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उड़ रही धूल को लेकर प्रशासन सख्त, प्रदूषण बढ़ने पर बंद होंगे निर्माण कार्य

Sat, 17 Oct 2020 11:03 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 17 Oct 2020 11:03 PM IST
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Administration strict about flying dust, construction work to stop if pollution increases
रोहतक रोड पर गाड़ी के गुजरने के दौरान उड़ रही धूल। - फोटो : Jind
धूल की वजह से लगातार बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर प्रशासन सख्त हो गया है। प्रशासन द्वारा आदेश जारी किया गया है कि निर्माण कार्यों की साइट पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव करना होगा। साथ ही डंपर और ट्रॉली में लादी गई मिट्टी को ढककर चलना होगा। इसके बावजूद भी यदि प्रदूषण का स्तर कम नहीं होता है तो निर्माण कार्यों पर रोक लगाई जाएगी।
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जानकारी के लिए करीब दो सप्ताह में जिले में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया है। शुक्रवार को जींद का एक्यूआई 196 तक पहुंच गया। यह बड़े औद्योगिक शहरों से भी अधिक है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारियों के अनुसार इसके लिए स्थानीय कारक जिम्मेदार हैं। इनके चलते हवा में पीएम 10 व पीएम 2.5 की मात्रा बढ़ रही है। सुबह-शाम के समय हवा में नमी होने के कारण यह तत्व नीचे आ जाते हैं और लोगों को परेशानी देते हैं।
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ईंट भट्ठे बंद, फिर भी बढ़ रहा प्रदूषण
जिले में करीब 170 ईंट भट्टे हैं। यह एनजीटी के आदेश पर प्रशासन द्वारा बंद किए गए हैं। इसके बावजूद प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। यहां तक कि जनरेटर सेट चलाने पर भी रोक लगाई गई है। इसका मुख्य कारण जिले में चल रहे विकास कार्यों में बरती जा रही अनियमितताएं हैं। शहर में चल रहे विकास कार्यों में धूल को रोकने के प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
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जिला में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ रहा है। इसको देखते हुए निर्देश जारी किए गए हैं कि सभी निर्माण कार्यों पर पानी का छिड़काव हो। साथ ही मिट्टी ढोने वाले वाहनों पर तिरपाल डाला जाए। दो-तीन दिन इसका असर देखा जाएगा। यदि प्रदूषण का स्तर कम नहीं हुआ तो विकास कार्यों पर कुछ समय के लिए रोक लगाई जाएगी।
डॉ. आदित्य दहिया, डीसी।
प्रदूषण बढ़ने से अस्पताल में बढ़ी अस्थमा मरीजों की संख्या
जैसे-जैसे प्रदूषण बढ़ रहा है वैसे-वैसे नागरिक अस्पताल में अस्थमा के रोगी भी बढ़ते जा रहे हैं। इसके अलावा आंखों में जलन तथा एलर्जी के मामले भी बढ़ रहे हैं। नागरिक अस्पताल में पिछले चार दिन में अस्थमा के 50, आंखों में जलन के 70 और अन्य एलर्जी के 100 मरीज आ चुके हैं।
पर्यावरण प्रदूषण का सबसे अधिक असर अस्थमा के रोगियों पर होता है। इन लोगों को शुद्ध हवा नहीं मिलने के कारण सांस लेने में तकलीफ होती है। इसके अलावा नाक की एलर्जी, खुजली तथा आंखों में जलन के मामले भी आ रहे हैं।

फिजीशियन डॉ. नरेश वर्मा ने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण का असर सीधा मनुष्य के फेफड़ों पर पड़ता है। कोरोना काल में तो यह और भी खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए लोगों को धूल से बचना चाहिए। बच्चों व बुजुर्ग लोगों को इसमें अधिक सावधानी की जरूरत है। मरीज को हमेशा गर्म पानी पीना चाहिए। आंखों को दिन में कम से पांच-छह बार ठंडे पानी से धोना चाहिए। घर से बाहर निकलना हो तो बिना मास्क के नहीं निकलें। जिस समय मौसम में धूल अधिक हो, उस समय बाहर निकलने से बचना चाहिए। भीड़भाड़ वाले क्षेत्र से बचना चाहिए। जिन लोगों को एलर्जी हो उनको खासकर धूल भरे वातावरण से बचने की जरूरत है।

 मरीजों को धूल से बचने के नियम बताते डॉ. नरेश वर्मा।

मरीजों को धूल से बचने के नियम बताते डॉ. नरेश वर्मा।- फोटो : Jind

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