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दिल्ली सीमा पर किसान आंदोलन के छह महीने पूरे होने पर जिलेभर में मनाया काला दिवस
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कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली सीमा पर किसानों के आंदोलन के छह महीने पूरे होने पर जिलेभर में किसानों ने काला दिवस मनाया। इस दौरान खटकड़ और बद्दोवाल टोल पर जहां महिलाएं काली चुनरी ओढ़कर पहुंची तो वहीं पुरुषों ने काली पट्टी बांधी। कई युवा काली पोशाक में भी धरने पर पहुंचे। वहीं गांवों और शहरों में किसानों ने अपने-अपने घरों पर काले झंडे लगाकर रोष जताया। इस दौरान पुतले भी फूंके गए। किसानों ने स्पष्ट कहा कि छह महीने तो क्या, यदि छह साल तक भी संघर्ष करना पड़ा तो वे पीछे नहीं हटेंगे। अब कृषि कानून वापस करवा कर ही लौटेंगे।
उचाना के खटकड़ टोल पर चल रहे धरनास्थल पर किसानों ने काला दिवस और बुध पूर्णिमा मनाई। धरनास्थल पर पहुंची महिलाओं ने काली चुनरी ओढ़ रखी थी तो युवा काली पट्टी बांधकर आए थे। धरने की अध्यक्षता बालकिशन काब्रच्छा ने की। सांकेतिक भूख हड़ताल पर गीता छात्तर, मुकेश देवी, बीरमति सुदकैन, राजबाला बरसोला, चंद्रो खटकड़ रहीं। छात्तर, गुरुकुल खेड़ा, सुदकैन कलां, रोज खेड़ा, बड़ौदा, रूपगढ़, खटकड़, बरसोला, मोहनगढ़ छापड़ा, कोथ, जुलानी, दरियावाला, पालवां से युवा जत्थों के साथ धरनास्थल पर पहुंचे।
हिसार बार एसोसिएशन से पहुंचे वकील विक्रम मित्तल ने कहा कि कृषि कानूनों के कारण किसान अपने ही खेतों में मजदूर बनकर रह जाएगा। किसान नेता आजाद पालवां, सतबीर पहलवान ने कहा कि आज केंद्र की सरकार को सात साल हुए हैं तो किसानों के आंदोलन को छह महीने हो चुके हैं। कृषि कानूनों को जब तक केंद्र सरकार रद्द नहीं करती है, तब तक किसान घर वापसी नहीं करेंगे। पूर्व आईजी रणबीर सिंह शर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार तानाशाह बन चुकी है। लगभग 400 किसानों की मौत हो चुकी है, लेकिन भाजपा को सिर्फ और सिर्फ चुनाव जीतने से मतलब रह गया है।
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काले झंडे लगाकर व पुतले जलाकर सरकार के प्रति जताया रोष
नरवाना में बुधवार को किसान आंदोलन के छह महीने पूरे पर किसानों ने बद्दोवाल टोल प्लाजा पर काला दिवस मनाया। किसानों ने काले झंडे लगाकर व पुतले जलाकर सरकार के खिलाफ रोष जताया। इस दौरान किसानों ने शव यात्रा निकाली और नारेबाजी की। महिलाएं काली चुन्नी ओढ़कर धरनास्थल पर पहुंचीं। वहीं किसानों ने अपने हाथों पर काली पट्टी और काली पगड़ी पहनकर सरकार के खिलाफ विरोध दिवस मनाया। किसान नेताओं ने अपने घरों, दुकानों, कार्यालयों व वाहनों पर काले झंडे लगाकर कृषि कानूनों, बिजली संशोधन विधेयक 2020 और प्रदूषण अध्यादेश का विरोध किया। किसान नेता मास्टर बलवीर सिंह व सुनील बद्दोवाल ने कहा कि कृषि कानूनों के विरोध में 180 दिनों से आंदोलनरत किसानों की सरकार सुध नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार अपने घमंड में चूर है, लेकिन प्रदेश का किसान कृषि कानूनों को वापस करवाकर ही दम लेगा।
किसान आंदोलन के छह माह पूरे होने पर सुरजेवाला भवन पर लगाया काला झंडा
