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रोजाना रोडवेज में 4200 किलोमीटर पर लग रहा ब्रेक, प्रतिदिन 700 यात्री हो रहे परेशान
Updated Mon, 20 Aug 2018 12:00 AM IST
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रोडवेज की 14 कंडम बसें वर्कशॉप में खड़ी, 700 यात्री हो रहे परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। दिन ब दिन जींद रोडवेज डिपो के हालात खराब होते जा रहे हैं। लंबे रूटों की बसें खराब पड़ी हैं और मैकेनिक नहीं होने के कारण एक माह से रोडवेज वर्कशॉप में 14 बसें कंडम हालात में खड़ी हैं। रोडवेज नौसिखिए के भरोसे ही है। गुुरुग्राम और चंडीगढ़ जैसे रूटों पर कंडम बसों से काम चलाना पड़ रहा है। इससे यात्रियों की जान को भी जोखिम में डाला जा रहा है। फिलहाल जींद डिपो वर्कशॉप में मैकेनिक की संख्या महज चार से पांच रह गई है। इससे बसों में आने वाली खराबी को तुरंत ठीक कर पाना संभव नहीं है, इसलिए अब प्रशिक्षुओं का सहारा लिया जा रहा है। एक बस प्रतिदिन कम से कम 300 किलोमीटर चलाई जाती है। 14 बसों के वर्कशॉप में खड़ी होने की वजह से रोजाना औसतन 4200 किलोमीटर बसें नहीं चल रही हैं। इससे 700 यात्री प्रभावित हो रहे हैं।
जींद डिपो में लंबे रूटों की बसें कंडम हालात में है। जींद डिपो में 111 बसें हैं, जिनमें में से 20 नई बसें हैं। 14 बसें कंडम हालत में हैं। 20 नई बसों को छोड़कर बाकी बची सभी बसों में कोई न कोई कमी है, जिससे बसें अपने गंतव्य की ओर जाते समय खराब हो जाती हैं। सवारियों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है, कई बार तो बस खराब होने के कारण सवारी व बस चालाक आपस में भिड़ जाते हैं।
एबीसीडी ग्रुप में होता है काम
जींद रोडवेज डिपो में चार वर्गों में काम होता है। इसमें एबीसीडी ग्रुप में मैकेनिक काम करते हैं। इसमें प्रत्येक ग्रुप में पांच मैकेनिक काम करते थे। अब यह संख्या घटकर प्रत्येक ग्रुप में एक रह गई है। अब कम मैकेनिक होने से नौसिखिए से काम चलाना पड़ रहा है।
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नहीं हो रहा समाधान
बस चालक व परिचालकों ने कई बार कंडम बसों की हालात को लेकर रोडवेज महाप्रबंधक से बात की है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हो पाया। वर्कशॉप में एक बस को ठीक करने में पांच से दस दिन का समय लगता है। जल्दी के चक्कर में नौसिखिए की मदद ली जाती है, जो अभी तक कारगर साबित नहीं हुई।
कही भी खराब हो जाती है बसें
जींद रोडवेज डिपो में बसों की हालात काफी खराब है। बसें अपने गंतव्य की ओर जाते समय कही भी खराब हो जाती है, इससे सवारी अपने समय पर नहीं पहुंच पाते। इससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सतबीर, चालक रोडवेज डिपो जींद।
यात्रियों से भी हो जाता है झगड़ा
हमारा रूट अधिकतर गुरुग्राम व चंडीगढ़ पर रहता है। इन रूटों पर चलने वाली बसें कंडम हो चुकी है, बसें कही भी खराब हो जाती है। इससे कई बार यात्री बसें खराब होने पर अपना किराया मांगती है, इससे कई बार झगड़ा भी हो जाता है।
सुरेंद्र, परिचालक रोडवेज डिपो जींद।
जींद डिपो की बसों की हालत बहुत ही खराब है। एक महीने में कम से कम पांच बार जींद-कैथल रूट पर चलने वाली बस खराब हो चुकी। इससे यात्रियों को काफी परेशानी होती है।
सतबीर शर्मा, दैनिक यात्री
बढ़ रही कंडम बसों की संख्या
2014-15 में 20 बस रोडवेज डिपो जींद को नई मिली थीं, लेकिन मैकेनिक नहीं होने से बसों का मेंटिनेंस का काम नहीं हो पा रहा है। इससे लगातार कंडम बसों की संख्या बढ़ती जा रही है, फिलहाल रोडवेज वर्कशॉप में 14 बसें कंडम हालात में है। जिन्हें ठीक करने का काम चल रहा है।
