{"_id":"5bfaee4bbdec22415b095e6c","slug":"171543171659-jind-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दूसरे डिपो से आने वाले बसों की संख्या भी हुई कम, बस नहीं होने पर घंटो इंतजार कर रहे यात्री","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दूसरे डिपो से आने वाले बसों की संख्या भी हुई कम, बस नहीं होने पर घंटो इंतजार कर रहे यात्री
Updated Mon, 26 Nov 2018 12:17 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दूसरे डिपो से आने वाली बसों की संख्या घटी
अमर उजला ब्यूरो
जींद। ओवर टाइम बंद करने की वजह से दूसरे डिपो से भी बसें आनी बंद हो गई हैं। एसएस जागे राम ने कहा कि ओवर टाइम बंद होने के बाद दूसरे डिपो से भी पहले की अपेक्षा आधी बसे हीं अब जींद डिपो पहुंच रही हैं। यही कारण है कि यात्रियों को काफी देर तक बस का इंतजार करना पड़ रहा है। ओवर टाइम समाप्त करने के बाद विभाग की व्यवस्था चरमरा गई है। जींद डिपो की 185 बसों में से 172 ही ऑन रूट हैं, जिसमें से 24 बसे जींद डिपो की खराब हो चुकी हैं। ऐसे में 148 बसे ही ऑन रूट चल रही हैं। विभाग में 172 बस पर 294 चालक व 319 परिचालक हैं। जिसमें से औसतन रोज 50 चालक व 30 परिचालक रेस्ट पर रहते हैं। इससे विभाग को बसों को चलाने में काफी परेशानी हो रही है। ऊपर से कर्मचारी आठ घंटे की ड्यूटी करके घर जा रहे हैं। ओवर टाइम खत्म करने के बाद लंबे रूटों पर बस को सुचारू रूप से चलाने के लिए लोकल रूटों पर बस के चक्कर कम कर दिए गए हैं। इसके बाद दूसरे डिपो से बसों का आना भी कम हो गया है। जिस कारण यात्रियों की परेशानी बढ़ रही हैं।
ओवर टाइम खत्म करने के बाद फ्लांइग टीम, यार्ड रूम, कंप्यूटर रूम व बुकिंग रूम में कंप्यूटर पर क्लर्क के रूप में काम करने वाले 76 चालक व 86 परिचालक को अपनी मूल ड्यूटी पर आना पड़ा। जिस कारण इन विभागों में क्लर्क काम बाधित हो रहे हैं। अभी विभाग में 319 चालक व 294 परिचालक हैं। ओवर टाइम समाप्त करने के बाद नए नियमानुसार नया रोटेशन बनाने के लिए विभाग ने 54 चालक व 117 परिचालकों की डिमांड मुख्यालय को भेजी है।
दोपहर बाद यात्रियों को घंटों करना पड़ रहा इंतजार
ओवर टाइम समाप्त करने के बाद नया रोटेशन बनाने के चक्कर में यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। डीआई अधिकारी अजीत नेहरा ने कहा कि ओवर टाइम समाप्त होने के बाद कर्मचारियों से दिन में केवल आठ घंटे ही काम लिया जा सकता है। लंबे रूटों पर बस चलाने के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी का समावेश किया जा रहा है। नए रोटेशन के हिसाब बसों पर चालक व परिचालक कम पड़ रहे हैं। विभाग ने मुख्यालय को 54 चालक व 117 परिचालक की डिमांड भेजी है।
विज्ञापन
फोटो कैप्शन
विज्ञापन
अमर उजला ब्यूरो
जींद। ओवर टाइम बंद करने की वजह से दूसरे डिपो से भी बसें आनी बंद हो गई हैं। एसएस जागे राम ने कहा कि ओवर टाइम बंद होने के बाद दूसरे डिपो से भी पहले की अपेक्षा आधी बसे हीं अब जींद डिपो पहुंच रही हैं। यही कारण है कि यात्रियों को काफी देर तक बस का इंतजार करना पड़ रहा है। ओवर टाइम समाप्त करने के बाद विभाग की व्यवस्था चरमरा गई है। जींद डिपो की 185 बसों में से 172 ही ऑन रूट हैं, जिसमें से 24 बसे जींद डिपो की खराब हो चुकी हैं। ऐसे में 148 बसे ही ऑन रूट चल रही हैं। विभाग में 172 बस पर 294 चालक व 319 परिचालक हैं। जिसमें से औसतन रोज 50 चालक व 30 परिचालक रेस्ट पर रहते हैं। इससे विभाग को बसों को चलाने में काफी परेशानी हो रही है। ऊपर से कर्मचारी आठ घंटे की ड्यूटी करके घर जा रहे हैं। ओवर टाइम खत्म करने के बाद लंबे रूटों पर बस को सुचारू रूप से चलाने के लिए लोकल रूटों पर बस के चक्कर कम कर दिए गए हैं। इसके बाद दूसरे डिपो से बसों का आना भी कम हो गया है। जिस कारण यात्रियों की परेशानी बढ़ रही हैं।
ओवर टाइम खत्म करने के बाद फ्लांइग टीम, यार्ड रूम, कंप्यूटर रूम व बुकिंग रूम में कंप्यूटर पर क्लर्क के रूप में काम करने वाले 76 चालक व 86 परिचालक को अपनी मूल ड्यूटी पर आना पड़ा। जिस कारण इन विभागों में क्लर्क काम बाधित हो रहे हैं। अभी विभाग में 319 चालक व 294 परिचालक हैं। ओवर टाइम समाप्त करने के बाद नए नियमानुसार नया रोटेशन बनाने के लिए विभाग ने 54 चालक व 117 परिचालकों की डिमांड मुख्यालय को भेजी है।
विज्ञापन
दोपहर बाद यात्रियों को घंटों करना पड़ रहा इंतजार
ओवर टाइम समाप्त करने के बाद नया रोटेशन बनाने के चक्कर में यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। डीआई अधिकारी अजीत नेहरा ने कहा कि ओवर टाइम समाप्त होने के बाद कर्मचारियों से दिन में केवल आठ घंटे ही काम लिया जा सकता है। लंबे रूटों पर बस चलाने के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी का समावेश किया जा रहा है। नए रोटेशन के हिसाब बसों पर चालक व परिचालक कम पड़ रहे हैं। विभाग ने मुख्यालय को 54 चालक व 117 परिचालक की डिमांड भेजी है।
विज्ञापन
फोटो कैप्शन