{"_id":"67fc04291a7891f77c0d3bbe","slug":"as-the-heat-increases-the-demand-for-earthen-pots-increases-jind-news-c-199-1-jnd1002-133058-2025-04-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jind News: गर्मी बढ़ते ही बढ़ गई मिट्टी के बने मटकों की मांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jind News: गर्मी बढ़ते ही बढ़ गई मिट्टी के बने मटकों की मांग
Mon, 14 Apr 2025 12:06 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 14 Apr 2025 12:06 AM IST
विज्ञापन
13जेएनडी18-मिट्टी के मटके बनाता कारीगर। संवाद
जुलाना। प्रदेश में गर्मी बढ़ते ही मिट्टी के मटकों की मांग भी बढ़ गई है। मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कारीगरों से मटकों के ऑर्डर ही पूरे ही हो रहे हैं। ऐसे में कारीगर पूरे परिवार के समेत मिट्टी के मटके बनाने में जुटे हुए हैं, तब कहीं जाकर उनके ऑर्डर पूरे किए जा रहे हैं। आधुनिकता के युग में एक और जहां पानी को ठंडा करने के लिए कई स्रोत हैं तो मिट्टी के बने मटके सबसे अव्वल अपना स्थान रखते हैं क्योंकि मिट्टी के बर्तन में पानी रखने से पानी ठंडा और स्वास्थ्य वर्धक होता है।
मिट्टी के मटकों में छोटे छोटे छिद्र होते हैं, जिनमें से पानी का रिसाव होता रहता है और हवा के संपर्क में आने से पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है। मिट्टी के बर्तनों के अलावा रेफ्रिजरेटर में पानी ठंडा किया जाता है, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार मिट्टी के मटकों में रखा पानी ज्यादा लाभदायक होता है। प्राचीन काल से ही लोग मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग करते आ रहे हैं। मिट्टी से बने घड़े या मटके में मृदा के खास गुण होते हैं, जो पानी की अशुद्धियों को दूर करते हैं और लाभकारी खनिज प्रदान करते हैं। इसका पानी हमारे शरीर को विषैले तत्वों से मुक्त कर प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने में फायदेमंद साबित होता है। अच्छी सेहत के लिए मिट्टी के घड़े का पानी पीना फायदेमंद है।
मिट्टी के बने बर्तनों में यह है अंतर
प्लास्टिक के बर्तनों में बिस्फेनॉल ए (बीपीए) और पॉली विनायड क्लोराइड होने के कारण कैंसर रोग का खतरा पैदा होता है जबकि मिट्टी के बर्तन प्राकृतिक मिट्टी से बनाकर पकाए जाते हैं। इस कारण स्वास्थ्य वर्धक होने के साथ साथ ठंडक प्रदान करते हैं और मिट्टी की सौंधी खुशबू से तन और मन दोनों को शांति मिलती है। इसलिए हमें गर्मी में मिट्टी के घड़े का पानी ही प्रयोग करना चाहिए। इसी प्रकार एल्यूमिनियम के बने बर्तनों में खाना बनाने में एलर्जी जैसी बीमारियां पैदा होती हैं, क्योंकि खाना बनाते समय एल्यूमिनियम खाने के साथ क्रिया करते हैं, जोकि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। इसलिए मिट्टी के बर्तन ही लाभदायक होते हैं।
विज्ञापन
मटकों के लिए मिट्टी नहीं मिलना व्यवसाय में बन रही बाधा
जुलाना निवासी राजबीर ने बताया कि मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए काली मिट्टी की जरूरत होती है, जो आसानी से नहीं मिलती। जहां मिलती है उसे लाने में काफी परेशानी होती है और महंगी भी ज्यादा पड़ती है। मिट्टी महंगी मिलने से उनके व्यवसाय पर सीधा असर पड़ता है।
मिट़्टी के बर्तन प्रयोग करना हर ओर से लाभदायक
मिट्टी के बर्तन में पानी रखने से पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है। जबकि फ्रिज में पानी बिजली की मदद से ठंडा होता है। इससे बिजली की खपत होती है। मिट्टी के बर्तन में रखने से बिजली की बचत होती है और मिट्टी के बर्तन बनाने वाले लोगों को भी फायदा होता है।