नरवाना में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला के निर्देशानुसार बुधवार को किसानों के समर्थन में सुरजेवाला भवन पर काला झंडा लगाया गया। सरकार द्वारा लागू किए गए कृषि कानूनों के विरोध में किसान पिछले छह माह से धरना देकर कानूनों को वापस करने की मांग कर रहे हैं। 26 मई को किसान व किसान समर्थकों द्वारा काला दिवस मनाया गया। कई स्थानों पर पुतले फूंककर सरकार के खिलाफ रोष प्रकट किया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसानों के साथ है और कृषि कानूनों का शुरू से विरोध कर रही है। छह माह में 400 से ज्यादा किसान अपनी जान गंवा चुके हैं, लेकिन सरकार ने उनकी मांग पूरी नहीं की।
बृजेंद्र सिंह सुरजेवाला, जगरूप सिंह सुरजेवाला, पूर्व मंत्री रामभज लोधर, जियालाल गोयल, कैलाश सिंगला, एडवोकेट सुशील कौशिक, नप के पूर्व प्रधान भारत भूषण गर्ग, पूर्व पार्षद रामपाल उझाना, नप के उप प्रधान राजू प्रजापत, मंडी के पूर्व प्रधान जयदेव बंसल, सतबीर दबलैन, राजपाल बनवाला, धौला नैन सहित कई कांग्रेस नेताओं ने भी किसानों की मांगों का समर्थन किया।
केवाईएस ने किया किसानों के काला दिवस का समर्थन
नरवाना में क्रांतिकारी युवा संगठन केवाईएस ने किसान संगठनों द्वारा 26 मई को काला दिवस के आह्वान का समर्थन किया और सोशल मीडिया कैंपेन के माध्यम से अपनी मांगों को उठाकर सफल बनाने का आह्वान किया।
सरकार ने सात साल के कार्यकाल में निजीकरण को बढ़ावा देकर किसान व मजदूरों के हकों को किया खत्म
कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन को छह महीने पूरे होने और सरकार की गलत नीतियों के विरोध में बुधवार को कला दिवस मनाया गया। सीटू के राज्य उपाध्यक्ष कामरेड रमेश चंद्र, जिला अध्यक्ष सतबीर खरल, सचिव कपूर सिंह, कोषाध्यक्ष सुभाष तिवारी व नीलम ने कहा कि मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने सात साल के कार्यकाल में कारपोरेट घरानों की लूट को बहुत आसान बनाया है। मजदूर व किसान हितों पर डाके डाले गए हैं। कोरोना महामारी के बाद से पूरा ध्यान इस बात पर रहा है कि कैसे देश के संसाधनों व धन संपदा को कारपोरेट के हवाले किया जाए।
गांवों में लोगों ने काली पट्टी बांधकर पुतला जलाकर किया विरोध
गांव गतौली में जींद-रोहतक मार्ग पर किसानों ने काली पट्टी बांधने के बाद पुतला जलाया तथा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन की अध्यक्षता नरेश ढांडा व नरेंद्र ढांडा ने की। नरेश ढांडा ने कहा कि भाजपा सरकार किसानों की अनदेखी कर रही है। किसान लगातार छह महीने से सड़कों पर है। अब तक 400 से अधिक किसानों की मौत हो चुकी है। इस मौके पर पूर्व सरपंच सुरेंद्र मलिक, प्रदीप, मनजीत, पाला, सतबीर व जिले सिंह मलिक मौजूद रहे।
कृषि कानूनों के विरोध में विभिन्न इकाइयों ने मनाया काला दिवस
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, भारत की जनवादी नौजवान सभा व अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की इकाइयों ने सरकार की जन विरोधी, कृषि विरोधी और युवा विरोधी नीतियों के खिलाफ बुधवार को ऑनलाइन राष्ट्रव्यापी काला दिवस के रूप में मनाया। इकाइयों ने मांग की कि पीएम केयर्स फंड का इस्तेमाल करके प्रदेश में ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, दवाइयां और अस्पतालों में बेड उपलब्ध कराने के लिए किया जाए।
