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‘भागवत कथा से होता है मन का शुद्धिकरण’

Sat, 27 Aug 2022 08:39 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 27 Aug 2022 08:39 PM IST
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Bhagavat Katha purifies the mind
श्रद्धालुओं को संबोधित करतीं जीवानुगा शैलवासिनी दासी। संवाद। - फोटो : Jind
सफीदों। जीबीपीएस भक्तवृंद सफीदों के तत्वावधान में नागक्षेत्र सरोवर प्रांगण में चल रही श्रीमद् भागवत कथामृत में शनिवार को श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कथावाचक जीवानुगा शैलवासिनी दासी ने कहा कि श्रीकृष्ण का नाम, रूप, गुण व लीलाएं सच्चिदानंद हैं। कलियुग में हरिनाम द्वारा भवसागर से पार हुआ जा सकता है। हरि नाम ही सभी पापों का अंत करने वाला है और भगवत प्राप्ति कराने वाला है।
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उन्होंने कहा कि कलियुग में बहुत दोष हैं, फिर भी एक महान गुण है, जो भी हरिनाम महामंत्र का जाप करता है, वह सभी दोषों से मुक्त हो जाता है और भगवत को प्राप्त करता है। भागवत कथा से मन का शुद्धिकरण होता है। इससे संशय दूर होता है और शंाति व मुक्ति मिलती है। श्रीमद भागवत कथा श्रवण से जन्म जन्मांतर के विकार नष्ट होकर प्राणी मात्र का लौकिक व आध्यात्मिक विकास होता है। जहां अन्य युगों में धर्म लाभ एवं मोक्ष प्राप्ति के लिए कड़े प्रयास करने पड़ते हैं, कलियुग में कथा सुनने मात्र से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है। सोया हुआ ज्ञान वैराग्य कथा श्रवण से जाग्रत हो जाता है। कथा कल्पवृक्ष के समान है, जिससे सभी इच्छाओं की पूर्ति की जा सकती है। भगवान की विभिन्न कथाओं का सार श्रीमद्भागवत मोक्ष दायिनी है। इसके श्रवण से परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई और कलियुग में आज भी इसका प्रत्यक्ष प्रमाण देखने को मिलते हैं।
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उन्होंने कहा कि सत्संग व कथा के माध्यम से मनुष्य भगवान की शरण में पहुंचता है, वरना वह इस संसार में आकर मोहमाया के चक्कर में पड़ जाता है, इसीलिए मनुष्य को समय निकालकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। बच्चों को संस्कारवान बनाकर सत्संग कथा के लिए प्रेरित करें। भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला के दर्शन करने के लिए भगवान शिवजी को गोपी का रूप धारण करना पड़ा था। वास्तव में भगवान की कथा के दर्शन हर किसी को प्राप्त नहीं होते। कलियुग में भागवत साक्षात श्रीहरि का रूप है। पावन हृदय से इसका स्मरण मात्र करने पर करोड़ों पुण्यों का फल प्राप्त हो जाता है।
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इस मौके पर ललित राणा, राजेंद्र, मधु, सुनीता, सुमित्रा, सुनीता, आशा, गीता, विनोद, बृजभूषण, तरसेम व कुसुम मौजूद थे।

 श्रीमद्भागवत कथा सुनते श्रद्धालु। संवाद।

श्रीमद्भागवत कथा सुनते श्रद्धालु। संवाद।- फोटो : Jind

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