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समर्थकों ने रामपाल की रिहाई की मांग को लेकर शहर में किया प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन
Updated Sun, 18 Nov 2018 11:52 PM IST
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रामपाल की रिहाई की मांग को लेकर समर्थकों का प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। डेरे में हत्या के मामले में सजा काट रहे रामपाल के समर्थकों ने उनकी रिहाई की मांग को लेकर शहरभर में प्रदर्शन किया। समर्थकों ने स्थानीय नेहरू पार्क से प्रदर्शन करते हुए डीआरडीए तक पहुंचे और वहां हसीलदार प्रवीण कुमार को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। इस अवसर पर
समर्थक संजीव ने कहा कि रामपाल अपने उपदेशों के माध्यम से एक सभ्य समाज तैयार कर रहे थे। उसके उपदेशों से हजारों लोगों ने नशा त्याग देना, दहेज, रिश्वत न लेना, चोरी और ठगी नहीं करने का जीवन में संकल्प लिया। रामपाल कलयुग में भी सतयुग का निर्माण करने का प्रयास कर रहे थे, पर उन पर उनके कई अनुयायियों पर देशद्रोह और उग्रवाद फैलाने जैसी धाराएं लगाकर प्रदेश सरकार ने उन्हें जेल में बंद कर दिया। रामपाल द्वारा बताए गए भक्ति मार्ग व समाज सुधार के नियमों से प्रभावित होकर समाज के लाखों लोगों ने राष्ट्रीय समाजसेवा समिति का गठन किया, जिसका उद्देश्य रामपाल द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करते हुए किसी भी समाज, जाति, धर्म पर हो रहे अत्याचार का विरोध करना व उस समाज, जाति व धर्म का सहयोग करना सीखा।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने रामपाल पर नवंबर 2014 में झूठा केस और उन पर पुलिस लाठीचार्ज करवाते हुए गिरफ्तार करवाया। इस लाठीचार्ज के दौरान चार महिला श्रद्धालुओं और एक डेढ़ साल के बच्चे की मौत हो गई। इस दौरान हजारों श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हुए। इन हत्याओं का झूठा मुकद्दमा भी रामपाल पर लगाया गया। इसके चलते श्रद्धालुओं ने 18 नवंबर 2011 को काले दिवस के रूप में मनाकर रोष प्रकट किया। भारतवर्ष में अंग्रेजों से समय से ही निर्दोष व सच्चाई के लिए संघर्ष करने वाले लोगों पर अत्याचार होते आ रहे हैं। जब से ही श्रद्धालु हर साल 18 नवंबर को काला दिवस के रूप में मनाते आ रहे हैं। रविवार को भी काला दिवस के रूप में श्रद्धालुओं ने रोष प्रकट करते हुए शहरभर में प्रदर्शन किया। रामपाल की रिहाई की मांग को लेकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
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सरकार ने अपनाई दमनकारी नीति
प्रदेश सरकार ने रामपाल के खिलाफ दमनकारी नीति अपनाई। वह समाज में फैली बुराइयों को दूर करना चाहते थे। प्रदेश सरकार की दमनकारी नीति ने अंग्रेजों के शासनकाल की याद दिला दी। जिस प्रकार अंग्रेजों ने जलियांवाला बाग हत्याकांड में निर्दोष लोगों पर गोलियां चलाकर हत्या की थी, उसी प्रकार रामपाल के आश्रम पर प्रदेश सरकार के इशारे पर भारी पुलिस बल ने मौजूद श्रद्धालुओं पर हमला किया। इसमें चार श्रद्धालुओं की जान गई और हजारों श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हो गए। जो अंग्रेजों की दमनकारी नीति को दिखाता है।
संजीव जागलान।
विश्व के सबसे बड़े धर्म निरपेक्ष व गणतंत्र राष्ट्र में मौलिक अधिकारों का हो रहा हनन
भारत विश्व में सबसे बड़ा धर्म निरपेक्ष व गणतंत्र राष्ट्र है। इसमें हमारे मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है। रामपाल कबीर दास के मार्ग पर चलकर प्रदेश में फैली कुरीतियों को दूर करना चाहते थे। प्रदेश सरकार ने उन पर झूठा मुकदमा दर्ज कर जेल भेेज दिया। इस मामले में निष्पक्ष रूप से सीबीआई की जांच की जाए, जिससे सच्चाई सामने आ सके।
शमशेर कंडेला।
अंग्रजों द्वारा बनाए गए पुलिस एक्ट का कमाल
अंग्रेजों से स्वतंत्रता हमें 1947 में मिल गई थी, पर अंग्रेजों द्वारा लागू किए गए कानून में आज भी बदलाव नहीं किया गया। वहीं तानाशाही कानून आज भी भारत देश में लागू किए हुए हैं। जिसकी आड़ में प्रदेश सरकार निर्दोष लोगों पर अत्याचार व दमन की नीति अपना रही है।