जो सरकार किसानों का दिया अन्न खाती है, उसके पास किसानों से बातचीत का समय नहीं : रंगा
हरियाणा रोडवेज वर्कर यूनियन इंटक द्वारा किसानों के समर्थन में काला दिवस मनाया गया। राज्य उप महासचिव संदीप रंगा ने कहा कि जो सरकार किसानों का दिया हुआ अन्न खाती है, उसके पास उनसे बातचीत करने का समय नहीं है। एक तरफ तो देश का अन्नदाता बॉर्डर पर छह महीने से बैठा हुआ है। 450 से भी अधिक किसानों की मौत आंदोलन के दौरान हो चुकी है। वहीं दूसरी तरफ सरकार अपनी चुनाव रैलियां कर रही है। सरकार कृषि कानूनों को किसानों पर थोपना चाहती है, जिसे सहन नहीं किया जाएगा। यह कानून निजीकरण को बढ़ावा देने के लिए लागू किए गए हैं। डिपो प्रधान संजय नैन ने कहा कि सरकार द्वारा किसानों के साथ-साथ हर विभाग के कर्मचारियों का शोषण हो रहा है। इंटक यूनियन इसको कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। सरकार द्वारा रिजर्व बैंक से करोड़ों का कर्जा लेना व पूंजीपतियों के साथ मिलकर देश के सभी नागरिकों को कर्जों में डुबाना सरकार की सोची-समझी चाल है। एक तरफ तो देश का किसान भूखा मर रहा है और दूसरी तरफ सत्ताधारी नेता अपने लिए करोड़ों रुपये के महल तैयार कर रहे हैं। किसानों पर हो रहे शोषण को रोडवेज इंटक बर्दाश्त नहीं करेगी और आगे भी इसका विरोध करती रहेगी। इस अवसर पर अनिल, सोमदत्त, राजेश, नरेंद्र, कूका, सुरेंद्र, जितेंद्र, मुकेश, रामफ ल, सोनू, प्रदीप, शैलेंद्र, अशोक, महावीर भी मौजूद रहे।
गांवों में सरकार का पुतला जलाकर किसानों ने मनाया सरकार विरोधी दिवस
सफीदों में कृषि कानूनों के विरोध में बुधवार को कई गांवों में किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करके पुतले जलाए और घरों पर काले झंडे लगाकर विरोध जताया। गांव छाप्पर व रामपुरा में किसानों ने नारेबाजी करते हुए सरकार के पुतले फूंके। इसके अलावा सीपीआईएम नेता राधेश्याम हाट व छापर में लखविंदर चहल के नेतृत्व में प्रदर्शन किए गए।
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उचाना के खटकड़ टोल पर चल रहे धरनास्थल पर किसानों ने काला दिवस और बुध पूर्णिमा मनाई। धरनास्थल पर पहुंची महिलाओं ने काली चुनरी ओढ़ रखी थी तो युवा काली पट्टी बांधकर आए थे। धरने की अध्यक्षता बालकिशन काब्रच्छा ने की। सांकेतिक भूख हड़ताल पर गीता छात्तर, मुकेश देवी, बीरमति सुदकैन, राजबाला बरसोला, चंद्रो खटकड़ रहीं। छात्तर, गुरुकुल खेड़ा, सुदकैन कलां, रोज खेड़ा, बड़ौदा, रूपगढ़, खटकड़, बरसोला, मोहनगढ़ छापड़ा, कोथ, जुलानी, दरियावाला, पालवां से युवा जत्थों के साथ धरनास्थल पर पहुंचे।
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हिसार बार एसोसिएशन से पहुंचे वकील विक्रम मित्तल ने कहा कि कृषि कानूनों के कारण किसान अपने ही खेतों में मजदूर बनकर रह जाएगा। किसान नेता आजाद पालवां, सतबीर पहलवान ने कहा कि आज केंद्र की सरकार को सात साल हुए हैं तो किसानों के आंदोलन को छह महीने हो चुके हैं। कृषि कानूनों को जब तक केंद्र सरकार रद्द नहीं करती है, तब तक किसान घर वापसी नहीं करेंगे। पूर्व आईजी रणबीर सिंह शर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार तानाशाह बन चुकी है। लगभग 400 किसानों की मौत हो चुकी है, लेकिन भाजपा को सिर्फ और सिर्फ चुनाव जीतने से मतलब रह गया है।
