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युवाओं को किया जागरुक
Updated Thu, 31 Aug 2017 01:17 AM IST
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सूई से नशा करने वाले 217 लोगों को किया पहचान
अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
सफीदों रोड बाईपास पर बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से सूई से नशा करने वाले युवाओं को जागरूक करने को लेकर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सूई से नशा करने तथा नशे से होने वाले दुष्प्रभावों से अवगत करवाया गया। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से डाटा मैनेजर अभिषेक शर्मा ने कहा कि सूई द्वारा नशा करने से मनुष्य कई घातक बीमारियों का शिकार हो जाता है। इससे एचआईवी एड्स, हैपेटाइटिस बी, हैपेटाइटिस सी जैसी घातक बीमारियों का शिकार हो सकता है। बाजार में मिलने वाले टीके का नशा पूरी तरह से गैर कानूनी है। हालांकि इसका असर चार से पांच घंटे तक रहता है लेकिन फिर सूई से नशा करने वाला युवा इसका आदि हो जाता है और फिर वो इस नशे के लिए हर बुरा कार्य करने को भी तैयार हो जाता है। उन्होंने बताया कि ऐसे युवाओं को फिर से सामान्य जीवन जीने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा हरियाणा एड्स कंट्रोल सोसायटी द्वारा संचालित ओएसटी सेंटर खोला हुआ है। अब तक इसमें सूई से नशा करने वाले 217 लोगों को रजिस्टर्ड किया गया है। जबकि 110 लोग सेंटर से प्रतिदिन दवा ले रहे हैं और सेंटर में मौजूद कर्मियों की देखभाल की ही बदौलत अबतक 35 युवा इस नशे को छोड़ चुके हैं। उन्होंने बताया कि सूइ से नशे को छोड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से ओएसटी दवाइयां दी जाती हैं जो इन नशे के आदि लोगों को सेंटर पर देखरेख में खिलाई जाती हैं। ओएसटी दवा लेने से न तो एचआईवी का खतरा रहता है और न ही किसी संक्रमण होने का खतरा रहता है। यह दवा सरकार द्वारा उपलब्ध करवाई जाती है और पूर्ण तौर पर कानूनी होती है। ओएसटी दवा का सेवन करने से व्यक्ति को सारा दिन नशे का जुगाड़ करने की जरूरत नहीं रहती है। यह दवाइयां सेंटर पर मुफ्त उपलब्ध करवाई जाती हैं और पूरा साल दी जाती है तथा कोई छुट्टी भी नहीं होती।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
सफीदों रोड बाईपास पर बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से सूई से नशा करने वाले युवाओं को जागरूक करने को लेकर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सूई से नशा करने तथा नशे से होने वाले दुष्प्रभावों से अवगत करवाया गया। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से डाटा मैनेजर अभिषेक शर्मा ने कहा कि सूई द्वारा नशा करने से मनुष्य कई घातक बीमारियों का शिकार हो जाता है। इससे एचआईवी एड्स, हैपेटाइटिस बी, हैपेटाइटिस सी जैसी घातक बीमारियों का शिकार हो सकता है। बाजार में मिलने वाले टीके का नशा पूरी तरह से गैर कानूनी है। हालांकि इसका असर चार से पांच घंटे तक रहता है लेकिन फिर सूई से नशा करने वाला युवा इसका आदि हो जाता है और फिर वो इस नशे के लिए हर बुरा कार्य करने को भी तैयार हो जाता है। उन्होंने बताया कि ऐसे युवाओं को फिर से सामान्य जीवन जीने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा हरियाणा एड्स कंट्रोल सोसायटी द्वारा संचालित ओएसटी सेंटर खोला हुआ है। अब तक इसमें सूई से नशा करने वाले 217 लोगों को रजिस्टर्ड किया गया है। जबकि 110 लोग सेंटर से प्रतिदिन दवा ले रहे हैं और सेंटर में मौजूद कर्मियों की देखभाल की ही बदौलत अबतक 35 युवा इस नशे को छोड़ चुके हैं। उन्होंने बताया कि सूइ से नशे को छोड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से ओएसटी दवाइयां दी जाती हैं जो इन नशे के आदि लोगों को सेंटर पर देखरेख में खिलाई जाती हैं। ओएसटी दवा लेने से न तो एचआईवी का खतरा रहता है और न ही किसी संक्रमण होने का खतरा रहता है। यह दवा सरकार द्वारा उपलब्ध करवाई जाती है और पूर्ण तौर पर कानूनी होती है। ओएसटी दवा का सेवन करने से व्यक्ति को सारा दिन नशे का जुगाड़ करने की जरूरत नहीं रहती है। यह दवाइयां सेंटर पर मुफ्त उपलब्ध करवाई जाती हैं और पूरा साल दी जाती है तथा कोई छुट्टी भी नहीं होती।