नायब दास।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। डेरे में हत्या के मामले में सजा काट रहे रामपाल के समर्थकों ने उनकी रिहाई की मांग को लेकर शहरभर में प्रदर्शन किया। समर्थकों ने स्थानीय नेहरू पार्क से प्रदर्शन करते हुए डीआरडीए तक पहुंचे और वहां हसीलदार प्रवीण कुमार को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। इस अवसर पर
समर्थक संजीव ने कहा कि रामपाल अपने उपदेशों के माध्यम से एक सभ्य समाज तैयार कर रहे थे। उसके उपदेशों से हजारों लोगों ने नशा त्याग देना, दहेज, रिश्वत न लेना, चोरी और ठगी नहीं करने का जीवन में संकल्प लिया। रामपाल कलयुग में भी सतयुग का निर्माण करने का प्रयास कर रहे थे, पर उन पर उनके कई अनुयायियों पर देशद्रोह और उग्रवाद फैलाने जैसी धाराएं लगाकर प्रदेश सरकार ने उन्हें जेल में बंद कर दिया। रामपाल द्वारा बताए गए भक्ति मार्ग व समाज सुधार के नियमों से प्रभावित होकर समाज के लाखों लोगों ने राष्ट्रीय समाजसेवा समिति का गठन किया, जिसका उद्देश्य रामपाल द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करते हुए किसी भी समाज, जाति, धर्म पर हो रहे अत्याचार का विरोध करना व उस समाज, जाति व धर्म का सहयोग करना सीखा।
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उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने रामपाल पर नवंबर 2014 में झूठा केस और उन पर पुलिस लाठीचार्ज करवाते हुए गिरफ्तार करवाया। इस लाठीचार्ज के दौरान चार महिला श्रद्धालुओं और एक डेढ़ साल के बच्चे की मौत हो गई। इस दौरान हजारों श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हुए। इन हत्याओं का झूठा मुकद्दमा भी रामपाल पर लगाया गया। इसके चलते श्रद्धालुओं ने 18 नवंबर 2011 को काले दिवस के रूप में मनाकर रोष प्रकट किया। भारतवर्ष में अंग्रेजों से समय से ही निर्दोष व सच्चाई के लिए संघर्ष करने वाले लोगों पर अत्याचार होते आ रहे हैं। जब से ही श्रद्धालु हर साल 18 नवंबर को काला दिवस के रूप में मनाते आ रहे हैं। रविवार को भी काला दिवस के रूप में श्रद्धालुओं ने रोष प्रकट करते हुए शहरभर में प्रदर्शन किया। रामपाल की रिहाई की मांग को लेकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
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सरकार ने अपनाई दमनकारी नीति
प्रदेश सरकार ने रामपाल के खिलाफ दमनकारी नीति अपनाई। वह समाज में फैली बुराइयों को दूर करना चाहते थे। प्रदेश सरकार की दमनकारी नीति ने अंग्रेजों के शासनकाल की याद दिला दी। जिस प्रकार अंग्रेजों ने जलियांवाला बाग हत्याकांड में निर्दोष लोगों पर गोलियां चलाकर हत्या की थी, उसी प्रकार रामपाल के आश्रम पर प्रदेश सरकार के इशारे पर भारी पुलिस बल ने मौजूद श्रद्धालुओं पर हमला किया। इसमें चार श्रद्धालुओं की जान गई और हजारों श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हो गए। जो अंग्रेजों की दमनकारी नीति को दिखाता है।
संजीव जागलान।
विश्व के सबसे बड़े धर्म निरपेक्ष व गणतंत्र राष्ट्र में मौलिक अधिकारों का हो रहा हनन
भारत विश्व में सबसे बड़ा धर्म निरपेक्ष व गणतंत्र राष्ट्र है। इसमें हमारे मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है। रामपाल कबीर दास के मार्ग पर चलकर प्रदेश में फैली कुरीतियों को दूर करना चाहते थे। प्रदेश सरकार ने उन पर झूठा मुकदमा दर्ज कर जेल भेेज दिया। इस मामले में निष्पक्ष रूप से सीबीआई की जांच की जाए, जिससे सच्चाई सामने आ सके।
शमशेर कंडेला।
अंग्रजों द्वारा बनाए गए पुलिस एक्ट का कमाल
अंग्रेजों से स्वतंत्रता हमें 1947 में मिल गई थी, पर अंग्रेजों द्वारा लागू किए गए कानून में आज भी बदलाव नहीं किया गया। वहीं तानाशाही कानून आज भी भारत देश में लागू किए हुए हैं। जिसकी आड़ में प्रदेश सरकार निर्दोष लोगों पर अत्याचार व दमन की नीति अपना रही है।
नायब दास।