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जींद के जरिए जाटों को साधना चाहती है भाजपा
Updated Thu, 15 Feb 2018 12:49 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। वीरवार को जींद में होने वाली भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की रैली को जहां जाटों में सेंध लगाने के लिए भाजपा का प्रयास समझा जा रहा है, वहीं इसे हरियाणा में ‘मिशन रिपीट’ के लिए भाजपा का चुनावी शंखनाद भी माना जा रहा है।
हरियाणा में पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला था। पिछले साल जाट आरक्षण को लेकर हुए आंदोलन के कारण जाटों को भाजपा से दूर माना जाने लगा है। 2019 में जहां लोकसभा चुनाव होने हैं, वहीं विधानसभा चुनाव भी होने हैं। यह भी माना जा रहा है कि लोकसभा के साथ ही यहां पर विधानसभा चुनाव हो जाए। ऐसे में भाजपा पिछले चुनावों में हरियाणा से मिली सफलता को फिर से प्राप्त करने के प्रयास में है। वह चाहती है कि उसकी प्रदेश में सरकार फिर से बने। गैर जाटों के बड़े वर्ग को भाजपा अपने समर्थन में मानकर चल रही है। भाजपा चाहती है कि जाटों का मत भी उसे अच्छी संख्या में मिले तब उसे चुनावों में सफलता मिल सकती है। यही कारण है कि शाह की रैली का विरोध कर रहे यशपाल मलिक के आगे झुकते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने उनकी ज्यादातर मांगों को माना।
भाजपा ने जाटों के समर्थन के लिए पिछले चुनाव में सर छोटू राम के नाती चौधरी बीरेंद्र सिंह को आगे किया था। चौधरी बीरेंद्र सिंह रैली के लिए दौरा कर चुके हैं। इसके अलावा जाट मंत्रियों में ओमप्रकाश धनखड़, विधायक प्रेमलता, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला रैली की तैयारियों का जायजा ले चुके हैं।
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जींद जाट बहुल इलाका है। यहां पर बड़ी रैली कर भाजपा संदेश देना चाहती है कि पार्टी जाटों में पकड़ मजबूत बना चुकी है। जींद में भाजपा की रैली से इनेलो को अपने गढ़ में सेंध लगाने का डर सता रहा है। वहीं कांग्रेस भी इसलिए विरोध कर रही है कि भाजपा की यहां जड़ न जम सके। वर्ष 2005 में कांग्रेस के जींद जिला से तीन कैबिनेट मंत्री थे। इसके बाद कांग्रेस यहां अपना खाता भी नहीं खोल पाई। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को जींद व आस-पास के इलाको में हार का सामना करना पड़ा था। जींद को पिछले चुनाव तक इनेलो का गढ़ माना जाता रहा है। इनेलो ने यहां से पांच में से तीन सीटों पर जीत हासिल की थी। साथ ही प्रदेश की दस में इनेलो द्वारा जीती गई 2 लोकसभा सीटों में जिला जींद का नरवाना क्षेत्र सिरसा लोकसभा में तो उचाना इनेलो द्वारा जीती गई हिसार लोकसभा क्षेत्र में आता है।
जींद जिले में भाजपा को महज उचाना में पार्टी के केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह के उचाना हल्के से उनकी पत्नी प्रेमलता को जीत मिली थी। इसके अलावा जींद हल्का से इनेलो के हरिचंद मिड्डा, नरवाना से इनेलो के पिरथी सिंह नंबरदार, सफीदों से आजाद जसबीर देशवाल, जुलाना से इनेलो परमिंद्र ढुल को जीत मिली थी। यही हाल कैथल में था। कैथल जिले में पार्टी के 4 में से केवल 1 विधायक हैं।
कोट:
2019 में होने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों की तैयारी के लिए भाजपा की यह रैली है। इसके नाम (युवा हुंकार रैली) से ही यह साफ हो रहा है कि भाजपा युवाओं को साथ लेकर एक मौका और चाहती है।
-डॉ. एके चावला, पूर्व कुलपति कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी
हुड्डा सरकार हो या चौटाला सरकार जींद के लिए किसी ने कुछ नहीं किया। भाजपा सरकार यहां से हाईवे निकाल रही है। दिल्ली-कटरा मार्ग भी जींद के पास से निकाला जा रहा है।
