खाते में करोड़ों, ठोस कचरा प्रबंधन के लिए साइट तक तय नहीं कर पा रहा नप

ब्यूरो/ अमर उजाला, जींद Updated Sun, 05 Mar 2017 12:17 AM IST
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शहर के बीचोंबीच हांसी रोड पर डाला गया कचरा। - फोटो : jind
भले ही शहर को स्वच्छ रखने के लिए लाखों रुपये खर्च करने वाला नगर परिषद खाते में करोड़ों रुपये होने के बाद भी ठोस शहर को स्वच्छ रखने का दम भरने वाला नरग परिषद प्रशासन तीन साल में ठोस कचरा प्रबंधन के लिए साइट भी तय नहीं कर पाया है। ऐसे में शहर से प्रतिदिन निकलने वाला 73 टन कचर शहर के बीचोंबीच हांसी रोड पर डाला जा रहा है। इतना ही नहीं सफीदों और गोहाना रोड साइट का कचरा सेक्टर-9 के पास डाला जा रहा है। अब इस मामले को शहर की एक संस्था ने एनजीटी में उठाने का फैसला किया है।

करीब चार लाख की आबादी वाले जींद शहर से प्रतिदिन 72 से 73 टन कचरा निकलता है। नगर परिषद ने कचरा उठाने के लिए तो ठेका दे दिया है, लेकिन शहर से निकलने वाले कचरे को एक जगह डालने की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में शहर के लोगों के लिए कूड़े के ढेर आफत बने हुए हैं। नगर परिषद ने शहर में 35 कूड़ा एकत्रित केंद्र बनाए हैं, जहां कॉलोनियों का कचरा डाला जाता है। यहां से ठेकेदार द्वारा कचरा उठाकर हांसी रोड पर एसटीपी के पास नगर परिषद की खाली पड़ी जमीन पर डाला जा रहा है। 

जींद एनसीआर में शामिल, फिर भी नहीं सुविधा
जींद को करीब दो साल पहले एनसीआर में शामिल किया गया। अब यहां कचरा प्रबंधन भी एनसीआर की तर्ज पर ही होना चाहिए, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। खुले में ही शहर का कचरा डाला जा रहा है। 

यह है योजना
नगर परिषद ने ठोस कचरा प्रबंधन के लिए योजना बनाई है, लेकिन इसके लिए अभी तक जमीन का इंतजाम प्रशासन नहीं कर पा रहा है। हालांकि इसके लिए नगर परिषद के पास साढ़े तीन करोड़ रुपये रखे हैं, लेकिन उनका प्रयोग नहीं हो पा रहा है। इसके तहत करीब दस एकड़ में ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र लगाया जाना है। इसके तहत शहर से निकलने वाले कचरे को तीन भागों में बांटा जाएगा। इसमें एक भाग आर्गेनिक कचरे का होगा। इसके तहत आने वाले फलों, सब्जियों के छिले और पत्तों को पशुओं के चारे के लिए प्रयोग किया जाएगा। वहीं, कागज और गलने वाले अन्य कचरे का नवीकरण किया जाएगा। नहीं गलने वाले कचरे को उनकी उपयोगिता के अनुसार प्रयोग किया जाएगा। 

शहर के लिए आफत बना कचरा
शहर में नगर परिषद द्वारा बनाए गए कूड़ा एकत्र केंद्र लोगों के लिए आफत बने हुए हैं। विशेषकर पूनिया अस्पताल के पास वाली साइट। यहां कूड़ा खुले में पड़ा रहता है। इसे सेक्टर-11 के नलकूप में शिफ्ट किया जा सकता है। इससे लोगों को राहत मिलेगी।
प्रवीण बैनिवाल, पार्षद

एनजीटी को भेजेंगे पत्र
शहर में ठोस कचरा प्रबंधन बहुत बड़ी समस्या है। इसके लिए प्रशासन कोई गंभीर प्रयास नहीं कर रहा। ऐसे में इस मामले को अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के समक्ष उठाया जाएगा। इसके लिए काम किया जा रहा है।
हितेश हिंदुस्तानी, सदस्य टीम अन्ना

जमीन की तलाश जारी
ठोस कचरा प्रबंधन के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। इसके लिए कुछ साइट देखी हैं। इसके तहत आधुनिक प्रबंधन संयंत्र बनाया जाएगा। इससे खाद बनेगा, जिसका प्रयोग हो सकता है। जमीन मिलते ही संयंत्र का निर्माण करवा दिया जाएगा।
पूनम सैनी, चेयरपर्सन, नगर परिषद जींद

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