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राज्य पेज के लिए दिनभर चली 50 रोडवेज बस और 90 प्राइवेट बस
Updated Tue, 30 Oct 2018 12:11 AM IST
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दिनभर चलीं 50 रोडवेज और 90 प्राइवेट बसें
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। पिछले 14 दिनों से चल रही रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के कारण विभाग को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि जीएम प्रदीप कुमार रोडवेज की 40 बसों व प्राइवेट बस के सहारे यात्रियों को असुविधा नही होने का दावा कर रहे हैं, पर अब तक लंबे रूटों पर बस नहीं चलने के कारण यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। रोडवेज के 873 कर्मचारियों में 823 कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इसमें से 134 कर्मचारियों को नोटिस व 16 कर्मचारियों पर एफआरआई दर्ज है, जिसमें से सिर्फ चार कर्मचारियों की गिरफ्तारी हुई है। रोडवेज विभाग में 185 बसे हड़ताल से पहले नियमित रूप से चलती थी। जिससे विभाग के खजाने में लगभग 15 लाख रुपये राजस्व में जमा होते थे। रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के चलते अब 40 बस ठेकेदार द्वारा लिए गए चालकों के हाथ में हैं। ठेेकेदार चालक द्वारा दो बार एक्सीडेंट हो गए हैं। ऐसे में यात्रियों के लिए रोडवेज बस में सफर करना खतरे से खाली नहीं है। वहीं रोडवेज वर्कशाप अप्रेंटिस कर्मचारियों के भरो से है। जो बसों की कमियों को अच्छी तरह ठीक नहीं कर पाते। वहीं इस दौरान प्राइवेट बस की चांदी हो रही है। आठ लाख राशि रोडवेज विभाग ने पिछले दो सप्ताह में राजस्व में जमा किए हैं, उतनी राशि 90 प्राइवेट बस एक दिन में कमा रही है। बसों की कमी के कारण यात्री जान जोखिम में डाल कर बस की छतों पर बैठकर सफर करने को मजबूर हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। पिछले 14 दिनों से चल रही रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के कारण विभाग को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि जीएम प्रदीप कुमार रोडवेज की 40 बसों व प्राइवेट बस के सहारे यात्रियों को असुविधा नही होने का दावा कर रहे हैं, पर अब तक लंबे रूटों पर बस नहीं चलने के कारण यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। रोडवेज के 873 कर्मचारियों में 823 कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इसमें से 134 कर्मचारियों को नोटिस व 16 कर्मचारियों पर एफआरआई दर्ज है, जिसमें से सिर्फ चार कर्मचारियों की गिरफ्तारी हुई है। रोडवेज विभाग में 185 बसे हड़ताल से पहले नियमित रूप से चलती थी। जिससे विभाग के खजाने में लगभग 15 लाख रुपये राजस्व में जमा होते थे। रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के चलते अब 40 बस ठेकेदार द्वारा लिए गए चालकों के हाथ में हैं। ठेेकेदार चालक द्वारा दो बार एक्सीडेंट हो गए हैं। ऐसे में यात्रियों के लिए रोडवेज बस में सफर करना खतरे से खाली नहीं है। वहीं रोडवेज वर्कशाप अप्रेंटिस कर्मचारियों के भरो से है। जो बसों की कमियों को अच्छी तरह ठीक नहीं कर पाते। वहीं इस दौरान प्राइवेट बस की चांदी हो रही है। आठ लाख राशि रोडवेज विभाग ने पिछले दो सप्ताह में राजस्व में जमा किए हैं, उतनी राशि 90 प्राइवेट बस एक दिन में कमा रही है। बसों की कमी के कारण यात्री जान जोखिम में डाल कर बस की छतों पर बैठकर सफर करने को मजबूर हैं।