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काले झंडे लगाकर व पुतले जलाकर सरकार के प्रति जताया रोष
नरवाना में बुधवार को किसान आंदोलन के छह महीने पूरे पर किसानों ने बद्दोवाल टोल प्लाजा पर काला दिवस मनाया। किसानों ने काले झंडे लगाकर व पुतले जलाकर सरकार के खिलाफ रोष जताया। इस दौरान किसानों ने शव यात्रा निकाली और नारेबाजी की। महिलाएं काली चुन्नी ओढ़कर धरनास्थल पर पहुंचीं। वहीं किसानों ने अपने हाथों पर काली पट्टी और काली पगड़ी पहनकर सरकार के खिलाफ विरोध दिवस मनाया। किसान नेताओं ने अपने घरों, दुकानों, कार्यालयों व वाहनों पर काले झंडे लगाकर कृषि कानूनों, बिजली संशोधन विधेयक 2020 और प्रदूषण अध्यादेश का विरोध किया। किसान नेता मास्टर बलवीर सिंह व सुनील बद्दोवाल ने कहा कि कृषि कानूनों के विरोध में 180 दिनों से आंदोलनरत किसानों की सरकार सुध नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार अपने घमंड में चूर है, लेकिन प्रदेश का किसान कृषि कानूनों को वापस करवाकर ही दम लेगा।
किसान आंदोलन के छह माह पूरे होने पर सुरजेवाला भवन पर लगाया काला झंडा
नरवाना में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला के निर्देशानुसार बुधवार को किसानों के समर्थन में सुरजेवाला भवन पर काला झंडा लगाया गया। सरकार द्वारा लागू किए गए कृषि कानूनों के विरोध में किसान पिछले छह माह से धरना देकर कानूनों को वापस करने की मांग कर रहे हैं। 26 मई को किसान व किसान समर्थकों द्वारा काला दिवस मनाया गया। कई स्थानों पर पुतले फूंककर सरकार के खिलाफ रोष प्रकट किया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसानों के साथ है और कृषि कानूनों का शुरू से विरोध कर रही है। छह माह में 400 से ज्यादा किसान अपनी जान गंवा चुके हैं, लेकिन सरकार ने उनकी मांग पूरी नहीं की।
बृजेंद्र सिंह सुरजेवाला, जगरूप सिंह सुरजेवाला, पूर्व मंत्री रामभज लोधर, जियालाल गोयल, कैलाश सिंगला, एडवोकेट सुशील कौशिक, नप के पूर्व प्रधान भारत भूषण गर्ग, पूर्व पार्षद रामपाल उझाना, नप के उप प्रधान राजू प्रजापत, मंडी के पूर्व प्रधान जयदेव बंसल, सतबीर दबलैन, राजपाल बनवाला, धौला नैन सहित कई कांग्रेस नेताओं ने भी किसानों की मांगों का समर्थन किया।
केवाईएस ने किया किसानों के काला दिवस का समर्थन
नरवाना में क्रांतिकारी युवा संगठन केवाईएस ने किसान संगठनों द्वारा 26 मई को काला दिवस के आह्वान का समर्थन किया और सोशल मीडिया कैंपेन के माध्यम से अपनी मांगों को उठाकर सफल बनाने का आह्वान किया।
सरकार ने सात साल के कार्यकाल में निजीकरण को बढ़ावा देकर किसान व मजदूरों के हकों को किया खत्म
कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन को छह महीने पूरे होने और सरकार की गलत नीतियों के विरोध में बुधवार को कला दिवस मनाया गया। सीटू के राज्य उपाध्यक्ष कामरेड रमेश चंद्र, जिला अध्यक्ष सतबीर खरल, सचिव कपूर सिंह, कोषाध्यक्ष सुभाष तिवारी व नीलम ने कहा कि मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने सात साल के कार्यकाल में कारपोरेट घरानों की लूट को बहुत आसान बनाया है। मजदूर व किसान हितों पर डाके डाले गए हैं। कोरोना महामारी के बाद से पूरा ध्यान इस बात पर रहा है कि कैसे देश के संसाधनों व धन संपदा को कारपोरेट के हवाले किया जाए।