- राजीव जेटली, प्रदेश प्रवक्ता भाजपा
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जींद। वीरवार को जींद में होने वाली भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की रैली को जहां जाटों में सेंध लगाने के लिए भाजपा का प्रयास समझा जा रहा है, वहीं इसे हरियाणा में ‘मिशन रिपीट’ के लिए भाजपा का चुनावी शंखनाद भी माना जा रहा है।
हरियाणा में पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला था। पिछले साल जाट आरक्षण को लेकर हुए आंदोलन के कारण जाटों को भाजपा से दूर माना जाने लगा है। 2019 में जहां लोकसभा चुनाव होने हैं, वहीं विधानसभा चुनाव भी होने हैं। यह भी माना जा रहा है कि लोकसभा के साथ ही यहां पर विधानसभा चुनाव हो जाए। ऐसे में भाजपा पिछले चुनावों में हरियाणा से मिली सफलता को फिर से प्राप्त करने के प्रयास में है। वह चाहती है कि उसकी प्रदेश में सरकार फिर से बने। गैर जाटों के बड़े वर्ग को भाजपा अपने समर्थन में मानकर चल रही है। भाजपा चाहती है कि जाटों का मत भी उसे अच्छी संख्या में मिले तब उसे चुनावों में सफलता मिल सकती है। यही कारण है कि शाह की रैली का विरोध कर रहे यशपाल मलिक के आगे झुकते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने उनकी ज्यादातर मांगों को माना।
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भाजपा ने जाटों के समर्थन के लिए पिछले चुनाव में सर छोटू राम के नाती चौधरी बीरेंद्र सिंह को आगे किया था। चौधरी बीरेंद्र सिंह रैली के लिए दौरा कर चुके हैं। इसके अलावा जाट मंत्रियों में ओमप्रकाश धनखड़, विधायक प्रेमलता, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला रैली की तैयारियों का जायजा ले चुके हैं।
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जींद जाट बहुल इलाका है। यहां पर बड़ी रैली कर भाजपा संदेश देना चाहती है कि पार्टी जाटों में पकड़ मजबूत बना चुकी है। जींद में भाजपा की रैली से इनेलो को अपने गढ़ में सेंध लगाने का डर सता रहा है। वहीं कांग्रेस भी इसलिए विरोध कर रही है कि भाजपा की यहां जड़ न जम सके। वर्ष 2005 में कांग्रेस के जींद जिला से तीन कैबिनेट मंत्री थे। इसके बाद कांग्रेस यहां अपना खाता भी नहीं खोल पाई। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को जींद व आस-पास के इलाको में हार का सामना करना पड़ा था। जींद को पिछले चुनाव तक इनेलो का गढ़ माना जाता रहा है। इनेलो ने यहां से पांच में से तीन सीटों पर जीत हासिल की थी। साथ ही प्रदेश की दस में इनेलो द्वारा जीती गई 2 लोकसभा सीटों में जिला जींद का नरवाना क्षेत्र सिरसा लोकसभा में तो उचाना इनेलो द्वारा जीती गई हिसार लोकसभा क्षेत्र में आता है।
जींद जिले में भाजपा को महज उचाना में पार्टी के केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह के उचाना हल्के से उनकी पत्नी प्रेमलता को जीत मिली थी। इसके अलावा जींद हल्का से इनेलो के हरिचंद मिड्डा, नरवाना से इनेलो के पिरथी सिंह नंबरदार, सफीदों से आजाद जसबीर देशवाल, जुलाना से इनेलो परमिंद्र ढुल को जीत मिली थी। यही हाल कैथल में था। कैथल जिले में पार्टी के 4 में से केवल 1 विधायक हैं।
कोट:
2019 में होने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों की तैयारी के लिए भाजपा की यह रैली है। इसके नाम (युवा हुंकार रैली) से ही यह साफ हो रहा है कि भाजपा युवाओं को साथ लेकर एक मौका और चाहती है।
-डॉ. एके चावला, पूर्व कुलपति कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी
हुड्डा सरकार हो या चौटाला सरकार जींद के लिए किसी ने कुछ नहीं किया। भाजपा सरकार यहां से हाईवे निकाल रही है। दिल्ली-कटरा मार्ग भी जींद के पास से निकाला जा रहा है।
- राजीव जेटली, प्रदेश प्रवक्ता भाजपा