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Jind News: अब ‘माफी-काफी’ नहीं, सकारात्मक नाम रख रहे परिवार

Thu, 07 May 2026 11:53 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 07 May 2026 11:53 PM IST
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A significant shift in societal mindset has been observed over the past decade.
07जेएनडी08: सुनील जागलान।
जींद। एक समय था जब परिवार में बेटी के जन्म को बोझ माना जाता था और इसका असर बेटियों के नामों में भी दिखाई देता था। हरियाणा समेत देश के कई राज्यों में बेटियों के नाम माफी, काफी, अंतिम, भतेरी और संतोष जैसे रखे जाते थे। इनका भाव था कि अब परिवार में और बेटी नहीं चाहिए।
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एक दशक में समाज की सोच में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अब बेटियों को बोझ नहीं बल्कि परिवार की शान और भविष्य माना जा रहा है। माता-पिता अपनी बेटियों के लिए सकारात्मक अर्थ वाले, आधुनिक और पौराणिक नाम चुन रहे हैं। यह खुलासा सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन की ओर से किए गए तीन वर्षीय देशव्यापी सर्वे में हुआ है।
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फाउंडेशन के संस्थापक और जींद के बीबीपुर गांव के पूर्व सरपंच सुनील जागलान ने बताया कि सर्वे में सामने आया है कि बेटियों से तौबा करने वाले नाम अब लगभग खत्म हो चुके हैं।
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सुनील जागलान ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान और सेल्फी विद डॉटर मुहिम ने समाज में व्यापक जागरुकता पैदा की है। आज लाखों परिवार बेटियों के जन्म का उत्सव मना रहे हैं और सोशल मीडिया पर गर्व के साथ उनके साथ तस्वीरें साझा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब बेटियां परिवार पर बोझ नहीं, बल्कि घर की शान और नई शुरुआत का प्रतीक बन चुकी हैं।
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