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Jind News: विभाजन की पीड़ा झेलकर जींद में बसाया नया आशियाना

Sat, 20 Jun 2026 12:12 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jun 2026 12:12 AM IST
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After enduring the pain of Partition, he established a new home in Jind.
19जेएनडी25: संतलाल चुघ।
जींद। वर्ष 1947 के विभाजन की त्रासदी और उसके बाद नए सिरे से जीवन शुरू करने वाले परिवारों की संघर्ष-गाथा आज भी प्रेरणा देती है। शहर के वरिष्ठ समाजसेवी संतलाल चुघ मात्र पांच वर्ष की आयु में अपने परिवार के साथ विभाजन के दौरान जींद पहुंचे थे। कठिन परिस्थितियों में उनके पिता रामदितामल ने परिवार को संभालते हुए मेहनत और संघर्ष के बल पर शहर में अपनी अलग पहचान बनाई।
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संतलाल चुघ बताते हैं कि विभाजन के समय उनका परिवार रात 12 बजे अमृतसर से निकला और लुधियाना, कुरुक्षेत्र और रोहतक होते हुए जींद पहुंचा। उस दौर में सबसे बड़ी चुनौती रोज़ी-रोटी और सुरक्षित जीवन की थी। जींद आकर उनके पिता ने पशु-चारे की छोटी दुकान शुरू की।
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शुरुआत में आर्थिक तंगी और ग्राहकों की कमी जैसी परेशानियां सामने आईं लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। धीरे-धीरे लोगों का विश्वास बढ़ा और व्यवसाय स्थापित हो गया। इस दौरान परिवार के अन्य सदस्य भी सहयोग करते रहे। कठिन समय में भी पिता ने बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दी।
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संतलाल चुघ ने जाट स्कूल से दसवीं तक शिक्षा प्राप्त की और बाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े। वे समाजसेवा में सक्रिय रहे और वर्ष 1990 में नगर पार्षद बने। उनके बेटे एडवोकेट राकेश चुघ भी लगातार छह बार नगर पार्षद निर्वाचित हुए हैं। संतलाल चुघ के अनुसार जींद की जनता ने उनके परिवार को अपनापन दिया जो उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह बना। यह परिवार विभाजन की पीड़ा से उभरकर आज नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है।
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