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खाना खाकर पैसे को लेकर हुए विवाद में सीआईए कर्मचारी को पीटने का आरोप
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घटना के बाद सोमवार सुबह मौके पर मौजूद लोग। संवाद
- फोटो : Jind
खाना खाकर पैसे देने को लेकर रविवार रात में हुए विवाद में सीआईए में तैनात सिपाही जितेंद्र को ढाबा संचालक और उसके स्टाफ द्वारा पीटकर घायल करने का आरोप लगा है। वहीं ढाबा संचालक ने पुलिसकर्मी पर सर्विस रिवाल्वर से फायरिंग करने का आरोप लगाया गया है। इतना ही नहीं यह भी आरोप लगाया है कि पुलिसकर्मी अपना हथियार को मौके पर ही छोड़कर फरार हो गया है। यह घटना भाजपा विधायक डॉ. कृष्ण मिड्ढा के आवास से कुछ दूरी पर हुई है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।
सीआईए कर्मचारी जितेंद्र व उसके दो साथियों की खाने के बाद बिल के 320 रुपये नहीं देने के कारण ढाबा संचालक के साथ जमकर मारपीट हुई। इसमें ढाबा संचालक विकास, विशाल तथा ढाबे के कर्मचारियों ने सीआईए के कर्मचारी व उसके दो साथियों पर लाठी-डंडों से हमला कर दोनों को घायल कर दिया। इसमें सीआईए कर्मचारी जितेंद्र गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि उसके साथियों को मामूली चोटें आई हैं।
ढाबे के कर्मचारी बादल ने बताया कि रात 12 बजे सीआईए में तैनात सिपाही जितेंद्र अपने दो अन्य साथियों के साथ खाना खाने के लिए आए थे। उनको बताया गया कि ढाबा बंद हो चुका है। इसमें एक व्यक्ति नीचे उतरकर आया और बोला की वह सीआईए कर्मचारी हैं। इस पर ढाबा मालिक विशाल ने उनके लिए खाना पैककर गाड़ी में पहुंचा दिया। खाने के साथ डिस्पोजल प्लेट भी दी गई। बाद में उन्होंने स्टील के बर्तन मांगे तो बर्तन गाड़ी में ही दे दिया गया। उसने आरोप लगाया कि जब ढाबे का एक कर्मचारी बर्तन व बिल के 320 रुपये लेने गया तो सीआईए कर्मचारी उस पर भड़क गया। खाने का बिल देने से मना कर दिया। इसके चलते ढाबा संचालक विशाल वहां आया तो सीआईए कर्मचारी और उसके दोस्तों के साथ विवाद हो गया। ऐसे में उस पर पिस्तौल तान दी। इस दौरान विशाल का भाई विकास भी वहां आ गया और मारपीट की जाने लगी। इसके बाद बचाव में ढाबा संचालक और स्टाफ ने जितेंद्र पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। जितेंद्र वहां पर अपनी पिस्तौल डालकर फरार हो गया।
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ढाबा संचालक ने की गुंडागर्दी : सीआईए
इस मामले में जब सीआईए निरीक्षक मनोज वर्मा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि ढाबा संचालक ने ही गुंडागर्दी की है। जितेंद्र रात को ढाबे पर खाना खाने के लिए गया था। जब उन्होंने खाना मांगा तो बाहर खड़ी गाड़ी में खाना पहुंचवा दिया गया। जिसमें प्लास्टिक के दोने थे। इस पर जितेंद्र ने स्टील के बर्तन मांगे तो ढाबा संचालक के कर्मचारी ने मना कर दिया। ढाबा संचालक ने उनको बोलकर स्टील के बर्तन दिलवा दिए। इसके बाद कर्मचारियों ने खाना नहीं खाया था। इससे पहले ही शराब के नशे में ढाबा संचालक का भाई उनकी गाड़ी के पास गया और स्टील के बर्तन वापस देने की बात कहने लगा। इस पर उन्होंने खाना जल्दबाजी में खाकर बर्तन वापस कर दिए। बिल के पैसे देने की बात कही तो जितेंद्र ने बिल के लिए 500 रुपये दिए, बाकी वापस देने की बात कही। इस पर शराब के नशे में ढाबा संचालक के भाई ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। मनोज वर्मा के अनुसार जितेंद्र पर लाठी व डंडों से हमला कर दिया गया। बचाव के लिए सीआईए कर्मचारी ने अपनी पिस्तौल निकाली तो उसके हाथ पर लाठी मारकर उसे नीचे गिरा दिया। कर्मचारी पर लाठी-डंडों से हमला कर उसे घायल कर दिया। अब सिपाही का उपचार हिसार के एक निजी अस्पताल में चल रहा है।