-भारती, ग्रामीण महिला
मिट्टी के मटके का पानी पीने से पेट की बीमारियां होती हैं कम
गर्भवती महिलाओं को मिट्टी के बर्तन के रखे पानी को प्रयोग करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा फ्रिज का पानी एक बार पीने में तो ठंडा महसूस होता है, लेकिन थोड़ी देर बाद शरीर की गर्मी को बढ़ा देता है। मिट्टी के मटके का पानी शरीर के तापमान को स्थिर रखता है।
-डॉ. हर्षिता अहलावत, महिला रोग विशेषज्ञ।
विज्ञापन
मिट्टी के मटकों में छोटे छोटे छिद्र होते हैं, जिनमें से पानी का रिसाव होता रहता है और हवा के संपर्क में आने से पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है। मिट्टी के बर्तनों के अलावा रेफ्रिजरेटर में पानी ठंडा किया जाता है, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार मिट्टी के मटकों में रखा पानी ज्यादा लाभदायक होता है। प्राचीन काल से ही लोग मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग करते आ रहे हैं। मिट्टी से बने घड़े या मटके में मृदा के खास गुण होते हैं, जो पानी की अशुद्धियों को दूर करते हैं और लाभकारी खनिज प्रदान करते हैं। इसका पानी हमारे शरीर को विषैले तत्वों से मुक्त कर प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने में फायदेमंद साबित होता है। अच्छी सेहत के लिए मिट्टी के घड़े का पानी पीना फायदेमंद है।
विज्ञापन
मिट्टी के बने बर्तनों में यह है अंतर
प्लास्टिक के बर्तनों में बिस्फेनॉल ए (बीपीए) और पॉली विनायड क्लोराइड होने के कारण कैंसर रोग का खतरा पैदा होता है जबकि मिट्टी के बर्तन प्राकृतिक मिट्टी से बनाकर पकाए जाते हैं। इस कारण स्वास्थ्य वर्धक होने के साथ साथ ठंडक प्रदान करते हैं और मिट्टी की सौंधी खुशबू से तन और मन दोनों को शांति मिलती है। इसलिए हमें गर्मी में मिट्टी के घड़े का पानी ही प्रयोग करना चाहिए। इसी प्रकार एल्यूमिनियम के बने बर्तनों में खाना बनाने में एलर्जी जैसी बीमारियां पैदा होती हैं, क्योंकि खाना बनाते समय एल्यूमिनियम खाने के साथ क्रिया करते हैं, जोकि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। इसलिए मिट्टी के बर्तन ही लाभदायक होते हैं।
विज्ञापन
मटकों के लिए मिट्टी नहीं मिलना व्यवसाय में बन रही बाधा
जुलाना निवासी राजबीर ने बताया कि मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए काली मिट्टी की जरूरत होती है, जो आसानी से नहीं मिलती। जहां मिलती है उसे लाने में काफी परेशानी होती है और महंगी भी ज्यादा पड़ती है। मिट्टी महंगी मिलने से उनके व्यवसाय पर सीधा असर पड़ता है।
मिट़्टी के बर्तन प्रयोग करना हर ओर से लाभदायक
मिट्टी के बर्तन में पानी रखने से पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है। जबकि फ्रिज में पानी बिजली की मदद से ठंडा होता है। इससे बिजली की खपत होती है। मिट्टी के बर्तन में रखने से बिजली की बचत होती है और मिट्टी के बर्तन बनाने वाले लोगों को भी फायदा होता है।
-भारती, ग्रामीण महिला
मिट्टी के मटके का पानी पीने से पेट की बीमारियां होती हैं कम
गर्भवती महिलाओं को मिट्टी के बर्तन के रखे पानी को प्रयोग करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा फ्रिज का पानी एक बार पीने में तो ठंडा महसूस होता है, लेकिन थोड़ी देर बाद शरीर की गर्मी को बढ़ा देता है। मिट्टी के मटके का पानी शरीर के तापमान को स्थिर रखता है।
-डॉ. हर्षिता अहलावत, महिला रोग विशेषज्ञ।

13जेएनडी18-मिट्टी के मटके बनाता कारीगर। संवाद

13जेएनडी18-मिट्टी के मटके बनाता कारीगर। संवाद