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्रस्तावित एंकर

Thu, 28 Sep 2017 11:23 PM IST
Updated Thu, 28 Sep 2017 11:23 PM IST
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्रस्तावित एंकर
मुझे आतंकवादी कहने वालों तुम्हारी सोच में साजिश
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। एक्टिव थियेटर ग्रुप द्वारा दीवान बाल कृष्ण रंगशाला में किए जा रहे 11 दिवसीय नाटक उत्सव की कड़ी में बुधवार रात को शहीद भगत सिंह जयंती के उपलक्ष्य में पंजाबी नाटक मैं भगत सिंह’ का मंचन हुआ। जबरदस्त अभिनय, लजवाब संगीत और आकर्षक संवादों ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। वहीं शहीद भगत सिंह के बारे में किए जाने वाले संवादों ने दर्शकों में जोश भरा। इस दौरान एक दृश्य में स्वयं भगत सिंह का अभिनय कर रहे कलाकार ने कहा कि मुझे आतंकवादी कहने वालों तुम्हारी सोच में साजिश है। इस संवाद पर दर्शकों ने खड़े होकर तालियां बजाई।
नाटक की शुरूआत साधारण पंजाब के परिवेश से होती है। यहां एक चाय की दुकान पर दो बच्चे काम करते हैं। वहीं सरकार ने चाय की दुकान को तोड़कर फैक्ट्री बनाने के लिए जमीन अधिग्रहण कर ली है। गांव के लोग यहां फैक्ट्री का विरोध करते हैं। सूत्रधार एक पत्रकार की भूमिका में होता है और वह यहां फैक्ट्री बनने होने वाले प्रभावों की बात करता है, लेकिन गांव के लोग उसे पागल कहते हैं। एक दिन जब अदालत के आदेश पर पुलिस यहां से कब्जा हटवाने आती है तो लोग शहीद भगत सिंह के विचारों से प्रभावित होकर इसका विरोध करते हैं। पुलिस निहत्थे लोगों पर क्रूरता करती है और सभी लोग घायल होकर गिर जाते हैं। इसी बीच मंच पर एक युवक आता है, जो शहीद भगत सिंह की पुस्तकें पढ़कर मानसिक रूप से परिपक्व होता है। पुलिस युवक से पूछती है कि वह कौन है। युवक कहता है, मैं भगत सिंह हूं। यह सुनकर पुलिस पीछे हट जाती है। इस पर यहां घायल पड़ा हर व्यक्ति जोर-जोर से बोलता है कि मैं हूं भगत सिंह-मैं हूं भगत सिंह। ऐसे पुलिस यहां से भाग जाती है। नाटक का मंचन पंजाबी भाषा में किया गया, लेकिन फिर भी लोग नाटक से बंधे रहे। दर्शकों ने निर्देशक कीर्ति कृपाल के काम को खूब सराहा।
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राजनीतिक व्यवस्था पर करारी चोट
नाटक में वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था और किसानों की हालत को करीब से दिखाया गया है। साथ ही ऐसे माहौल में शहीद भगत सिंह के विचारों की प्रासंगिता को दर्शाया गया है। नाटक में दिखाया कि किस प्रकार साहुकार किसानों का शोषण करते हैं और कर्ज से तंग आकर किसान आत्महत्या करते हैं।
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युवक ने मांगा बम तो थमा दी किताबें
नाटक के एक दृश्य में सूत्रधार और चाय की दुकान पर काम करने वाले युवक के बीच संवाद होता है। इस दौरान सूत्रधार कहता है कि अब तो वही करना हो जो भगत सिंह ने किया था। पूछने पर सूत्रधार बताता है कि बम फोड़ना पड़ेगा। इस पर युवक जोश में आकर बम मांगता है। इस पर सूत्रधार उसके हाथ में शहीद भगत सिंह का साहित्य थमा देता है और कहता है कि पहले यह पढ़ो, फिर बम खुद मिल जाएगा। इस पर दर्शकों ने खूब तालियां बजाई।
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