व्यवस्था पर सवाल उठा रहा आधी रात को खुला ढाबा
पुलिस भी इस बात को मान रही है कि जितेंद्र रात करीब 12 बजे खाना खाने गया था। रात को दस बजे के बाद शहर में ढाबों को खुलने की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद भी सीआईए कर्मचारी रात को 12 बजे खाने के लिए जाते हैं। इससे साफ है कि पुलिस को खुद ही ढाबों के बंद होने के समय का नहीं पता। अगर ढाबा बंद था तो पुलिस ने कैसे खुलवाया या फिर खुला था तो दस बजे के बाद बंद क्यों नहीं करवाया।
ढाबा संचालक लापता, परिजन बता रहे पुलिस हिरासत में
घटनाक्रम के बाद रात को ही ढाबा संचालक व उसके साथियों व अन्य कर्मचारियों का परिजनों को कोई सुराग नहीं है। परिजनों का कहना है कि करीब 12 लोगों को सीआईए ने हिरासत में ले रखा है। इसकी जानकारी परिजनों को नहीं है। वहीं पुलिस का कहना है कि स्टाफ व ढाबा संचालक की जानकारी नहीं है।
रात को ढाबे के बाहर से पुलिस को दी पिस्तौल
रात को विवाद के बाद सीआईए कर्मचारी को अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद शहर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और ढाबे के बाहर से सर्विस रिवाल्वर ढाबा कर्मचारियों ने पुलिस को सौंपी।
डीएसपी करेंगे जांच
अभी तक मिली जानकारी के अनुसार दोनों पक्षों पर गलत व्यवहार करने के आरोप लग रहे हैं। ऐसे में मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच डीएसपी साधुराम से करवाई जा रही है। जांच के तथ्य सामने आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
ओपी नरवाल, डीआईजी।
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सीआईए कर्मचारी जितेंद्र व उसके दो साथियों की खाने के बाद बिल के 320 रुपये नहीं देने के कारण ढाबा संचालक के साथ जमकर मारपीट हुई। इसमें ढाबा संचालक विकास, विशाल तथा ढाबे के कर्मचारियों ने सीआईए के कर्मचारी व उसके दो साथियों पर लाठी-डंडों से हमला कर दोनों को घायल कर दिया। इसमें सीआईए कर्मचारी जितेंद्र गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि उसके साथियों को मामूली चोटें आई हैं।
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ढाबे के कर्मचारी बादल ने बताया कि रात 12 बजे सीआईए में तैनात सिपाही जितेंद्र अपने दो अन्य साथियों के साथ खाना खाने के लिए आए थे। उनको बताया गया कि ढाबा बंद हो चुका है। इसमें एक व्यक्ति नीचे उतरकर आया और बोला की वह सीआईए कर्मचारी हैं। इस पर ढाबा मालिक विशाल ने उनके लिए खाना पैककर गाड़ी में पहुंचा दिया। खाने के साथ डिस्पोजल प्लेट भी दी गई। बाद में उन्होंने स्टील के बर्तन मांगे तो बर्तन गाड़ी में ही दे दिया गया। उसने आरोप लगाया कि जब ढाबे का एक कर्मचारी बर्तन व बिल के 320 रुपये लेने गया तो सीआईए कर्मचारी उस पर भड़क गया। खाने का बिल देने से मना कर दिया। इसके चलते ढाबा संचालक विशाल वहां आया तो सीआईए कर्मचारी और उसके दोस्तों के साथ विवाद हो गया। ऐसे में उस पर पिस्तौल तान दी। इस दौरान विशाल का भाई विकास भी वहां आ गया और मारपीट की जाने लगी। इसके बाद बचाव में ढाबा संचालक और स्टाफ ने जितेंद्र पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। जितेंद्र वहां पर अपनी पिस्तौल डालकर फरार हो गया।
