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सैनिक , किसान और युवाओं की आवाज को उठाने के लिए हुए सम्मेलन में हुआ हंगामा
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सैनिक, किसान और युवाओं की आवाज को उठाने के लिए हुए सम्मेलन में हंगामा
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। गोहाना रोड स्थित सैनिक वाटिका में मंगलवार को किसान, युवा और सैनिकों की मांगों को पूरा करवाने के लिए एक सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें पूर्व सैनिकों समेत युवाओं और किसानों ने शिरकत की। इसमें मुख्य वक्ता के तौर पर मेजर जनरल सतबीर सिंह ने शिकरत की। इस सम्मेलन में पूर्व सैनिकों के बीच चुनाव के समय में दो राजनीतिक पार्टियों को समर्थन देने पर जमकर विवाद हुआ। इसमें कुछ सैनिकों ने मेजर जनरल सतबीर पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह किसी राजनीतिक पार्टी को सभी सैनिकों का समर्थन दिलवाना चाहते हैैैं। इस बात पर सैनिक वाटिका में हंगामा इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों ने एक दूसरे को वाटिका से बाहर करने की कोशिश की। नौमत यहां तक आ गई कि इस दौरान पुलिस को बुलाकर मामले को शांत किया गया। हालांकि बैठक में सैनिकों, पूर्व सैनिकों व उनके परिवारजनों और किसानों की ज्वलंत समस्याओं को उठाकर सरकार से इन समस्याओं के समाधान की गुहार लगाने थी। उन्होंने कहा कि वन रैंक वन पेंशन को संसद द्वारा पारित परिभाषा के अनुरूप लागू न करना, जवानों एवं सूबेदारों की मिलिट्री सर्विस पे बढ़ोतरी को नकारना, 1965 और 1971 का युद्ध लड़ चुके जवानों की वीरांगनाओं की पेंशन को बढ़ाना, नरसिम्हा रेड्डी कमेटी की 2016 की रिपोर्ट को सार्वजनिक कर लागू करना, पूर्व सैनिकों के पोलीक्लीनिक्स में डॉक्टरों, दवाइयों एवं चिकित्सा सुविधाओं की भारी कमी होना, सातवें पे कमीशन की 36 निलंबित कर्मियों का अब तक कोई समाधान न करने की आवाज उठाई। जनरल सतबीर ने कहा कि जवान और किसान एक ही परिवार से आते है। 90 प्रतिशत सैनिक किसान परिवारों से हैं और सेवानिवृत्त होकर खेती करते हैं। किसान को अपनी उपज का स्वामीनाथन रिपोर्ट के अनुसार सही दाम नहीं मिलता और मंडियों में उसकी फसल के साथ व्यापारी अनदेखी करते हैं। इस अवसर पर कैप्टन कपूर सिंह गिल, सुबेदार मेजर रामकर्ण दलाल, रमेश कौशिक, कैप्टन वेद प्रकाश, सरपंच राम कुमार मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। गोहाना रोड स्थित सैनिक वाटिका में मंगलवार को किसान, युवा और सैनिकों की मांगों को पूरा करवाने के लिए एक सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें पूर्व सैनिकों समेत युवाओं और किसानों ने शिरकत की। इसमें मुख्य वक्ता के तौर पर मेजर जनरल सतबीर सिंह ने शिकरत की। इस सम्मेलन में पूर्व सैनिकों के बीच चुनाव के समय में दो राजनीतिक पार्टियों को समर्थन देने पर जमकर विवाद हुआ। इसमें कुछ सैनिकों ने मेजर जनरल सतबीर पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह किसी राजनीतिक पार्टी को सभी सैनिकों का समर्थन दिलवाना चाहते हैैैं। इस बात पर सैनिक वाटिका में हंगामा इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों ने एक दूसरे को वाटिका से बाहर करने की कोशिश की। नौमत यहां तक आ गई कि इस दौरान पुलिस को बुलाकर मामले को शांत किया गया। हालांकि बैठक में सैनिकों, पूर्व सैनिकों व उनके परिवारजनों और किसानों की ज्वलंत समस्याओं को उठाकर सरकार से इन समस्याओं के समाधान की गुहार लगाने थी। उन्होंने कहा कि वन रैंक वन पेंशन को संसद द्वारा पारित परिभाषा के अनुरूप लागू न करना, जवानों एवं सूबेदारों की मिलिट्री सर्विस पे बढ़ोतरी को नकारना, 1965 और 1971 का युद्ध लड़ चुके जवानों की वीरांगनाओं की पेंशन को बढ़ाना, नरसिम्हा रेड्डी कमेटी की 2016 की रिपोर्ट को सार्वजनिक कर लागू करना, पूर्व सैनिकों के पोलीक्लीनिक्स में डॉक्टरों, दवाइयों एवं चिकित्सा सुविधाओं की भारी कमी होना, सातवें पे कमीशन की 36 निलंबित कर्मियों का अब तक कोई समाधान न करने की आवाज उठाई। जनरल सतबीर ने कहा कि जवान और किसान एक ही परिवार से आते है। 90 प्रतिशत सैनिक किसान परिवारों से हैं और सेवानिवृत्त होकर खेती करते हैं। किसान को अपनी उपज का स्वामीनाथन रिपोर्ट के अनुसार सही दाम नहीं मिलता और मंडियों में उसकी फसल के साथ व्यापारी अनदेखी करते हैं। इस अवसर पर कैप्टन कपूर सिंह गिल, सुबेदार मेजर रामकर्ण दलाल, रमेश कौशिक, कैप्टन वेद प्रकाश, सरपंच राम कुमार मौजूद रहे।