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सरकारी स्कूलों में धूल फांक रहीं बायोमैट्रिक मशीनें
jind
Updated Sat, 30 Jul 2016 01:00 AM IST
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शहर के एक राजकीय स्कूल में बंद पड़ी बायोमैट्रिक मशीन का फोटो।
- फोटो : bureau
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जिले की अधिकांश सरकारी स्कूलों में बायोमैट्रिक मशीनें बंद होने की वजह से अध्यापकों की ऑनलाइन हाजिरी नहीं लग पा रही है। अकेले राजकीय प्राथमिक स्कूलों में ही विभाग के पोर्टल पर रजिस्टर्ड 2464 कर्मचारियों में से केवल 616 कर्मचारियों की ही हाजिरी आनलाइन लगी है। स्कूल प्रबंधन बायोमैट्रिक मशीनों के बंद होने का कारण सिम के हटने को बता रहे हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की समस्या का भी हवाला दिया जा रहा है। जिला शिक्षा अधिकारी वंदना गुप्ता ने स्कूलों द्वारा जानबूझकर मशीनों को बंद रखने की बात कहते हुुए जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को मामले की जांच सौंपी है। प्रदेश में सभी सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की ऑनलाइन हाजिरी सुनिश्चित करने के लिए बायोमैट्रिक मशीनें लगाई गई हैं। अध्यापकों को सुबह स्कूल में आते ही व दोपहर को स्कूल छोड़ते समय बायोमैट्रिक मशीन से हाजिरी लगानी होती है। अब पिछले काफी समय से बायोमैट्रिक मशीनें बंद होने की वजह से अध्यापकों की ऑनलाइन हाजिरी नहीं लग रही है। सरकार द्वारा लाखों रुपये खर्च करके शुरू की गई यह योजना अव्यवस्था की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। जिला शिक्षा अधिकारी ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को जांच के आदेश देते हुए बायोमैट्रिक मशीनों पर हाजिरी लगवाने के निर्देश दिए हैं। अगर इसके बाद किसी स्कूल में बायोमैट्रिक मशीन बंद पाई जाती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी स्कूल मुखिया की होगी।
सिम को हटाने की वजह से अटका काम
गौरतलब है कि पिछले दिनों प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश में सिम (स्कूल सूचना प्रबंधक) को हटाया गया था। प्रदेश में हटने वाले सिम की कुल संख्या 895 हैं, जिनमें से जिले में कुल 47 सिम थे। सिम द्वारा सरकारी स्कूलों के मासिक परीक्षा परिणाम, एसएलसी (स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट) समेत अन्य कई प्रकार के डाटा को कंप्यूटर पर ऑनलाइन करते थे। स्कूल प्रबंधन के अनुसार सिम के हटाए जाने की वजह से ही बायोमैट्रिक मशीनें बंद पड़ी हैं, इन्हें अब चलाने वाला कोई नहीं है। जिले के कुल 749 सरकारी स्कूलों में से केवल 379 स्कूलों का ही मासिक परीक्षा परिणाम ऑनलाइन हुआ है।
ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की वजह से हो रही परेशानी
ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की समस्या के चलते बायोमैट्रिक मशीन पर ऑनलाइन हाजिरी नहीं लगने का हवाला दिया जा रहा है। इस मामले में कई स्कूल मुखियाओं ने जिला शिक्षा अधिकारी को शिकायत भी की है। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार इंटरनेट की समस्या एक या दो दिन हो सकती है, आए दिन नहीं।
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शिक्षकों को नहीं है तकनीकी जानकारी
