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जिले में ब्लैक फंगस के एक भी मरीज की पुष्टि नहीं, कई मरीज करवा रहे इलाज
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जींद।कोरोना को हराने वाले मरीज ब्लैक, सफेद फंगस के जाल में फंस रहे हैं। जिला में औपचारिक रूप से किसी भी मरीज में ब्लैक फंगस की पुष्टी नहीं हुई है, लेकिन कई लोग अलग-अलग स्थानों पर अपना इलाज करवा रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग आंकड़ों के फेर में उलझा हुआ है। जिले के लोगों में ब्लैक फंगस के संक्रमण की कोई जानकारी स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। हालांकि एक व्यक्ति ने खुद अपनी फेसबुक पर इसकी जानकारी साझा की है।
दरअसल कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद मरीज ब्लैक फंगस की चपेट में आ रहे हैं। इसके चलते आंख में फंगस का असर आता है और यदि समय पर इसका इलाज नहीं हो तो यह मस्तिष्क तक पहुंच सकता है और घातक हो सकता है। हालांकि अब तक स्वास्थ्य विभाग द्वारा 12 से अधिक ब्लैक फंगस के संदिग्ध रेफर किए जा चुके हैं, लेकिन औपचारिक रूप से एक भी मामले में पुष्टी नहीं की जा रही है।
जिले में नहीं ब्लैक फंगस का इलाज
स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी समस्या है जिला स्तर पर ब्लैक फंगस का इलाज नहीं है। ऐसे में कोई भी संदिग्ध मरीज मिलने पर इसे जांच के लिए रोहतक पीजीआई रेफर किया जाता है। वहां से अभी तक किसी भी मरीज में पुष्टी होकर रिपोर्ट नहीं आई है।
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एक आंख में दिक्कत, ठीक होने की संभावना
वहीं करनाल के कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में इलाज करवा रहे पिल्लूखेड़ा निवासी एक व्यक्ति ने फोन पर अमर उजाला को बताया कि कोरोना संक्रमण के बाद उन्हें ब्लैक फंगस ने अपनी चपेट में ले लिया। इसके चलते एक आंख में दिक्कत है, लेकिन चिकित्सकों ने कहा है कि यह ठीक हो जाएगा। अब फिलहाल वे ठीक हैं।
नहीं है एक भी मामले की पुष्टि
अभी तक जिले में ब्लैक फंगस के एक भी मामले की पुष्टि नहीं है। मीडिया से ही जानकारी मिलती है कि जिले के कई लोगों में ब्लैक फंगस का संक्रमण है। हालांकि करीब 12 से अधिक संदिग्ध मरीज रेफर किए गए हैं, लेकिन इनकी जानकारी नहीं मिली है।
-डॉ. मनजीत मान, सिविल सर्जन।
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दरअसल कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद मरीज ब्लैक फंगस की चपेट में आ रहे हैं। इसके चलते आंख में फंगस का असर आता है और यदि समय पर इसका इलाज नहीं हो तो यह मस्तिष्क तक पहुंच सकता है और घातक हो सकता है। हालांकि अब तक स्वास्थ्य विभाग द्वारा 12 से अधिक ब्लैक फंगस के संदिग्ध रेफर किए जा चुके हैं, लेकिन औपचारिक रूप से एक भी मामले में पुष्टी नहीं की जा रही है।
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जिले में नहीं ब्लैक फंगस का इलाज
स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी समस्या है जिला स्तर पर ब्लैक फंगस का इलाज नहीं है। ऐसे में कोई भी संदिग्ध मरीज मिलने पर इसे जांच के लिए रोहतक पीजीआई रेफर किया जाता है। वहां से अभी तक किसी भी मरीज में पुष्टी होकर रिपोर्ट नहीं आई है।
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एक आंख में दिक्कत, ठीक होने की संभावना
वहीं करनाल के कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में इलाज करवा रहे पिल्लूखेड़ा निवासी एक व्यक्ति ने फोन पर अमर उजाला को बताया कि कोरोना संक्रमण के बाद उन्हें ब्लैक फंगस ने अपनी चपेट में ले लिया। इसके चलते एक आंख में दिक्कत है, लेकिन चिकित्सकों ने कहा है कि यह ठीक हो जाएगा। अब फिलहाल वे ठीक हैं।
नहीं है एक भी मामले की पुष्टि
अभी तक जिले में ब्लैक फंगस के एक भी मामले की पुष्टि नहीं है। मीडिया से ही जानकारी मिलती है कि जिले के कई लोगों में ब्लैक फंगस का संक्रमण है। हालांकि करीब 12 से अधिक संदिग्ध मरीज रेफर किए गए हैं, लेकिन इनकी जानकारी नहीं मिली है।
-डॉ. मनजीत मान, सिविल सर्जन।