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Jind News: नवजातों की जीवनदायिनी बनी बबल सी-पैप मशीन
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30जेएनडी09 : एसएनसीयू में लगी बबल सी-पैप मशीन पर नवजात का उपचार करते हुए डॉ राघव। संवाद।
संवाद न्यूज एजेंसी
नरवाना। नागरिक अस्पताल की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई में लगाई गई बबल सी-पैप मशीन अब नवजात शिशुओं के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। मशीन के नियमित उपयोग शुरू होने के बाद अस्पताल में भर्ती प्रीमैच्योर और कमजोर नवजातों को उन्नत रेस्पिरेटरी सपोर्ट मिल रहा है।
अस्पताल प्रशासन की ओर से लगभग 2 लाख की कीमत की मशीन 25 नवंबर को लगाई गई थी। मशीन नाक के जरिए नियंत्रित दबाव के साथ ऑक्सीजन को सीधे फेफड़ों तक पहुंचाती है। इससे बच्चे को स्वयं सांस लेने में सहायता मिलती है और फेफड़ों के संकुचन की स्थिति रुक जाती है।
पहले जिलास्तर की सुविधा बड़े मेडिकल कॉलेजों में ही मिलती थी। अब वही तकनीक नागरिक अस्पताल में उपलब्ध होने से नवजातों की जान बचाने की क्षमता कई गुना बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम आरडीएस, टीटीएन और निमोनिया जैसे मामलों में यह तकनीक काफी प्रभावी साबित हो रही है।
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पहले गंभीर बच्चों को करना पड़ता था रेफर
एसएमओ डॉ. देवेंद्र बिंदलिश के अनुसार पहले गंभीर बच्चों को रेफर करना पड़ता था जिससे समय की देरी के कारण जोखिम बढ़ जाता था। बबल सी-पैप के संचालन के बाद से ऐसी स्थितियां काफी कम हुई हैं। मशीन के साथ प्रशिक्षित स्टाफ की तैनाती भी की गई है जो 24 घंटे बच्चों की निगरानी कर रहा है।
वर्जन
मशीन के इंस्टॉल होने के बाद 5 से अधिक नवजातों की जान बचाई जा चुकी है। बच्चों को रेफर करने के बजाय अब नरवाना में ही उन्नत उपचार उपलब्ध हो गया है। यह व्यवस्था क्षेत्र के नवजातों और माता-पिता के लिए बड़ी राहत बनकर उभरी है।
- डॉ. राघव,एसएनसीयू मेडिकल ऑफिसर
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नरवाना। नागरिक अस्पताल की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई में लगाई गई बबल सी-पैप मशीन अब नवजात शिशुओं के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। मशीन के नियमित उपयोग शुरू होने के बाद अस्पताल में भर्ती प्रीमैच्योर और कमजोर नवजातों को उन्नत रेस्पिरेटरी सपोर्ट मिल रहा है।
अस्पताल प्रशासन की ओर से लगभग 2 लाख की कीमत की मशीन 25 नवंबर को लगाई गई थी। मशीन नाक के जरिए नियंत्रित दबाव के साथ ऑक्सीजन को सीधे फेफड़ों तक पहुंचाती है। इससे बच्चे को स्वयं सांस लेने में सहायता मिलती है और फेफड़ों के संकुचन की स्थिति रुक जाती है।
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पहले जिलास्तर की सुविधा बड़े मेडिकल कॉलेजों में ही मिलती थी। अब वही तकनीक नागरिक अस्पताल में उपलब्ध होने से नवजातों की जान बचाने की क्षमता कई गुना बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम आरडीएस, टीटीएन और निमोनिया जैसे मामलों में यह तकनीक काफी प्रभावी साबित हो रही है।
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पहले गंभीर बच्चों को करना पड़ता था रेफर
एसएमओ डॉ. देवेंद्र बिंदलिश के अनुसार पहले गंभीर बच्चों को रेफर करना पड़ता था जिससे समय की देरी के कारण जोखिम बढ़ जाता था। बबल सी-पैप के संचालन के बाद से ऐसी स्थितियां काफी कम हुई हैं। मशीन के साथ प्रशिक्षित स्टाफ की तैनाती भी की गई है जो 24 घंटे बच्चों की निगरानी कर रहा है।
वर्जन
मशीन के इंस्टॉल होने के बाद 5 से अधिक नवजातों की जान बचाई जा चुकी है। बच्चों को रेफर करने के बजाय अब नरवाना में ही उन्नत उपचार उपलब्ध हो गया है। यह व्यवस्था क्षेत्र के नवजातों और माता-पिता के लिए बड़ी राहत बनकर उभरी है।
- डॉ. राघव,एसएनसीयू मेडिकल ऑफिसर