प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी विभागों को बायोमैट्रिक मशीनें लगाई गई हैं, ताकि अधिकारी व कर्मचारी फरलो नहीं मार सकें। स्कूलों में प्रदेश सरकार द्वारा जो सिम लगाए गए थे, उनका काम स्कूलों में विद्यार्थियों से संबंधित सभी प्रकार का रिकॉर्ड ऑनलाइन करना है। इसके अलावा सिम स्कूलों में लगी बायोमैट्रिक मशीनों को भी ऑपरेट करते थे। स्कूलों में ज्यादातर शिक्षकों को तकनीकी ज्ञान नहीं होने की वजह से भी ऑनलाइन हाजिरी लगाने में परेशानी हो रही है। स्कूलों में बायोमैट्रिक मशीनें नहीं लगने से पहले शिक्षक समय पर नहीं पहुंचते थे। कई बार विभाग द्वारा की गई जांच में सामने आया कि स्कूल में हाजिरी लगी होने के बावजूद शिक्षक स्कूल से नदारद पाए गए।
बायोमैट्रिक मशीन चलाने के लिए सिम का कोई काम नहीं है। स्कूलों द्वारा जानबूझकर मशीनें बंद रखकर हाजिरी नहीं लगाई जा रही है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल मुखिया इंटरनेट की समस्या का हवाला देते हैं। इंटरनेट की समस्या कभी-कभार तो हो सकती है, रोज नहीं। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी इस बारे में जांच करेंगी और जल्द ही सभी स्कूलों में बायोमैट्रिक हाजिरी शुरू करवाई जाएगी।
- वंदना गुप्ता, जिला शिक्षा अधिकारी जींद।
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सिम को हटाने की वजह से अटका काम
गौरतलब है कि पिछले दिनों प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश में सिम (स्कूल सूचना प्रबंधक) को हटाया गया था। प्रदेश में हटने वाले सिम की कुल संख्या 895 हैं, जिनमें से जिले में कुल 47 सिम थे। सिम द्वारा सरकारी स्कूलों के मासिक परीक्षा परिणाम, एसएलसी (स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट) समेत अन्य कई प्रकार के डाटा को कंप्यूटर पर ऑनलाइन करते थे। स्कूल प्रबंधन के अनुसार सिम के हटाए जाने की वजह से ही बायोमैट्रिक मशीनें बंद पड़ी हैं, इन्हें अब चलाने वाला कोई नहीं है। जिले के कुल 749 सरकारी स्कूलों में से केवल 379 स्कूलों का ही मासिक परीक्षा परिणाम ऑनलाइन हुआ है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की वजह से हो रही परेशानी
ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की समस्या के चलते बायोमैट्रिक मशीन पर ऑनलाइन हाजिरी नहीं लगने का हवाला दिया जा रहा है। इस मामले में कई स्कूल मुखियाओं ने जिला शिक्षा अधिकारी को शिकायत भी की है। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार इंटरनेट की समस्या एक या दो दिन हो सकती है, आए दिन नहीं।
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शिक्षकों को नहीं है तकनीकी जानकारी
प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी विभागों को बायोमैट्रिक मशीनें लगाई गई हैं, ताकि अधिकारी व कर्मचारी फरलो नहीं मार सकें। स्कूलों में प्रदेश सरकार द्वारा जो सिम लगाए गए थे, उनका काम स्कूलों में विद्यार्थियों से संबंधित सभी प्रकार का रिकॉर्ड ऑनलाइन करना है। इसके अलावा सिम स्कूलों में लगी बायोमैट्रिक मशीनों को भी ऑपरेट करते थे। स्कूलों में ज्यादातर शिक्षकों को तकनीकी ज्ञान नहीं होने की वजह से भी ऑनलाइन हाजिरी लगाने में परेशानी हो रही है। स्कूलों में बायोमैट्रिक मशीनें नहीं लगने से पहले शिक्षक समय पर नहीं पहुंचते थे। कई बार विभाग द्वारा की गई जांच में सामने आया कि स्कूल में हाजिरी लगी होने के बावजूद शिक्षक स्कूल से नदारद पाए गए।
बायोमैट्रिक मशीन चलाने के लिए सिम का कोई काम नहीं है। स्कूलों द्वारा जानबूझकर मशीनें बंद रखकर हाजिरी नहीं लगाई जा रही है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल मुखिया इंटरनेट की समस्या का हवाला देते हैं। इंटरनेट की समस्या कभी-कभार तो हो सकती है, रोज नहीं। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी इस बारे में जांच करेंगी और जल्द ही सभी स्कूलों में बायोमैट्रिक हाजिरी शुरू करवाई जाएगी।
- वंदना गुप्ता, जिला शिक्षा अधिकारी जींद।