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मंडी में नहीं बारदाना और न ही हो रहा उठान
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जींद। गेहूं के सीजन के बीच में ही बारदाने की कमी होने से किसानों व आढ़तियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिला भर की मंडियों व खरीद केंद्रों पर दो लाख बैक से अधिक गेहूं खुला पड़ा है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि कोलकाता से बारदाना ट्रेन व सड़क मार्ग से रवाना हो चुका है। दो दिन में जींद पहुंचने की उम्मीद है। फिलहाल मंडी में करीब दो लाख बैग की जरूरत है।
फिलहाल गेहूं की आवक जोरों पर है। नई अनाज मंडी गेहूं का आवक बढ़ रही है और मंडी में बारदाना नहीं होने से उठान काफी धीमा चल रहा है। मंडी में किसानों को गेहूं उतारने तक जगह नहीं बची है। इससे किसानों को व आढ़तियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मंडी में शुक्रवार को 67500 क्विंटल गेहूं की हुई और ज्यादातर किसानों को मंडी में गेहूं उतारने के लिए जगह नहीं मिली। इसके अतिरिक्त कई दुकानों पर किसानों ने गेहूं तो उतारी, लेकिन तोल का कार्य शुरू नहीं हो पाया। इसका कारण भी गेहूं के कट्टे रखने के लिए मंडी में जगह का नहीं होना है। मंडी में गेहूं उठान में होने वाली देरी का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। एक तो किसानों को मंडी में गेहूं उतारने के लिए ठीक से जगह नहीं मिल रही। मौसम में भी लगातार बदलाव हो रहा है। इससे किसानों की परेशानी बढ़ने वाली है। अगर बारिश हुई तो किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
छात्तर गांव के परचेज सेंटर पर गेहूं लेकर पहुंच रहे किसानों को कच्चे में गेहूं उतारना पड़ रहा है। यहां पर हैफेड द्वारा गेहूं की खरीद की जा रही है। गेहूं की आवक के हिसाब से उठान काफी धीमा चल रहा है। आढ़तियों ने कहा कि अगर बारिश होती है गेहूं खराब होती है तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। बार-बार प्रशासन से लिफ्टिंग तेज करने के साथ-साथ बारदाना उपलब्ध करवाने की मांग कर रहे है। गेहूं की खरीद के बाद अब तक पेमेंट भी नहीं हो रही है। प्रशासन की ढीली कार्यप्रणाली से आढ़ती, किसान दोनों परेशान हैं।
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फिलहाल गेहूं की आवक जोरों पर है। नई अनाज मंडी गेहूं का आवक बढ़ रही है और मंडी में बारदाना नहीं होने से उठान काफी धीमा चल रहा है। मंडी में किसानों को गेहूं उतारने तक जगह नहीं बची है। इससे किसानों को व आढ़तियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मंडी में शुक्रवार को 67500 क्विंटल गेहूं की हुई और ज्यादातर किसानों को मंडी में गेहूं उतारने के लिए जगह नहीं मिली। इसके अतिरिक्त कई दुकानों पर किसानों ने गेहूं तो उतारी, लेकिन तोल का कार्य शुरू नहीं हो पाया। इसका कारण भी गेहूं के कट्टे रखने के लिए मंडी में जगह का नहीं होना है। मंडी में गेहूं उठान में होने वाली देरी का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। एक तो किसानों को मंडी में गेहूं उतारने के लिए ठीक से जगह नहीं मिल रही। मौसम में भी लगातार बदलाव हो रहा है। इससे किसानों की परेशानी बढ़ने वाली है। अगर बारिश हुई तो किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
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छात्तर गांव के परचेज सेंटर पर गेहूं लेकर पहुंच रहे किसानों को कच्चे में गेहूं उतारना पड़ रहा है। यहां पर हैफेड द्वारा गेहूं की खरीद की जा रही है। गेहूं की आवक के हिसाब से उठान काफी धीमा चल रहा है। आढ़तियों ने कहा कि अगर बारिश होती है गेहूं खराब होती है तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। बार-बार प्रशासन से लिफ्टिंग तेज करने के साथ-साथ बारदाना उपलब्ध करवाने की मांग कर रहे है। गेहूं की खरीद के बाद अब तक पेमेंट भी नहीं हो रही है। प्रशासन की ढीली कार्यप्रणाली से आढ़ती, किसान दोनों परेशान हैं।
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