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Jind News: जिले में एक्यूआई 497 पहुंचा, प्राइमरी स्कूल किए बंद
Tue, 19 Nov 2024 01:16 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Tue, 19 Nov 2024 01:16 AM IST
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18जेएनडी06-जिले में प्रदूषण स्तर बढऩे से छाया स्मॉग। संवाद
जींद। जिले की हवा लगातार बिगड़ रही है। सोमवार को जिले का एक्यूआई पहली बार 497 पहुंच गया। इससे प्रदूषण का स्तर बेहद खराब स्थिति में पहुंच गया है। बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए जिला प्रशासन ने प्राइमरी स्कूलों की छुट्टी कर दी है। अब बच्चे घर पर रहकर ही कार्य करेंगे। प्रदूषण के बढ़ते स्तर से लोगों को सांस लेना मुश्किल हो गया है। आंखों में जलन हो रही है। सबसे ज्यादा असर बच्चे और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर ज्यादा पड़ रहा है। एक्यूआई सुधारने के लिए केंद्र सरकार ने दिल्ली एनसीआर में गैप-4 लागू कर दिया है। इससे कुछ चीजों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लग गया है तो कुछ चीजों को शर्तों के साथ मंजूरी दी गई है। हालांकि यहां जरूरी सामान ले जाने वाले और जरूरी सेवाओं वाले ट्रकों को राहत दी गई है।
ग्रैप-4 लागू होते ही प्राइमरी स्कूल बंद कर दिए हैं। यदि एक्यूआई में सुधार नहीं हुआ तो दूसरी कक्षाओं को बंद किया जा सकता है। 10वीं और 12वीं को छोड़कर अन्य कक्षाओं की पढ़ाई ऑनलाइन करवाई जा सकती है। ग्रैप-4 के नियमानुसार जिला प्रशासन अन्य आपातकालीन उपायों पर भी गौर कर सकता है। इसमें ऑड-इवन आधार पर गाड़ियों का रोड पर चलने की अनुमति देने के अलावा कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थानों को बंद करना व गैर आपातकालीन कामर्शियल गतिविधियों को बंद करना शामिल है।
जिले में किसी भी प्रकार के फ्लाईओवर, पुल, हाईवे, पावर ट्रांसमिशन या पाइपलाइन कार्यों के निर्माण पर ग्रैप-3 की तरह प्रतिबंध जारी रहेगा। प्रशासन ने लोगों से पाबंदियों का सख्ती से पालन करने की अपील की है। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
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दिल और सांस के मरीज को ज्यादा परेशानी
एक्यूआई स्तर के लगातार बढ़ने से जहां आमजन परेशान हैं, वहीं दिल और सांस के मरीज को ज्यादा दिक्कत हो रही है। फिलहाल प्रदूषण से घर में भी राहत नहीं मिल रही है। जहां बच्चे और बुजुर्ग पार्कों में सैर करने के लिए जाते थे, वे अब घर पर ही समय व्यतीत कर रहे हैं। वहीं युवा भी व्यायाम करने के लिए बाहर जाते थे, वह भी सुबह-शाम बाहर जाने से परहेज कर रहे हैं। दिन के अलावा सुबह-शाम भी प्रदूषण से राहत नहीं मिल पा रही है। लोगों के बाहर निकलते ही आंखों में जलन होने लगती है, जिससे आंखें लाल हो रही हैं। चिकित्सकों ने दिल्ली, सांस और अन्य बीमारियों से ग्रसित लोगों को घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी जा रही है।
जिले में प्रदूषण की क्या है वजह
लगातार बढ़ रहे प्रदूषण का कारण जिले में छोटी-छोटी उद्योग इकाइयां से निकलने वाला जहरीला धुआं, पराली, सड़कों पर उड़ने वाली धूल है। हालांकि जिले में कोई बड़ा उद्योग नहीं है, लेकिन कई ऐसी छोटी-छोटी इकाइयां है, जो भारी मात्रा में प्रदूषण फैलाती है है। उन इकाइयों से दिन-रात जहरीला धुआं निकलता रहता है। वहीं प्रदूषण स्तर बढ़ाने में टायर जलाने वाली फैक्टरियों का विशेष योगदान है। शिकायत करने के बाद भी प्रशासन इन पर कार्रवाई नहीं कर रहा। बस हर बार नोटिस भेजकर खानापूर्ति की जाती है। इनके अलावा धान के अवशेष जलाने के मामले भी रुक नहीं रहे हैं। शहर की कई ऐसी सड़कें हैं, जिन पर धूल उड़ती रहती है। शहर में बने सभी अंडर बाईपास की एक बार भी सफाई नहीं हुई है। वहां से गुजरते समय सांस लेना बेहद मुश्किल होता है।
