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Jind News: जिले में एचआईवी के 2700 मरीज रजिस्टर्ड, जागरूकता से रोकने का प्रयास
Sat, 17 May 2025 11:27 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sat, 17 May 2025 11:27 PM IST
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जींद। जिले में एचआईवी के 2700 मरीज रजिस्टर्ड हैं। इनमें नशे के लिए इंजेक्शन का प्रयोग करने वालों की संख्या ज्यादा है। इसके अलावा 55 बच्चों को भी एचआईवी है। यह दंपती में एचआईवी होने के कारण बच्चों में हुआ है। इसको रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार जागरूकता कार्यक्रम चला रहा है।
स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि जिले में एचआईवी के संक्रमण को रोका जा सके। इसके लिए स्कूल, कॉलेज व अन्य सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर कार्यक्रम भी करवाए जा रहे हैं। जिले में सीरिंज के माध्यम से नशा करने वाले युवाओं में इसका प्रकोप ज्यादा हुआ है। जिले में एचआईवी से अब तक 150 लोगों की मौत हो चुकी है। एचआईवी की नियमित रुप से दवाई का प्रयोग करने से मनुष्य लंबे समय तक ठीक रह सकता है।
इसके अलावा जो पीड़ित दवाई का सेवन करना बंद कर देता है। वह बीमारियों की चपेट में जल्दी आता है। एचआईवी से पीड़ित व्यक्ति में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण मृत्यु भी हो जाती है। एचआईवी से पीड़ितों की संख्या 25 से 45 आयुवर्ग में ज्यादा है। इसका प्रभाव कम करने के लिए दिन में एक गोली लेनी होती है। यह वायरस शरीर के इम्यून सिस्टम पर हमला करता है और सीडी 4 सेल्स को निशाना बनाता है, जो संक्रमण और बीमारियों से लड़ने के लिए जरूरी हैं। एड्स का निदान तब किया जाता है, जब एचआईवी से पीड़ित व्यक्ति की इम्यूनिटी गंभीर रूप से कमजोर हो जाती है। सही समय पर इलाज न किए जाने पर यह जीवन के लिए खतरा बन सकता है।
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एड्स के लक्षण
एड्स के लक्षणों में बुखार, जोड़ों का दर्द, ठंड लगना, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश, सूजी हुई ग्रंथियां, पसीना आना , शरीर पर लाल चकत्ते और थकान शामिल हैं। यह वायरस असुरक्षित यौन संबंध और एचआईवी संक्रमित खून से दूषित सुई या सीरिंज शेयर करने से फैलता है। यह बीमारी गर्भावस्था, प्रसव या स्तनपान के दौरान एचआईवी संक्रमित मां से बच्चे में भी फैलता है।
जिले में एचआईवी को बढ़ने से रोकने के लिए जागरूकता कार्यक्रम शिक्षण संस्थाओं में करवाए जा रहे हैं। अब तक जिले में 2700 के लगभग एचआईवी से संक्रमित हैं। गर्भ में पल रहे बच्चे को नियमित रुप से दवाई का प्रयोग करने से एचआईवी से बचाया जा सकता है। प्रत्येक रोगी को दवाई का नियमित सेवन करना चाहिए।
-- डॉ. जेके मान, एड्स व क्षय रोग जिला नोडल अधिकारी, जींद।
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स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि जिले में एचआईवी के संक्रमण को रोका जा सके। इसके लिए स्कूल, कॉलेज व अन्य सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर कार्यक्रम भी करवाए जा रहे हैं। जिले में सीरिंज के माध्यम से नशा करने वाले युवाओं में इसका प्रकोप ज्यादा हुआ है। जिले में एचआईवी से अब तक 150 लोगों की मौत हो चुकी है। एचआईवी की नियमित रुप से दवाई का प्रयोग करने से मनुष्य लंबे समय तक ठीक रह सकता है।
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इसके अलावा जो पीड़ित दवाई का सेवन करना बंद कर देता है। वह बीमारियों की चपेट में जल्दी आता है। एचआईवी से पीड़ित व्यक्ति में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण मृत्यु भी हो जाती है। एचआईवी से पीड़ितों की संख्या 25 से 45 आयुवर्ग में ज्यादा है। इसका प्रभाव कम करने के लिए दिन में एक गोली लेनी होती है। यह वायरस शरीर के इम्यून सिस्टम पर हमला करता है और सीडी 4 सेल्स को निशाना बनाता है, जो संक्रमण और बीमारियों से लड़ने के लिए जरूरी हैं। एड्स का निदान तब किया जाता है, जब एचआईवी से पीड़ित व्यक्ति की इम्यूनिटी गंभीर रूप से कमजोर हो जाती है। सही समय पर इलाज न किए जाने पर यह जीवन के लिए खतरा बन सकता है।
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एड्स के लक्षण
एड्स के लक्षणों में बुखार, जोड़ों का दर्द, ठंड लगना, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश, सूजी हुई ग्रंथियां, पसीना आना , शरीर पर लाल चकत्ते और थकान शामिल हैं। यह वायरस असुरक्षित यौन संबंध और एचआईवी संक्रमित खून से दूषित सुई या सीरिंज शेयर करने से फैलता है। यह बीमारी गर्भावस्था, प्रसव या स्तनपान के दौरान एचआईवी संक्रमित मां से बच्चे में भी फैलता है।
जिले में एचआईवी को बढ़ने से रोकने के लिए जागरूकता कार्यक्रम शिक्षण संस्थाओं में करवाए जा रहे हैं। अब तक जिले में 2700 के लगभग एचआईवी से संक्रमित हैं। गर्भ में पल रहे बच्चे को नियमित रुप से दवाई का प्रयोग करने से एचआईवी से बचाया जा सकता है। प्रत्येक रोगी को दवाई का नियमित सेवन करना चाहिए।