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Jind News: चंद्र ग्रहण का सूतक लगते ही मंदिरों के कपाट बंद
Sun, 07 Sep 2025 11:53 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sun, 07 Sep 2025 11:53 PM IST
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07जेएनडी27: सूतक लगते ही बंद हुए जयंती देवी मंदिर के कपाट। पुजारी
जींद। अगहन पूर्णिमा पर रविवार की देर शाम खग्रास चंद्रग्रहण रहा। चंद्रग्रहण से पहले दोपहर को एक बजकर 57 मिनट पर इसका सूतक शुरू हो गया। इसके चलते शहर के प्रमुख मंदिरों जयंती देवी मंदिर, शिव मंदिर, गणेश मंदिर, सांई मंदिर, भूतेश्वर मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए।
पुजारियों ने श्रद्धालुओं से ग्रहण काल समय के दौरान घरों में रहकर मां भगवती की पूजा करने की बात कही। चंद्रग्रहण का समय समाप्त होने के बाद ही मंदिरों के कपाट फिर से श्रद्धालुओं के लिए खोले गए।
यह चंद्र ग्रहण 108 साल बाद लग रहा है। ग्रहण रात 9:57 बजे से शुरू हुआ और इसका मध्य काल 11:41 बजे रहेगा। ग्रहण रात 1:27 बजे समाप्त होगा। ऐसा माना जाता है कि ग्रहण काल में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती हैं। ऐसे में मंदिरों के कपाट शुद्धिकरण और अनुष्ठानों के लिए बंद कर दिए जाते हैं।
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वहीं ग्रहण के दौरान मंदिर इसलिए भी बंद कर दिए जाते हैं कि इस समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा जो देवताओं की मूर्तियों की पवित्रता को भंग कर सकती है। ऐसे में सूतक काल में मंदिरों को बंद रखने से मूर्तियों को शुद्ध रखा जाता है और भक्तों को इस नकारात्मक प्रभाव से बचाया जाता है।
यह समय अंतर्मुखी होकर पूजा-पाठ और ध्यान के लिए बेहतर माना जाता है। ग्रहण के बाद पवित्र गंगाजल से मंदिर का शुद्धिकरण करेंगे और देवताओं का अभिषेक किया जाएगा ताकि नकारात्मक शक्तियों का कोई असर न रहे।
रात के 9:57 से शुरू होगा ग्रहण
विश्वभर में चंद्रगहण 3:30 घंटे का रहा। पितृ पक्ष के प्रारंभ पर चंद्रग्रहण और समापन पर आंशिक सूर्य ग्रहण रहेगा। ग्रहण का समय रात 9:57 से रात 1:27 बजे तक का रहा है जबकि ग्रहण का सूतक दोपहर 12:57 पर ही लग गया। इसके चलते मंदिरों के कपाटों को बंद रखा गया। चंद्रग्रहण के दौरान चाकू, सुई, कैंची जैसी नुकीली वस्तुओं का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों की शुद्धि की गई। मां भगवती सहित अन्य सभी देवताओं की मूर्तियों को स्नान कराया गया।-नवीन शास्त्री, पुजारी जयंती देवी मंदिर
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पुजारियों ने श्रद्धालुओं से ग्रहण काल समय के दौरान घरों में रहकर मां भगवती की पूजा करने की बात कही। चंद्रग्रहण का समय समाप्त होने के बाद ही मंदिरों के कपाट फिर से श्रद्धालुओं के लिए खोले गए।
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यह चंद्र ग्रहण 108 साल बाद लग रहा है। ग्रहण रात 9:57 बजे से शुरू हुआ और इसका मध्य काल 11:41 बजे रहेगा। ग्रहण रात 1:27 बजे समाप्त होगा। ऐसा माना जाता है कि ग्रहण काल में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती हैं। ऐसे में मंदिरों के कपाट शुद्धिकरण और अनुष्ठानों के लिए बंद कर दिए जाते हैं।
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वहीं ग्रहण के दौरान मंदिर इसलिए भी बंद कर दिए जाते हैं कि इस समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा जो देवताओं की मूर्तियों की पवित्रता को भंग कर सकती है। ऐसे में सूतक काल में मंदिरों को बंद रखने से मूर्तियों को शुद्ध रखा जाता है और भक्तों को इस नकारात्मक प्रभाव से बचाया जाता है।
यह समय अंतर्मुखी होकर पूजा-पाठ और ध्यान के लिए बेहतर माना जाता है। ग्रहण के बाद पवित्र गंगाजल से मंदिर का शुद्धिकरण करेंगे और देवताओं का अभिषेक किया जाएगा ताकि नकारात्मक शक्तियों का कोई असर न रहे।
रात के 9:57 से शुरू होगा ग्रहण
विश्वभर में चंद्रगहण 3:30 घंटे का रहा। पितृ पक्ष के प्रारंभ पर चंद्रग्रहण और समापन पर आंशिक सूर्य ग्रहण रहेगा। ग्रहण का समय रात 9:57 से रात 1:27 बजे तक का रहा है जबकि ग्रहण का सूतक दोपहर 12:57 पर ही लग गया। इसके चलते मंदिरों के कपाटों को बंद रखा गया। चंद्रग्रहण के दौरान चाकू, सुई, कैंची जैसी नुकीली वस्तुओं का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों की शुद्धि की गई। मां भगवती सहित अन्य सभी देवताओं की मूर्तियों को स्नान कराया गया।-नवीन शास्त्री, पुजारी जयंती देवी मंदिर