फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jind News ›   After the grit, the administration will start the work of catching destitute animals

किरकिरी होने के बाद प्रशासन शुरू करेगा बेसहारा पशुओं को पकड़ने का काम

Sat, 04 Sep 2021 12:14 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 04 Sep 2021 12:14 AM IST
विज्ञापन
After the grit, the administration will start the work of catching destitute animals
रात को गोवंश को पकड़ने के लिए अभियान चलाने वाली अन्ना टीम। संवाद - फोटो : Jind
जिला सड़क सुरक्षा समिति की मीटिंग में डीसी द्वारा बेसहारा पशुओं को पकड़ने के दिए गए आदेश के बाद शुक्रवार रात से नगर परिषद द्वारा पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में भेजा जाएगा।
विज्ञापन

प्रशासन द्वारा यह अभियान शुरू नहीं करने पर अन्ना टीम द्वारा बुधवार रात को 15 और वीरवार रात में 85 गायों व नंदियों को नंदीशाला भेजा जा चुका है। इस पर प्रशासन की किरकिरी हुई तो शुक्रवार रात से पशुओं को पकड़ने का अभियान शुरू करने का फैसला लिया गया है। हालांकि इसके लिए पुराने ठेकेदार को ही काम दिया गया है। इससे एक पशु पकड़ने पर 486 रुपये दिए जाएंगे। दो रात में गायों को नंदीशाला पहुंचाने वाली अन्ना टीम ने प्रशासन को ऑफर दिया है कि वे गायों को मुफ्त में पकड़ लेंगे और ठेके पर जो राशि खर्च होनी है, उससे चारे का इंतजाम करें। इस पर नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी सुशील कुमार ने कहा कि ऐसे किसी की जान जोखिम में नहीं डाल सकते। इसके लिए टेंडर दिया गया है।
विज्ञापन

गौरतलब है कि प्रशासन ने 31 अगस्त से यह अभियान शुरू करने का एलान किया था। लेकिन शुरू नहीं हो सका। ऐसे में अन्ना टीम ने अपने स्तर पर एक सितंबर से यह अभियान शुरू किया। दो दिन दिन में अन्ना टीम द्वारा 100 गोवंश को नंदीशाला भेजा गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

टेंडर प्रक्रिया के कारण काम रुका हुआ था। यह काम जोखिम भरा है। प्रशासनिक स्तर पर किसी को ऐसे जोखिम में नहीं डाला जा सकता। पकड़े गए पशुओं के चारे के लिए भी व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर संगठनों की मदद ली जाएगी। सुशील कुमार, कार्यकारी अधिकारी, जींद नगर परिषद।

हमारा काम पशुओं को पकड़ने का नहीं है। सिर्फ यह दिखाया गया है कि यह काम बिना टेंडर के आसानी से हो सकता है। प्रशासन पशुओं को वाहन में भर कर नंदीशाला या गोशाला पहुंचाना चाहता है। यह जोखिम भरा है। हांक कर आसानी से ले जाया जा सकता है। पांच साल पहले करीब चार हजार पशुओं को सड़कों से हटाया था। हम यह काम करने को तैयार है, लेकिन जो राशि पशुओं को पकड़ने पर खर्च की जानी है, वह चारे के लिए प्रयोग हो। सुनील वशिष्ठ, अन्ना टीम।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed