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घर जा रहे मजदूरों को प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद दिए गुए मजदूरी के चेक हुए बाउंस
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शहर के एसडी स्कूल शिक्षण संस्था द्वारा एक महीना पहले मजदूरों को दिए गए चेक बाउंस हो गए हैं। यह चेक मजदूरों को घर जाते वक्त प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद दिए गए थे। पहले बिना भुगतान किए ही मजदूरों को घर भेजा जा रहा था। अब चेक बाउंस होने के बाद यह मामला डीसी डॉ. आदित्य दहिया के संज्ञान में आया है। इस मामले में एक अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो मामले को देखेगा।
गौरतलब है कि लॉकडाउन के दौरान शिक्षण संस्था प्रबंधक कमेटी द्वारा बिना भुगतान किए निकाल देने के आरोप लगाते हुए कुछ मजदूरों ने राजकीय महिला कॉलेज के पास डेरा डाल दिया था। इसके बाद यह मामला मीडिया व प्रशासन के संज्ञान में आया। इस पर इन लोगों को इनकी मजदूरी के चैक दिलवाए गए और इसके बाद मजदूर अपने घर चले गए। अब यह राशि उनके खातों में नहीं पहुंच पाई। चैक 16 मई को दिए गए थे।
पांच लोगों को दिए गए थे चेक
प्रशासन के दबाव में स्कूल प्रबंधकों द्वारा स्कूल में काम करने वाले स्वामी को 7100 रुपये, बिंद्राबन को 10 हजार 500, राजेश को 19 हजार 500, बाबूराम को 28 हजार 250 तथा गोबिंद को 8700 रुपये का चैक दिया गया था। इनमें से सिर्फ एक गोबिंद को ही 7800 रुपये की राशि मिल पाई है। अन्य सभी चार मजदूरों के चैक बाउंस हो गए हैं। गोबिंद अपने घर जाने से पहले ही चैक को कैश करवा लिया था। राजेश और बाबूराम ने फोन पर बताया कि उन्होंने चेक बैंक में लगाये थे, जो पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण बाउंस हो गए।
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चेक बाउंस होनरा नहीं जानकारी में
पांच चैक दिए गए थे। इनमें से तीन चेक क्लियर भी हो गए। दो लोगों के चेक में क्या दिक्कत आई है, इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन जैसे ही मामला संज्ञान में आया, इसके बाद 19 हजार रुपये से अधिक राशि का आरटीजीएस करवा दिए गए हैं। कुछ लोग सिर्फ बदनाम करने के लिए इस प्रकार के मुद्दों को उछालते हैं।
लक्ष्मी नारायण बंसल, प्रधान एसडी स्कूल प्रबंधक समिति
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गौरतलब है कि लॉकडाउन के दौरान शिक्षण संस्था प्रबंधक कमेटी द्वारा बिना भुगतान किए निकाल देने के आरोप लगाते हुए कुछ मजदूरों ने राजकीय महिला कॉलेज के पास डेरा डाल दिया था। इसके बाद यह मामला मीडिया व प्रशासन के संज्ञान में आया। इस पर इन लोगों को इनकी मजदूरी के चैक दिलवाए गए और इसके बाद मजदूर अपने घर चले गए। अब यह राशि उनके खातों में नहीं पहुंच पाई। चैक 16 मई को दिए गए थे।
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पांच लोगों को दिए गए थे चेक
प्रशासन के दबाव में स्कूल प्रबंधकों द्वारा स्कूल में काम करने वाले स्वामी को 7100 रुपये, बिंद्राबन को 10 हजार 500, राजेश को 19 हजार 500, बाबूराम को 28 हजार 250 तथा गोबिंद को 8700 रुपये का चैक दिया गया था। इनमें से सिर्फ एक गोबिंद को ही 7800 रुपये की राशि मिल पाई है। अन्य सभी चार मजदूरों के चैक बाउंस हो गए हैं। गोबिंद अपने घर जाने से पहले ही चैक को कैश करवा लिया था। राजेश और बाबूराम ने फोन पर बताया कि उन्होंने चेक बैंक में लगाये थे, जो पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण बाउंस हो गए।
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चेक बाउंस होनरा नहीं जानकारी में
पांच चैक दिए गए थे। इनमें से तीन चेक क्लियर भी हो गए। दो लोगों के चेक में क्या दिक्कत आई है, इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन जैसे ही मामला संज्ञान में आया, इसके बाद 19 हजार रुपये से अधिक राशि का आरटीजीएस करवा दिए गए हैं। कुछ लोग सिर्फ बदनाम करने के लिए इस प्रकार के मुद्दों को उछालते हैं।
लक्ष्मी नारायण बंसल, प्रधान एसडी स्कूल प्रबंधक समिति