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नहीं बिक रही है पीआर, किसान हुए परेशान, कई-कई दिनों से मंडी में कर रहे है किसान पीआर बिकने का इंतजार
Updated Sun, 21 Oct 2018 12:01 AM IST
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पीआर धान बेचने के लिए किसानों को करना पड़ रहा कई दिन इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
उचाना। इस बार पीआर की सरकारी खरीद किसानों के लिए सिरदर्द बनी हुई है। एक अक्तूबर से पीआर की खरीद शुरू हो चुकी है, लेकिन अब भी किसानों को धान बेचने के लिए एजेंसी को बेचने के लिए परेशानी हो रही है। पीआर को लेकर एजेंसियों को खरीदार नहीं मिलने से किसानों की फसल हर रोज नहीं बिक पा रही है। किसानों का कहना है कि गेहूं की तरह पीआर की खरीद सरकार अपने स्तर पर करें। अब एजेंसी को मिलर नहीं मिलने से किसानों को फसल बेचने के लिए परेशानी हो रही है। फड़ पर फसल आते ही खरीदी जाए चाहे मिलर खरीदें या सरकार। यहां पर पीआर की खरीद के लिए तीन एजेंसी अलाट हैं, लेकिन किसानों को अब भी धान बेचने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे बहुत से किसान हैं जो दस दिन से मंडी में फसल की रखवाली कर रहे हैं।
जिले सिंह, राममेहर, बनी सिंह, राजेंद्र, पंजाब सिंह व दलबीर ने कहा कि कई-कई दिनों से किसान मंडी में पीआर फसल की रखवाली कर रहे हैं। फसल नहीं बिकने से मंडी में ही रात कट रही है। सरकार को चाहिए कि पीआर धान भी गेहूं की तरह खरीदा जाय ताकि मंडी में आते ही फसल बिके। पिछले साल मंडी में आते ही पीआर बिकी थी, लेकिन इस बार पीआर बेचने को लेकर इंतजार करना पड़ रहा है। सरकार को चाहिए कि अगर मिलर नहीं मिल रहे तो सरकार खुद पीआर धान को खरीदे। मंडी में रात गुजारने से समय के साथ-साथ किसानों को आर्थिक नुकसान भी हो रहा है। कपास की चुगाई करनी है जो मंडी में रहने से नहीं कर पा रहे हैं।
अधिकतर एजेंसी खरीद रही हैं पीआर
मार्केट कमेटी सचिव जोगिंद्र सिंह ने कहा कि जो भी पीआर सरकारी मापदंडों पर खरा नहीं होता है उसे भी एजेंसी खरीद रही हैं। जो एजेंसी निर्धारित दिन खरीद नहीं करती उसको लेकर संबंधित एजेंसी अधिकारी को निर्धारित दिन खरीद को लेकर निर्देश दिए जाते हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
उचाना। इस बार पीआर की सरकारी खरीद किसानों के लिए सिरदर्द बनी हुई है। एक अक्तूबर से पीआर की खरीद शुरू हो चुकी है, लेकिन अब भी किसानों को धान बेचने के लिए एजेंसी को बेचने के लिए परेशानी हो रही है। पीआर को लेकर एजेंसियों को खरीदार नहीं मिलने से किसानों की फसल हर रोज नहीं बिक पा रही है। किसानों का कहना है कि गेहूं की तरह पीआर की खरीद सरकार अपने स्तर पर करें। अब एजेंसी को मिलर नहीं मिलने से किसानों को फसल बेचने के लिए परेशानी हो रही है। फड़ पर फसल आते ही खरीदी जाए चाहे मिलर खरीदें या सरकार। यहां पर पीआर की खरीद के लिए तीन एजेंसी अलाट हैं, लेकिन किसानों को अब भी धान बेचने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे बहुत से किसान हैं जो दस दिन से मंडी में फसल की रखवाली कर रहे हैं।
जिले सिंह, राममेहर, बनी सिंह, राजेंद्र, पंजाब सिंह व दलबीर ने कहा कि कई-कई दिनों से किसान मंडी में पीआर फसल की रखवाली कर रहे हैं। फसल नहीं बिकने से मंडी में ही रात कट रही है। सरकार को चाहिए कि पीआर धान भी गेहूं की तरह खरीदा जाय ताकि मंडी में आते ही फसल बिके। पिछले साल मंडी में आते ही पीआर बिकी थी, लेकिन इस बार पीआर बेचने को लेकर इंतजार करना पड़ रहा है। सरकार को चाहिए कि अगर मिलर नहीं मिल रहे तो सरकार खुद पीआर धान को खरीदे। मंडी में रात गुजारने से समय के साथ-साथ किसानों को आर्थिक नुकसान भी हो रहा है। कपास की चुगाई करनी है जो मंडी में रहने से नहीं कर पा रहे हैं।
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अधिकतर एजेंसी खरीद रही हैं पीआर
मार्केट कमेटी सचिव जोगिंद्र सिंह ने कहा कि जो भी पीआर सरकारी मापदंडों पर खरा नहीं होता है उसे भी एजेंसी खरीद रही हैं। जो एजेंसी निर्धारित दिन खरीद नहीं करती उसको लेकर संबंधित एजेंसी अधिकारी को निर्धारित दिन खरीद को लेकर निर्देश दिए जाते हैं।
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