ओर से सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, रोटावेटर, जीरो टिल सीड ड्रिल, हैप्पी सीडर, श्रेडर और बेलर जैसी मशीनों पर अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। इस मौके पर तहसीलदार राजेश गर्ग, एसडीओ कृषि सुशील कुमार और किसान मौजूद रहे।
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यहां किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन बारे भी जागरूक किया। उन्होंने कहा कि फसल अवशेषों में लगी आग के धुएं से प्रदूषण बढ़ता है, इससे आमजन व पशुधन में बीमारियों की आशंका बढ़ती है और जमीन की ऊपरी परत जलने से काश्तकार भूमि बंजर बनने का अंदेशा रहता है। इसका परिणाम यह होता है कि भविष्य में फसल बर्बादी के कगार पर चली जाती है, इसलिए किसान अवशेष जलाने की बजाय उनका प्रबंधन सुनिश्चित करें।
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उन्होंने कहा कि किसान धान अवशेष प्रबंधन कर जहां अपनी जमीन की उपजाऊ शक्ति को बचा पाएंगे वहीं मानवता के प्रति भी सामाजिक जिम्मेदारी निभाएंगे। उन्होंने कहा कि किसानों को गेहूं बिजाई के लिए जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए और कृषि संयंत्र उपलब्धता के लिए धैर्य रखना चाहिए।
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अवशेष प्रबंधन करने वाले कृषि संयंत्र के लिए विभागीय किसान सहायता केद्रों पर संपर्क कर सकते हैं। अवशेष प्रबंधन करने वाले किसानों को सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि उपलब्ध करवाई जा रही है।
किसानों को स्कीमों का लाभ उठाकर वैज्ञानिक व आधुनिक तरीके से अवशेषों का प्रबंध करना चाहिए। सरकार की ओर से सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, रोटावेटर, जीरो टिल सीड ड्रिल, हैप्पी सीडर, श्रेडर और बेलर जैसी मशीनों पर अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। इस मौके पर तहसीलदार राजेश गर्ग, एसडीओ कृषि सुशील कुमार और किसान मौजूद रहे।