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Jind News: शशि शर्मा अस्पताल में 22 सप्ताह के भ्रूण का गर्भपात, एफआईआर दर्ज
Mon, 21 Jul 2025 11:49 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 21 Jul 2025 11:49 PM IST
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जींद। शहर के शशि शर्मा अस्पताल में 22 सप्ताह के भ्रूण का गर्भपात कराने का मामला सामने आया है। नागरिक अस्पताल के चिकित्सक की शिकायत पर अस्पताल संचालिका शशि शर्मा के खिलाफ गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सोमवार को निजी अस्पताल पहुंचकर गर्भपात मामले की जानकारी ली और डॉक्टरों से पूछताछ की।
स्वास्थ्य विभाग को मुख्यालय से जानकारी मिली थी कि शहर के एक निजी अस्पताल में करीब 22 से 24 सप्ताह के भ्रूण का गर्भपात कराया गया है। सोमवार को टीम निजी अस्पताल पहुंची और डॉक्टरों से पूछताछ की और चिकित्सक का भी रिकाॅर्ड खंगाला। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संबंधित महिला और उसके परिवार से भी पूछताछ की। परिवार ने बताया कि गर्भ में बच्चे की मौत हो गई थी। डॉक्टरों की सलाह पर उन्होंने गर्भपात कराने का निर्णय लिया।
20 सप्ताह के भ्रूण के गर्भपात की होती है मंजूरी
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि विषम परिस्थितियों में 20 सप्ताह तक के भ्रूण की गर्भपात करवाने की अस्पताल को मंजूरी होती हे। निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने जिस भ्रूण का गर्भपात कराया वह 22 सप्ताह से अधिक का था। नागरिक अस्पताल के डिप्टी सीएमओ एवं पीएनडीटी नोडल अधिकारी डाॅ. पालेराम ने कहा कि ट्रैकिंग के तहत अस्पताल की जांच की गई है।
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ऐसे होती है आरसीएच और एमसीटीएस पंजीकरण से ट्रैकिंग
आरसीएच और एमसीटीएस पंजीकरण से गर्भवती महिलाओं की ट्रैकिंग की जाती है। अक्सर तीन माह तक की गर्भावस्था के बारे में नहीं बताया जाता है। लिहाजा महिलाएं पंजीकरण करवाने से बचती हैं लेकिन अब यह पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। इससे गर्भवती व शिशु के स्वास्थ्य के बारे में भी जानकारी रहती है। जिले में जो गर्भवती नागरिक अस्पताल या फिर आंगनबाड़ी के जरिए उपचार करवाती हैं उन महिलाओं का पंजीकरण हो जाता है लेकिन निजी अस्पतालों में कहीं-कहीं गाइडलाइन का पालन नहीं किया जाता है।
जिले में तीन भ्रूण हत्या के आ चुके हैं मामले
पिछले दो से तीन माह में जिले में भ्रूणहत्या के तीन मामले सामने आ चुके हैं। इन मामलों में पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किए थे लेकिन अभी तक कोई खुलासा नहीं हो सका है। इनमें एक मामला डूमरखां कलां गांव का था। यहां किसी महिला ने एक कन्या को जन्म से पहले ही कोख में मारकर भ्रूण प्लॉट में फेंक दिया था। दूसरी घटना जींद के रेलवे स्टेशन के पास की थी। इसमें झाड़ियों में एक नवजात कन्या का शव मिला था। तीसरी घटना नरवाना में हुई थी, जहां भ्रूण मिला था।
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नागरिक अस्पताल के चिकित्सक की शिकायत पर अस्पताल संचालिका शशि शर्मा के खिलाफ गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीएनडीटी) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। -मनीष कुमार, शहर थाना प्रभारी जींद।
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स्वास्थ्य विभाग को मुख्यालय से जानकारी मिली थी कि शहर के एक निजी अस्पताल में करीब 22 से 24 सप्ताह के भ्रूण का गर्भपात कराया गया है। सोमवार को टीम निजी अस्पताल पहुंची और डॉक्टरों से पूछताछ की और चिकित्सक का भी रिकाॅर्ड खंगाला। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संबंधित महिला और उसके परिवार से भी पूछताछ की। परिवार ने बताया कि गर्भ में बच्चे की मौत हो गई थी। डॉक्टरों की सलाह पर उन्होंने गर्भपात कराने का निर्णय लिया।
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20 सप्ताह के भ्रूण के गर्भपात की होती है मंजूरी
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि विषम परिस्थितियों में 20 सप्ताह तक के भ्रूण की गर्भपात करवाने की अस्पताल को मंजूरी होती हे। निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने जिस भ्रूण का गर्भपात कराया वह 22 सप्ताह से अधिक का था। नागरिक अस्पताल के डिप्टी सीएमओ एवं पीएनडीटी नोडल अधिकारी डाॅ. पालेराम ने कहा कि ट्रैकिंग के तहत अस्पताल की जांच की गई है।
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ऐसे होती है आरसीएच और एमसीटीएस पंजीकरण से ट्रैकिंग
आरसीएच और एमसीटीएस पंजीकरण से गर्भवती महिलाओं की ट्रैकिंग की जाती है। अक्सर तीन माह तक की गर्भावस्था के बारे में नहीं बताया जाता है। लिहाजा महिलाएं पंजीकरण करवाने से बचती हैं लेकिन अब यह पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। इससे गर्भवती व शिशु के स्वास्थ्य के बारे में भी जानकारी रहती है। जिले में जो गर्भवती नागरिक अस्पताल या फिर आंगनबाड़ी के जरिए उपचार करवाती हैं उन महिलाओं का पंजीकरण हो जाता है लेकिन निजी अस्पतालों में कहीं-कहीं गाइडलाइन का पालन नहीं किया जाता है।
जिले में तीन भ्रूण हत्या के आ चुके हैं मामले
पिछले दो से तीन माह में जिले में भ्रूणहत्या के तीन मामले सामने आ चुके हैं। इन मामलों में पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किए थे लेकिन अभी तक कोई खुलासा नहीं हो सका है। इनमें एक मामला डूमरखां कलां गांव का था। यहां किसी महिला ने एक कन्या को जन्म से पहले ही कोख में मारकर भ्रूण प्लॉट में फेंक दिया था। दूसरी घटना जींद के रेलवे स्टेशन के पास की थी। इसमें झाड़ियों में एक नवजात कन्या का शव मिला था। तीसरी घटना नरवाना में हुई थी, जहां भ्रूण मिला था।
नागरिक अस्पताल के चिकित्सक की शिकायत पर अस्पताल संचालिका शशि शर्मा के खिलाफ गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीएनडीटी) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। -मनीष कुमार, शहर थाना प्रभारी जींद।