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नरवाना के मनजीत चहल ने रचा इतिहास
Updated Wed, 29 Aug 2018 12:54 AM IST
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पदक के लिए मनजीत ने सात माह बहाया पसीना, अभी तक चार माह के बेटे की शक्ल तक नहीं देखी
अमर उजाला ब्यूरो
नरवाना। इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित एशियाई खेलों में नरवाना के मनजीत चहल ने गोल्ड मेडल प्राप्त कर इतिहास रच दिया है। मनजीत की गोल्डन दौड़ के बाद उसके नरवाना स्थित घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। मजे की बात यह है कि मनजीत पिछले सात महीने से प्रैक्टिस करने के लिए बाहर है। मनजीत के जाने के बाद वह बेटे का पिता भी बन चुका है। मनजीत अब गोल्ड मेडल जीतकर आएगा और अपने बेटे से मिलेगा। मनजीत ने 18 साल पहले अपने खेत में दौड़ का अभ्यास शुरू किया था। अब उसकी मेहनत रंग लाई है।
मंगलवार को दिनभर मनजीत का खेल देखने के लिए परिवार के लोग टीवी पर नजरें टिकाए रहे। उसका खेल शाम को छह बजे शुरू हुआ। उसने सवा छह बजे देश को गोल्ड मेडल समर्पित कर दिया। गोल्ड मेडल जीतने के बाद परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं है। गोल्ड मिलते मनजीत के घर पर लड्डू व दूध बंटना शुरू हो गया। बधाई देने वाले लोगों का तांता लग गया। नरवाना के नवदीप स्टेडियम में भी खेल प्रेमियों द्वारा ढोल नगाड़ों के साथ खुशी मनाई गई। मनजीत के पिता रणधीर सिंह चहल ने बताया कि उसका बेटा पिछले 18 साल से अपने खेल का अभ्यास रहा है। उसका सपना था कि वह अपने देश के लिए गोल्ड मेडल जीते। यह मंगलवार को पूरा हो गया है। अब मनजीत की नजर ओलंपिक पर हैं। इस मौके पर रामपाल उझाना, मास्टर दरिया सिंह, चरण जीत मिर्धा, हिम्मत सिंह हल, शेर सिंह, मंदीप, रोहताश पीटीआई, जोगेंद्र लोहान मौजूद रहे।
भूटान में बहाया पसीना
पिता ने बताया कि मंजीत ने कई माह भूटान में अभ्यास किया है। वह राष्ट्रीय कैंप में चयन होने के बाद घर नहीं लौटा। अपने खेल पर ही पूरा ध्यान दिया। इसी का परिणाम है कि मनजीत ने देश को गोल्ड दिलवाया।
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पति से दूर रहने का नहीं गम
मनजीत की पत्नी किरण ने बताया कि मनजीत पिछले सात माह से प्रैक्टिस के लिए घर से दूर रहा। इसी बीच उसने बेटे अबीर को भी जन्म दिया। दौड़ के प्रति जुनून के चलते मनजीत अपने बच्चे के जन्म पर भी घर आना जरूरी नहीं समझा। अब मंजीत का चार माह का बेटा है। किरण ने बताया कि उसके पति की इस जीत के बाद उसकी खुशी का ठिकाना नहीं है।
कबड्डी के खिलाड़ी रहे हैं पिता
मनजीत के पिता रणधीर सिंह अपने समय में क्षेत्र में कबड्डी के नामचीन खिलाड़ी रहे हैं। वहीं मनजीत का भाई अमर चहल भी राष्ट्रीय स्तर पर अंडर 19 आयु वर्ग में क्रिकेट के खिलाड़ी रहे हैं। घर पर खेल का माहौल होने से मनजीत को काफी मदद मिली।
भिंडी की सब्जी और चूरमा है मनजीत का पसंदीदा खाना
मनजीत के पिता 30 एकड़ की खेती करते हैं और नरवाना क्षेत्र के भैंसों के बड़े व्यापारी हैं। उनकी डेयरी में हर समय 20-30 भैंस रहती हैं। ऐसे में घर में दूध-घी की कभी कोई कम नहीं रही। इसके चलते ही मनजीत ताकतवर बना। मनजीत की मां बिमला देवी के अनुसार मनजीत को भिंडी की सब्जी और देसी घी का चूरमा बहुत पसंद है। उन्होंने बताया कि मनजीत से जब भी फोन पर बात होती थी, वह हमेशा एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीतने की बात करता था।
उझाना का ही बेटा कल कुरेश में दिखाएगा दम
