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Jind News: स्कूल ग्रांट में भ्रष्टाचार के आरोप, ग्रामीण बोले-शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं
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जींद। किशनपुरा स्थित राजकीय माध्यमिक विद्यालय में सरकारी ग्रांट खर्च को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच सतबीर यादव और ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए हैं। कहा कि कई बार शिकायत के बाद भी कोई सुध नहीं ले रहा।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने विद्यालय में मिट्टी भराई व मरम्मत कार्य के लिए 46 लाख की ग्रांट जारी की गई थी। ग्रामीणों ने कई बार मौखिक रूप से कार्य में सुधार करने का अनुरोध किया लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। विभाग के उच्च अधिकारियों को कई बार लिखित शिकायत भेजी लेकिन लंबे समय तक कोई जांच शुरू नहीं की गई।
जब उन्होंने जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी से शिकायत की स्थिति जाननी चाही तो उनसे शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया। इसके बाद 14 मई 2025 को विभागीय अधिकारियों की एक जांच टीम जिसमें शिक्षा विभाग के अधिकारी, एसडीओ और जूनियर इंजीनियर ने विद्यालय का दौरा किया।
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टीम ने ग्रामीणों और शिकायतकर्ता को 15 दिनों में जांच पूरी कर रिपोर्ट देने का आश्वासन दिया लेकिन आज तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। जांच के दौरान विद्यालय मुखिया ने भी लिखित में दिया गया कि कार्य अभी प्रगति पर है और जूनियर इंजीनियर की अनुमति के बाद रिकॉर्ड प्रस्तुत किया जाएगा।
इसके बाद भी महत्वपूर्ण दस्तावेज स्कूल प्रबंधन समिति को उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। कार्रवाई न होने पर शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर शिकायत दोबारा देते हुए मामले में जांच की मांग की तो मंत्री ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए थे लेकिन विभागीय स्तर पर इन निर्देशों का जानबूझकर पालन नहीं किया।
इसके बाद 17 जुलाई 2025 को विद्यालय मुखिया का स्थानांतरण कर दिया गया। उन्होंने बताया कि 11 नवंबर 2025 को शिक्षा मंत्री को भेजा गया ज्ञापन भी कथित रूप से जिला कार्यालय में लंबित रखा गया। उनका आरोप है कि यह मामला शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है।
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उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने विद्यालय में मिट्टी भराई व मरम्मत कार्य के लिए 46 लाख की ग्रांट जारी की गई थी। ग्रामीणों ने कई बार मौखिक रूप से कार्य में सुधार करने का अनुरोध किया लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। विभाग के उच्च अधिकारियों को कई बार लिखित शिकायत भेजी लेकिन लंबे समय तक कोई जांच शुरू नहीं की गई।
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जब उन्होंने जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी से शिकायत की स्थिति जाननी चाही तो उनसे शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया। इसके बाद 14 मई 2025 को विभागीय अधिकारियों की एक जांच टीम जिसमें शिक्षा विभाग के अधिकारी, एसडीओ और जूनियर इंजीनियर ने विद्यालय का दौरा किया।
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टीम ने ग्रामीणों और शिकायतकर्ता को 15 दिनों में जांच पूरी कर रिपोर्ट देने का आश्वासन दिया लेकिन आज तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। जांच के दौरान विद्यालय मुखिया ने भी लिखित में दिया गया कि कार्य अभी प्रगति पर है और जूनियर इंजीनियर की अनुमति के बाद रिकॉर्ड प्रस्तुत किया जाएगा।
इसके बाद भी महत्वपूर्ण दस्तावेज स्कूल प्रबंधन समिति को उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। कार्रवाई न होने पर शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर शिकायत दोबारा देते हुए मामले में जांच की मांग की तो मंत्री ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए थे लेकिन विभागीय स्तर पर इन निर्देशों का जानबूझकर पालन नहीं किया।
इसके बाद 17 जुलाई 2025 को विद्यालय मुखिया का स्थानांतरण कर दिया गया। उन्होंने बताया कि 11 नवंबर 2025 को शिक्षा मंत्री को भेजा गया ज्ञापन भी कथित रूप से जिला कार्यालय में लंबित रखा गया। उनका आरोप है कि यह मामला शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है।