जिले में ग्रैप-4 के नियम लागू हो चुके हैं। जिले में चल रही टायर जलाने वाली फैक्टरियों को बंद करने के बारे में हिदायत दी हुई है। निर्माण कार्यों पर रोक लगाई हुई है, जो भी ग्रैप-4 नियमों का उल्लंघन करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। -गुलजार मलिक, नगरायुक्त, जींद।
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ग्रैप-4 लागू होते ही प्राइमरी स्कूल बंद कर दिए हैं। यदि एक्यूआई में सुधार नहीं हुआ तो दूसरी कक्षाओं को बंद किया जा सकता है। 10वीं और 12वीं को छोड़कर अन्य कक्षाओं की पढ़ाई ऑनलाइन करवाई जा सकती है। ग्रैप-4 के नियमानुसार जिला प्रशासन अन्य आपातकालीन उपायों पर भी गौर कर सकता है। इसमें ऑड-इवन आधार पर गाड़ियों का रोड पर चलने की अनुमति देने के अलावा कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थानों को बंद करना व गैर आपातकालीन कामर्शियल गतिविधियों को बंद करना शामिल है।
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जिले में किसी भी प्रकार के फ्लाईओवर, पुल, हाईवे, पावर ट्रांसमिशन या पाइपलाइन कार्यों के निर्माण पर ग्रैप-3 की तरह प्रतिबंध जारी रहेगा। प्रशासन ने लोगों से पाबंदियों का सख्ती से पालन करने की अपील की है। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
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दिल और सांस के मरीज को ज्यादा परेशानी
एक्यूआई स्तर के लगातार बढ़ने से जहां आमजन परेशान हैं, वहीं दिल और सांस के मरीज को ज्यादा दिक्कत हो रही है। फिलहाल प्रदूषण से घर में भी राहत नहीं मिल रही है। जहां बच्चे और बुजुर्ग पार्कों में सैर करने के लिए जाते थे, वे अब घर पर ही समय व्यतीत कर रहे हैं। वहीं युवा भी व्यायाम करने के लिए बाहर जाते थे, वह भी सुबह-शाम बाहर जाने से परहेज कर रहे हैं। दिन के अलावा सुबह-शाम भी प्रदूषण से राहत नहीं मिल पा रही है। लोगों के बाहर निकलते ही आंखों में जलन होने लगती है, जिससे आंखें लाल हो रही हैं। चिकित्सकों ने दिल्ली, सांस और अन्य बीमारियों से ग्रसित लोगों को घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी जा रही है।
जिले में प्रदूषण की क्या है वजह
लगातार बढ़ रहे प्रदूषण का कारण जिले में छोटी-छोटी उद्योग इकाइयां से निकलने वाला जहरीला धुआं, पराली, सड़कों पर उड़ने वाली धूल है। हालांकि जिले में कोई बड़ा उद्योग नहीं है, लेकिन कई ऐसी छोटी-छोटी इकाइयां है, जो भारी मात्रा में प्रदूषण फैलाती है है। उन इकाइयों से दिन-रात जहरीला धुआं निकलता रहता है। वहीं प्रदूषण स्तर बढ़ाने में टायर जलाने वाली फैक्टरियों का विशेष योगदान है। शिकायत करने के बाद भी प्रशासन इन पर कार्रवाई नहीं कर रहा। बस हर बार नोटिस भेजकर खानापूर्ति की जाती है। इनके अलावा धान के अवशेष जलाने के मामले भी रुक नहीं रहे हैं। शहर की कई ऐसी सड़कें हैं, जिन पर धूल उड़ती रहती है। शहर में बने सभी अंडर बाईपास की एक बार भी सफाई नहीं हुई है। वहां से गुजरते समय सांस लेना बेहद मुश्किल होता है।
जिले में ग्रैप-4 के नियम लागू हो चुके हैं। जिले में चल रही टायर जलाने वाली फैक्टरियों को बंद करने के बारे में हिदायत दी हुई है। निर्माण कार्यों पर रोक लगाई हुई है, जो भी ग्रैप-4 नियमों का उल्लंघन करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। -गुलजार मलिक, नगरायुक्त, जींद।

18जेएनडी06-जिले में प्रदूषण स्तर बढऩे से छाया स्मॉग। संवाद