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पिल्लूखेड़ा हैफेड गोदाम में कुल 195 तिरपाल में से 150 कंडम तिरपाल से की जा रही गेहूं के चट्टों की सुरक्षा
Updated Fri, 03 Aug 2018 12:20 AM IST
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195 में से 150 तिरपाल कंडम, भीगने से कैसे बचे गेहूं
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। पिल्लूखेड़ा का हैफेड गोदाम बारिश में गेहूं भीगने के बाद दो कर्मचारियों के निलंबन होने के बाद चर्चित हुआ है। इस गोदाम में गेहूं की सुरक्षा अभी भी राम भरोसे चली हुई है। इसका कारण गोदाम के पास गेहूं पर ढंकने के लिए पर्याप्त मात्रा में तिरपाल नहीं होना है। इस गोदाम में लगभग 590134 कट्टे गेहूं के सुरक्षा के लिए रखे गए हैं। गोदाम में 155 चट्टे लगाए गए हैं, लेकिन इन चट्टों की सुरक्षा के लिए गोदाम में उचित संख्या में तिरपाल ही नहीं है।
पिल्लूखेड़ा के हैफेड गोदाम में रखे गए गेहूं की सुरक्षा के लिए गोदाम से लेकर मुख्यालय तक लापरवाही बरती जा रही है। गोदाम में कार्यरत कर्मचारियों के अनुसार मुख्यालय को गोदाम में चट्टों की संख्या के अनुसार उचित संख्या में तिरपाल की मांग की जा चुकी है, लेकिन मुख्यालय से तिरपाल पहुंचाने के लिए अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि गोदाम के रिकार्ड में दर्ज 195 तिरपाल में से कुल 45 तिरपाल ही सही हैं। इसके अतिरिक्त 150 तिरपाल को कंडम दिखाया जा चुका है। मुख्यालय से तिरपाल नहीं पहुंचने के कारण इन गेहूं के चट्टों की सुरक्षा खराब तिरपालों से करनी पड़ रही है। इन खराब तिरपालों से किसानों द्वारा छह माह तक खून पसीना एक कर कमाया गया अनाज बोरियों में भरकर नष्ट करने की विभाग की साजिश है। यह कंडम तिरपाल बरसात के पानी को गेहूं तक पहुंचने से नहीं रोक सकते। इसके कारण लाखों की संख्या में गोदाम में रखी गेहूं की बोरियां किसी भी समय तेज बरसात में खराब हो सकती हैं।
मुख्यालय को तिरपाल के लिखा पत्र, जल्द पहुंचने की उम्मीद
मुख्यालय को कंडम तिरपाल की जानकारी दी गई है। जल्द ही तिरपाल पहुंचने की उम्मीद है। अभी तक कंडम हुए पुराने तिरपालों को गेहूं के चट्टों पर ढककर काम चलाया जा रहा है। जो ज्यादा कंडम थे वह दो तिरपाल गेहूं के कट्टों पर ढंके गए हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। पिल्लूखेड़ा का हैफेड गोदाम बारिश में गेहूं भीगने के बाद दो कर्मचारियों के निलंबन होने के बाद चर्चित हुआ है। इस गोदाम में गेहूं की सुरक्षा अभी भी राम भरोसे चली हुई है। इसका कारण गोदाम के पास गेहूं पर ढंकने के लिए पर्याप्त मात्रा में तिरपाल नहीं होना है। इस गोदाम में लगभग 590134 कट्टे गेहूं के सुरक्षा के लिए रखे गए हैं। गोदाम में 155 चट्टे लगाए गए हैं, लेकिन इन चट्टों की सुरक्षा के लिए गोदाम में उचित संख्या में तिरपाल ही नहीं है।
पिल्लूखेड़ा के हैफेड गोदाम में रखे गए गेहूं की सुरक्षा के लिए गोदाम से लेकर मुख्यालय तक लापरवाही बरती जा रही है। गोदाम में कार्यरत कर्मचारियों के अनुसार मुख्यालय को गोदाम में चट्टों की संख्या के अनुसार उचित संख्या में तिरपाल की मांग की जा चुकी है, लेकिन मुख्यालय से तिरपाल पहुंचाने के लिए अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि गोदाम के रिकार्ड में दर्ज 195 तिरपाल में से कुल 45 तिरपाल ही सही हैं। इसके अतिरिक्त 150 तिरपाल को कंडम दिखाया जा चुका है। मुख्यालय से तिरपाल नहीं पहुंचने के कारण इन गेहूं के चट्टों की सुरक्षा खराब तिरपालों से करनी पड़ रही है। इन खराब तिरपालों से किसानों द्वारा छह माह तक खून पसीना एक कर कमाया गया अनाज बोरियों में भरकर नष्ट करने की विभाग की साजिश है। यह कंडम तिरपाल बरसात के पानी को गेहूं तक पहुंचने से नहीं रोक सकते। इसके कारण लाखों की संख्या में गोदाम में रखी गेहूं की बोरियां किसी भी समय तेज बरसात में खराब हो सकती हैं।
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मुख्यालय को तिरपाल के लिखा पत्र, जल्द पहुंचने की उम्मीद
मुख्यालय को कंडम तिरपाल की जानकारी दी गई है। जल्द ही तिरपाल पहुंचने की उम्मीद है। अभी तक कंडम हुए पुराने तिरपालों को गेहूं के चट्टों पर ढककर काम चलाया जा रहा है। जो ज्यादा कंडम थे वह दो तिरपाल गेहूं के कट्टों पर ढंके गए हैं।
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