शेर सिंह, कार्य लिपिक रोडवेज डिपो जींद।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। दिन ब दिन जींद रोडवेज डिपो के हालात खराब होते जा रहे हैं। लंबे रूटों की बसें खराब पड़ी हैं और मैकेनिक नहीं होने के कारण एक माह से रोडवेज वर्कशॉप में 14 बसें कंडम हालात में खड़ी हैं। रोडवेज नौसिखिए के भरोसे ही है। गुुरुग्राम और चंडीगढ़ जैसे रूटों पर कंडम बसों से काम चलाना पड़ रहा है। इससे यात्रियों की जान को भी जोखिम में डाला जा रहा है। फिलहाल जींद डिपो वर्कशॉप में मैकेनिक की संख्या महज चार से पांच रह गई है। इससे बसों में आने वाली खराबी को तुरंत ठीक कर पाना संभव नहीं है, इसलिए अब प्रशिक्षुओं का सहारा लिया जा रहा है। एक बस प्रतिदिन कम से कम 300 किलोमीटर चलाई जाती है। 14 बसों के वर्कशॉप में खड़ी होने की वजह से रोजाना औसतन 4200 किलोमीटर बसें नहीं चल रही हैं। इससे 700 यात्री प्रभावित हो रहे हैं।
जींद डिपो में लंबे रूटों की बसें कंडम हालात में है। जींद डिपो में 111 बसें हैं, जिनमें में से 20 नई बसें हैं। 14 बसें कंडम हालत में हैं। 20 नई बसों को छोड़कर बाकी बची सभी बसों में कोई न कोई कमी है, जिससे बसें अपने गंतव्य की ओर जाते समय खराब हो जाती हैं। सवारियों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है, कई बार तो बस खराब होने के कारण सवारी व बस चालाक आपस में भिड़ जाते हैं।
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एबीसीडी ग्रुप में होता है काम
जींद रोडवेज डिपो में चार वर्गों में काम होता है। इसमें एबीसीडी ग्रुप में मैकेनिक काम करते हैं। इसमें प्रत्येक ग्रुप में पांच मैकेनिक काम करते थे। अब यह संख्या घटकर प्रत्येक ग्रुप में एक रह गई है। अब कम मैकेनिक होने से नौसिखिए से काम चलाना पड़ रहा है।
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नहीं हो रहा समाधान
बस चालक व परिचालकों ने कई बार कंडम बसों की हालात को लेकर रोडवेज महाप्रबंधक से बात की है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हो पाया। वर्कशॉप में एक बस को ठीक करने में पांच से दस दिन का समय लगता है। जल्दी के चक्कर में नौसिखिए की मदद ली जाती है, जो अभी तक कारगर साबित नहीं हुई।
कही भी खराब हो जाती है बसें
जींद रोडवेज डिपो में बसों की हालात काफी खराब है। बसें अपने गंतव्य की ओर जाते समय कही भी खराब हो जाती है, इससे सवारी अपने समय पर नहीं पहुंच पाते। इससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सतबीर, चालक रोडवेज डिपो जींद।
यात्रियों से भी हो जाता है झगड़ा
हमारा रूट अधिकतर गुरुग्राम व चंडीगढ़ पर रहता है। इन रूटों पर चलने वाली बसें कंडम हो चुकी है, बसें कही भी खराब हो जाती है। इससे कई बार यात्री बसें खराब होने पर अपना किराया मांगती है, इससे कई बार झगड़ा भी हो जाता है।
सुरेंद्र, परिचालक रोडवेज डिपो जींद।
जींद डिपो की बसों की हालत बहुत ही खराब है। एक महीने में कम से कम पांच बार जींद-कैथल रूट पर चलने वाली बस खराब हो चुकी। इससे यात्रियों को काफी परेशानी होती है।
सतबीर शर्मा, दैनिक यात्री
बढ़ रही कंडम बसों की संख्या
2014-15 में 20 बस रोडवेज डिपो जींद को नई मिली थीं, लेकिन मैकेनिक नहीं होने से बसों का मेंटिनेंस का काम नहीं हो पा रहा है। इससे लगातार कंडम बसों की संख्या बढ़ती जा रही है, फिलहाल रोडवेज वर्कशॉप में 14 बसें कंडम हालात में है। जिन्हें ठीक करने का काम चल रहा है।
शेर सिंह, कार्य लिपिक रोडवेज डिपो जींद।