एशियाई खेलों में उझाना गांव का ही बेटा 20 वर्षीय दिवेश वीरवार को कुरेश में अपना जोर दिखाएगा। दिवेश के पिता रामपाल उझाना ने बताया कि दिवेश मेडल जीतने के प्रति उत्साहित है। दिवेश का मैच वीरवार को दोपहर के समय होगा। रामपाल उझाना के अनुसार उन्हें उम्मीद है कि दिवेश देश के लिए मेडल जरूर जीतेगा। इससे पहले दिवेश दक्षिण एशियाई खेलों में गोल्ड जीत चुका है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नरवाना। इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित एशियाई खेलों में नरवाना के मनजीत चहल ने गोल्ड मेडल प्राप्त कर इतिहास रच दिया है। मनजीत की गोल्डन दौड़ के बाद उसके नरवाना स्थित घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। मजे की बात यह है कि मनजीत पिछले सात महीने से प्रैक्टिस करने के लिए बाहर है। मनजीत के जाने के बाद वह बेटे का पिता भी बन चुका है। मनजीत अब गोल्ड मेडल जीतकर आएगा और अपने बेटे से मिलेगा। मनजीत ने 18 साल पहले अपने खेत में दौड़ का अभ्यास शुरू किया था। अब उसकी मेहनत रंग लाई है।
मंगलवार को दिनभर मनजीत का खेल देखने के लिए परिवार के लोग टीवी पर नजरें टिकाए रहे। उसका खेल शाम को छह बजे शुरू हुआ। उसने सवा छह बजे देश को गोल्ड मेडल समर्पित कर दिया। गोल्ड मेडल जीतने के बाद परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं है। गोल्ड मिलते मनजीत के घर पर लड्डू व दूध बंटना शुरू हो गया। बधाई देने वाले लोगों का तांता लग गया। नरवाना के नवदीप स्टेडियम में भी खेल प्रेमियों द्वारा ढोल नगाड़ों के साथ खुशी मनाई गई। मनजीत के पिता रणधीर सिंह चहल ने बताया कि उसका बेटा पिछले 18 साल से अपने खेल का अभ्यास रहा है। उसका सपना था कि वह अपने देश के लिए गोल्ड मेडल जीते। यह मंगलवार को पूरा हो गया है। अब मनजीत की नजर ओलंपिक पर हैं। इस मौके पर रामपाल उझाना, मास्टर दरिया सिंह, चरण जीत मिर्धा, हिम्मत सिंह हल, शेर सिंह, मंदीप, रोहताश पीटीआई, जोगेंद्र लोहान मौजूद रहे।
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भूटान में बहाया पसीना
पिता ने बताया कि मंजीत ने कई माह भूटान में अभ्यास किया है। वह राष्ट्रीय कैंप में चयन होने के बाद घर नहीं लौटा। अपने खेल पर ही पूरा ध्यान दिया। इसी का परिणाम है कि मनजीत ने देश को गोल्ड दिलवाया।
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पति से दूर रहने का नहीं गम
मनजीत की पत्नी किरण ने बताया कि मनजीत पिछले सात माह से प्रैक्टिस के लिए घर से दूर रहा। इसी बीच उसने बेटे अबीर को भी जन्म दिया। दौड़ के प्रति जुनून के चलते मनजीत अपने बच्चे के जन्म पर भी घर आना जरूरी नहीं समझा। अब मंजीत का चार माह का बेटा है। किरण ने बताया कि उसके पति की इस जीत के बाद उसकी खुशी का ठिकाना नहीं है।
कबड्डी के खिलाड़ी रहे हैं पिता
मनजीत के पिता रणधीर सिंह अपने समय में क्षेत्र में कबड्डी के नामचीन खिलाड़ी रहे हैं। वहीं मनजीत का भाई अमर चहल भी राष्ट्रीय स्तर पर अंडर 19 आयु वर्ग में क्रिकेट के खिलाड़ी रहे हैं। घर पर खेल का माहौल होने से मनजीत को काफी मदद मिली।
भिंडी की सब्जी और चूरमा है मनजीत का पसंदीदा खाना
मनजीत के पिता 30 एकड़ की खेती करते हैं और नरवाना क्षेत्र के भैंसों के बड़े व्यापारी हैं। उनकी डेयरी में हर समय 20-30 भैंस रहती हैं। ऐसे में घर में दूध-घी की कभी कोई कम नहीं रही। इसके चलते ही मनजीत ताकतवर बना। मनजीत की मां बिमला देवी के अनुसार मनजीत को भिंडी की सब्जी और देसी घी का चूरमा बहुत पसंद है। उन्होंने बताया कि मनजीत से जब भी फोन पर बात होती थी, वह हमेशा एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीतने की बात करता था।
उझाना का ही बेटा कल कुरेश में दिखाएगा दम
एशियाई खेलों में उझाना गांव का ही बेटा 20 वर्षीय दिवेश वीरवार को कुरेश में अपना जोर दिखाएगा। दिवेश के पिता रामपाल उझाना ने बताया कि दिवेश मेडल जीतने के प्रति उत्साहित है। दिवेश का मैच वीरवार को दोपहर के समय होगा। रामपाल उझाना के अनुसार उन्हें उम्मीद है कि दिवेश देश के लिए मेडल जरूर जीतेगा। इससे पहले दिवेश दक्षिण एशियाई खेलों में गोल्ड जीत चुका है।