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Jind News: जिले में अब तक 188626 एमटी धान की हुई खरीद
Tue, 05 Nov 2024 12:29 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Tue, 05 Nov 2024 12:29 AM IST
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जींद। डीसी मोहम्मद इमरान रजा ने बताया कि जिले की अनाज मंडियों में अब तक 1,88,626 मीट्रिक टन धान तथा 1950.99 मीट्रिक टन बाजरा खरीदा जा चुका है।
उन्होंने बताया कि अलेवा में 8940, धमतान में 22238 धनोरी में 4232, गढ़ी में 9638, जींद में 2559, जुलाना में 95, खरल में 1722, काब्रछा में 1008, मंगलपुर में 2520, नगूरां में 2072, नरवाना में 90997, पिल्लूखेड़ा में 14400, सफीदों में 17610 और उचाना मंडी में 10595 मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है।
जिले की मंडियों में फूड विभाग ने 150329 मीट्रिक टन, हैफेड ने 32214 मीट्रिक टन और एचडब्ल्यूसी ने 6083 मीट्रिक टन धान खरीदा है। अब तक 167126 मीट्रिक टन धान का उठान हो चुका है। इसमें से फूड विभाग ने 138037 मीट्रिक टन, हैफेड ने 26040 मीट्रिक टन और एचडब्ल्यूसी ने 3049 मीट्रिक टन धान का उठान कार्य पूरा किया हैं। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे धान की फसल की कटाई के बाद फसल अवशेषों को आग न लगाएं। फसल अवशेषों को जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है। पशुओं के लिए चारे की कमी होती है। किसान फसल अवशेषों का उचित प्रबंध करें। फसल अवशेषों से पशुओं के लिए चारा भी बनाया जा सकता है। किसान कृषि यंत्रों की मदद से फसल अवशेषों की गांठ इत्यादि बनाकर बेच सकते हैं। फसल अवशेष को मिट्टी में मिलाकर भूमि की उपजाऊ शक्ति को बढ़ा सकते हैं।
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उन्होंने बताया कि अलेवा में 8940, धमतान में 22238 धनोरी में 4232, गढ़ी में 9638, जींद में 2559, जुलाना में 95, खरल में 1722, काब्रछा में 1008, मंगलपुर में 2520, नगूरां में 2072, नरवाना में 90997, पिल्लूखेड़ा में 14400, सफीदों में 17610 और उचाना मंडी में 10595 मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है।
जिले की मंडियों में फूड विभाग ने 150329 मीट्रिक टन, हैफेड ने 32214 मीट्रिक टन और एचडब्ल्यूसी ने 6083 मीट्रिक टन धान खरीदा है। अब तक 167126 मीट्रिक टन धान का उठान हो चुका है। इसमें से फूड विभाग ने 138037 मीट्रिक टन, हैफेड ने 26040 मीट्रिक टन और एचडब्ल्यूसी ने 3049 मीट्रिक टन धान का उठान कार्य पूरा किया हैं। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे धान की फसल की कटाई के बाद फसल अवशेषों को आग न लगाएं। फसल अवशेषों को जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है। पशुओं के लिए चारे की कमी होती है। किसान फसल अवशेषों का उचित प्रबंध करें। फसल अवशेषों से पशुओं के लिए चारा भी बनाया जा सकता है। किसान कृषि यंत्रों की मदद से फसल अवशेषों की गांठ इत्यादि बनाकर बेच सकते हैं। फसल अवशेष को मिट्टी में मिलाकर भूमि की उपजाऊ शक्ति को बढ़ा सकते हैं।
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