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ढाबा संचालक ने की गुंडागर्दी : सीआईए
इस मामले में जब सीआईए निरीक्षक मनोज वर्मा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि ढाबा संचालक ने ही गुंडागर्दी की है। जितेंद्र रात को ढाबे पर खाना खाने के लिए गया था। जब उन्होंने खाना मांगा तो बाहर खड़ी गाड़ी में खाना पहुंचवा दिया गया। जिसमें प्लास्टिक के दोने थे। इस पर जितेंद्र ने स्टील के बर्तन मांगे तो ढाबा संचालक के कर्मचारी ने मना कर दिया। ढाबा संचालक ने उनको बोलकर स्टील के बर्तन दिलवा दिए। इसके बाद कर्मचारियों ने खाना नहीं खाया था। इससे पहले ही शराब के नशे में ढाबा संचालक का भाई उनकी गाड़ी के पास गया और स्टील के बर्तन वापस देने की बात कहने लगा। इस पर उन्होंने खाना जल्दबाजी में खाकर बर्तन वापस कर दिए। बिल के पैसे देने की बात कही तो जितेंद्र ने बिल के लिए 500 रुपये दिए, बाकी वापस देने की बात कही। इस पर शराब के नशे में ढाबा संचालक के भाई ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। मनोज वर्मा के अनुसार जितेंद्र पर लाठी व डंडों से हमला कर दिया गया। बचाव के लिए सीआईए कर्मचारी ने अपनी पिस्तौल निकाली तो उसके हाथ पर लाठी मारकर उसे नीचे गिरा दिया। कर्मचारी पर लाठी-डंडों से हमला कर उसे घायल कर दिया। अब सिपाही का उपचार हिसार के एक निजी अस्पताल में चल रहा है।
व्यवस्था पर सवाल उठा रहा आधी रात को खुला ढाबा
पुलिस भी इस बात को मान रही है कि जितेंद्र रात करीब 12 बजे खाना खाने गया था। रात को दस बजे के बाद शहर में ढाबों को खुलने की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद भी सीआईए कर्मचारी रात को 12 बजे खाने के लिए जाते हैं। इससे साफ है कि पुलिस को खुद ही ढाबों के बंद होने के समय का नहीं पता। अगर ढाबा बंद था तो पुलिस ने कैसे खुलवाया या फिर खुला था तो दस बजे के बाद बंद क्यों नहीं करवाया।
ढाबा संचालक लापता, परिजन बता रहे पुलिस हिरासत में
घटनाक्रम के बाद रात को ही ढाबा संचालक व उसके साथियों व अन्य कर्मचारियों का परिजनों को कोई सुराग नहीं है। परिजनों का कहना है कि करीब 12 लोगों को सीआईए ने हिरासत में ले रखा है। इसकी जानकारी परिजनों को नहीं है। वहीं पुलिस का कहना है कि स्टाफ व ढाबा संचालक की जानकारी नहीं है।
रात को ढाबे के बाहर से पुलिस को दी पिस्तौल
रात को विवाद के बाद सीआईए कर्मचारी को अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद शहर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और ढाबे के बाहर से सर्विस रिवाल्वर ढाबा कर्मचारियों ने पुलिस को सौंपी।
डीएसपी करेंगे जांच
अभी तक मिली जानकारी के अनुसार दोनों पक्षों पर गलत व्यवहार करने के आरोप लग रहे हैं। ऐसे में मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच डीएसपी साधुराम से करवाई जा रही है। जांच के तथ्य सामने आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
ओपी नरवाल, डीआईजी।

ढाबे के बाहर जमा लोगों। संवाद- फोटो : Jind

ढाबे के बाहर गिरी सीआईए कर्मचारी की पिस्तौल। संवाद- फोटो : Jind