गांवों में लोगों ने काली पट्टी बांधकर पुतला जलाकर किया विरोध
गांव गतौली में जींद-रोहतक मार्ग पर किसानों ने काली पट्टी बांधने के बाद पुतला जलाया तथा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन की अध्यक्षता नरेश ढांडा व नरेंद्र ढांडा ने की। नरेश ढांडा ने कहा कि भाजपा सरकार किसानों की अनदेखी कर रही है। किसान लगातार छह महीने से सड़कों पर है। अब तक 400 से अधिक किसानों की मौत हो चुकी है। इस मौके पर पूर्व सरपंच सुरेंद्र मलिक, प्रदीप, मनजीत, पाला, सतबीर व जिले सिंह मलिक मौजूद रहे।
कृषि कानूनों के विरोध में विभिन्न इकाइयों ने मनाया काला दिवस
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, भारत की जनवादी नौजवान सभा व अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की इकाइयों ने सरकार की जन विरोधी, कृषि विरोधी और युवा विरोधी नीतियों के खिलाफ बुधवार को ऑनलाइन राष्ट्रव्यापी काला दिवस के रूप में मनाया। इकाइयों ने मांग की कि पीएम केयर्स फंड का इस्तेमाल करके प्रदेश में ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, दवाइयां और अस्पतालों में बेड उपलब्ध कराने के लिए किया जाए।
जो सरकार किसानों का दिया अन्न खाती है, उसके पास किसानों से बातचीत का समय नहीं : रंगा
हरियाणा रोडवेज वर्कर यूनियन इंटक द्वारा किसानों के समर्थन में काला दिवस मनाया गया। राज्य उप महासचिव संदीप रंगा ने कहा कि जो सरकार किसानों का दिया हुआ अन्न खाती है, उसके पास उनसे बातचीत करने का समय नहीं है। एक तरफ तो देश का अन्नदाता बॉर्डर पर छह महीने से बैठा हुआ है। 450 से भी अधिक किसानों की मौत आंदोलन के दौरान हो चुकी है। वहीं दूसरी तरफ सरकार अपनी चुनाव रैलियां कर रही है। सरकार कृषि कानूनों को किसानों पर थोपना चाहती है, जिसे सहन नहीं किया जाएगा। यह कानून निजीकरण को बढ़ावा देने के लिए लागू किए गए हैं। डिपो प्रधान संजय नैन ने कहा कि सरकार द्वारा किसानों के साथ-साथ हर विभाग के कर्मचारियों का शोषण हो रहा है। इंटक यूनियन इसको कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। सरकार द्वारा रिजर्व बैंक से करोड़ों का कर्जा लेना व पूंजीपतियों के साथ मिलकर देश के सभी नागरिकों को कर्जों में डुबाना सरकार की सोची-समझी चाल है। एक तरफ तो देश का किसान भूखा मर रहा है और दूसरी तरफ सत्ताधारी नेता अपने लिए करोड़ों रुपये के महल तैयार कर रहे हैं। किसानों पर हो रहे शोषण को रोडवेज इंटक बर्दाश्त नहीं करेगी और आगे भी इसका विरोध करती रहेगी। इस अवसर पर अनिल, सोमदत्त, राजेश, नरेंद्र, कूका, सुरेंद्र, जितेंद्र, मुकेश, रामफ ल, सोनू, प्रदीप, शैलेंद्र, अशोक, महावीर भी मौजूद रहे।
गांवों में सरकार का पुतला जलाकर किसानों ने मनाया सरकार विरोधी दिवस
सफीदों में कृषि कानूनों के विरोध में बुधवार को कई गांवों में किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करके पुतले जलाए और घरों पर काले झंडे लगाकर विरोध जताया। गांव छाप्पर व रामपुरा में किसानों ने नारेबाजी करते हुए सरकार के पुतले फूंके। इसके अलावा सीपीआईएम नेता राधेश्याम हाट व छापर में लखविंदर चहल के नेतृत्व में प्रदर्शन किए गए।