{"_id":"652ccb20e8e178999d0e7b84","slug":"arya-samaj-performed-havan-for-environmental-purification-jind-news-c-199-1-sroh1007-7263-2023-10-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jind News: आर्य समाज ने पर्यावरण शुद्धि के लिए किया हवन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jind News: आर्य समाज ने पर्यावरण शुद्धि के लिए किया हवन
Mon, 16 Oct 2023 11:03 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 16 Oct 2023 11:03 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
नरवाना। आर्य समाज में रविवार को पर्यावरण शुद्धि एवं संवर्धन के लिए हवन किया गया। इस दौरान सत्संग भी हुआ जिसमें किताब सिंह आर्य एवं यशपाल आर्य ने गीत और भजन सुनाया और उपासना की वैदिक संस्कृति का उल्लेख किया। शिव आर्य ने पर्यावरण संरक्षण में यज्ञ हवन के योगदान पर विचार विमर्श किया है। यज्ञ करने से हवा, भूमि एवं जल की भी शुद्ध होती है।
आर्य समाज प्रधान चंद्रकांत शर्मा ने कहा कि वेद का पढ़ना और पढ़ाना सब आर्यों का परम धर्म है। मनुष्य को धर्म अनुसार समाज और राष्ट्र की उन्नति में सहयोग करना चाहिए। पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन में किसान भाइयों से आह्वान किया गया कि वह फसल अवशेष एवं पराली को प्राकृतिक खाद में बदलकर भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने पर जोर दें। आग जलाने से वातावरण प्रदूषित होता है और भूमि की उर्वरा शक्ति भी कमजोर होती है। जयपाल सिंह आर्य कहा कि ईर्ष्या, द्वेष एवं क्रोध की अग्नि में मानवता के साथ प्राणी जगत विनाश की ओर अग्रसर हो रहा है। इस अवसर पर कृष्ण आर्य, मिथिलेश शास्त्री, वेदपाल, संजीव, अमित, सुमित उपस्थित रहे।
विज्ञापन
नरवाना। आर्य समाज में रविवार को पर्यावरण शुद्धि एवं संवर्धन के लिए हवन किया गया। इस दौरान सत्संग भी हुआ जिसमें किताब सिंह आर्य एवं यशपाल आर्य ने गीत और भजन सुनाया और उपासना की वैदिक संस्कृति का उल्लेख किया। शिव आर्य ने पर्यावरण संरक्षण में यज्ञ हवन के योगदान पर विचार विमर्श किया है। यज्ञ करने से हवा, भूमि एवं जल की भी शुद्ध होती है।
आर्य समाज प्रधान चंद्रकांत शर्मा ने कहा कि वेद का पढ़ना और पढ़ाना सब आर्यों का परम धर्म है। मनुष्य को धर्म अनुसार समाज और राष्ट्र की उन्नति में सहयोग करना चाहिए। पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन में किसान भाइयों से आह्वान किया गया कि वह फसल अवशेष एवं पराली को प्राकृतिक खाद में बदलकर भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने पर जोर दें। आग जलाने से वातावरण प्रदूषित होता है और भूमि की उर्वरा शक्ति भी कमजोर होती है। जयपाल सिंह आर्य कहा कि ईर्ष्या, द्वेष एवं क्रोध की अग्नि में मानवता के साथ प्राणी जगत विनाश की ओर अग्रसर हो रहा है। इस अवसर पर कृष्ण आर्य, मिथिलेश शास्त्री, वेदपाल, संजीव, अमित, सुमित उपस्थित रहे।
विज्ञापन