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Jind News: 26 बार रक्तदान कर महिलाओं के लिए मिसाल बनीं अंतिमा
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17 जुलाना 03: अंतिमा भारद्वाज रक्तदान करते हुए। संवाद
जुलाना। क्षेत्र के गांव गतौली की बहू अंतिमा भारद्वाज रक्तदान के क्षेत्र में महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई हैं। जहां आज भी कई महिलाएं रक्तदान करने से झिझकती हैं, वहीं अंतिमा पिछले कई वर्षों से नियमित रूप से रक्तदान कर रही हैं। वह अब तक 26 बार रक्तदान कर चुकी हैं।
उनका कहना है कि रक्तदान न केवल जरूरतमंद मरीज की जान बचाने में मदद करता है बल्कि इससे स्वस्थ व्यक्ति को किसी तरह की कमजोरी नहीं आती। अंतिमा भारद्वाज ने बताया कि वर्ष 2011 में उनकी पहली डिलीवरी के दौरान उन्हें स्वयं रक्त की जरूरत पड़ी थी। उस समय उन्हें रक्त की अहमियत का एहसास हुआ। उन्होंने तभी संकल्प लिया कि भविष्य में वह स्वयं रक्तदान करेंगी और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगी।
इसके बाद उन्होंने नियमित रूप से रक्तदान करना शुरू किया और अब तक 26 बार रक्तदान कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि रक्त की एक यूनिट किसी जरूरतमंद मरीज के लिए जीवन और मृत्यु के बीच अंतर साबित हो सकती है।
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सड़क हादसों में घायल लोगों, गर्भवती महिलाओं, ऑपरेशन वाले मरीजों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को समय पर रक्त मिलने से उनकी जान बचाई जा सकती है। इसलिए स्वस्थ लोगों को बिना किसी झिझक के रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए। संवाद
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उनका कहना है कि रक्तदान न केवल जरूरतमंद मरीज की जान बचाने में मदद करता है बल्कि इससे स्वस्थ व्यक्ति को किसी तरह की कमजोरी नहीं आती। अंतिमा भारद्वाज ने बताया कि वर्ष 2011 में उनकी पहली डिलीवरी के दौरान उन्हें स्वयं रक्त की जरूरत पड़ी थी। उस समय उन्हें रक्त की अहमियत का एहसास हुआ। उन्होंने तभी संकल्प लिया कि भविष्य में वह स्वयं रक्तदान करेंगी और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगी।
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इसके बाद उन्होंने नियमित रूप से रक्तदान करना शुरू किया और अब तक 26 बार रक्तदान कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि रक्त की एक यूनिट किसी जरूरतमंद मरीज के लिए जीवन और मृत्यु के बीच अंतर साबित हो सकती है।
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सड़क हादसों में घायल लोगों, गर्भवती महिलाओं, ऑपरेशन वाले मरीजों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को समय पर रक्त मिलने से उनकी जान बचाई जा सकती है। इसलिए स्वस्थ लोगों को बिना किसी झिझक के रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए। संवाद