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सवा एकड़ जमीन गिरवी रखकर बेटी का साकार किया एवरेस्ट फतेह का सपना

Wed, 29 May 2019 11:19 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 29 May 2019 11:19 PM IST
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सवा एकड़ जमीन गिरवी रखकर बेटी का साकार किया एवरेस्ट फतेह का सपना
जींद। सुदकैन खुर्द गांव में एक साधारण किसान परिवार में जन्म लेने वाली विकास राणा के हौसले के आगे विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट भी छोटी पड़ गई है। विकास के परिवार की आर्थिक हालात कमजोर होने के चलते विकास राणा के माउंट एवरेस्ट फतेह करने के सपने को साकार करने में बाधक बनी। यह बाधा आम परिवार के लिए बहुत बड़ी थी। इसके बावजूद भी विकास राणा के हौसले को देखते हुए परिवार व समाज ने आर्थिक बाधा को खुद हटाने का काम किया। एवरेस्ट को फतेह करने पर आने वाले 30 लाख रुपये के खर्च को वहन करने की क्षमता परिवार में नहीं थी। मगर विकास राणा की जिद थी कि वह एवरेस्ट को जरूर फतेह करेगी। राणा के इस हौसले को देखकर पिता ओम प्रकाश ने ढाई एकड़ में से सवा एकड़ जमीन गिरवी रखकर कुछ पैसों का इंतजाम किया। बाकी के 15 लाख रुपये को राजपूत समाज ने एकत्रित कर दिए। इस प्रकार विकास राणा का माउंट एवरेस्ट फतेह करने का सपना साकार हो गया।
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विकास राणा के अनुसार अब तक साउथ अफ्रीका की किलिमंजारो और रूस की माउंट एल्ब्रुस की चोटी को फतेह कर तिरंगा फहराया है। विकास की इन्हीं उपलब्धियों को देखते हुए परिवार व समाज ने भी विकास पर भरोसा जताया और इस चोटी को फतेह करने के लिए हरसंभव सहायता देकर आगे बढ़ाने का काम किया। अपने इन हौसलों के बदौलत विकास राणा हरियाणा की एकमात्र स्कीइंग की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी व एक पर्वतारोही भी है। अब उन्होंने माउंट एवरेस्ट अभियान में न केवल सफलता पूर्वक तिरंगा फहराकर आई बल्कि पूरी दुनिया में यह साबित कर दिया की बेटियां किसी भी ऊंचाई को छूने में सक्षम है। विकास राणा की माता गृहिणी हैं।
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बेटी की उपलब्धि पर गर्व
विकास राणा के पिता ओमप्रकाश ने बताया उन्हें बेटी की इस उपलब्धि पर गर्व है। शुरू से ही उन्होंने विकास राणा को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। हालांकि इसके लिए समाज के लोगों का विरोध का सामना भी करना पड़ा, लेकिन किसी भी बात की परवाह किए बिना बेटी के सपनों को उड़ान दी।
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2011 में जम्मू कश्मीर के जवाहर इंस्टीट्यूट से शुरू की थी चढ़ाई
विकास राणा ने 2011 में जम्मू कश्मीर के जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग विंटर स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में कोर्स करके पर्वतारोहण की शुरुआत की। इसके साथ-साथ राणा ने स्कीइंग में भी देश और प्रदेश में अपना नाम चमकाया। विकास राणा हरियाणा की इकलौती इंटरनेशनल स्कीइंग की खिलाड़ी हैं। इन्होंने पांच बार नेशनल गेम में भाग लिया। इसमें वर्ष 2018 में इन्होंने नेशनल गेम में सिल्वर मेडल जीता था. 2017 में जापान में हुए एशियन गेम में भाग लेकर भारत को रिप्रजेंट किया था।
पांच अप्रैल को शुरू किया अभियान
विकास राणा ने पांच अप्रैल को माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई का अभियान शुरू कर दिया था। बेस कैंप से माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई शुरू कर बर्फीले तूफानों एवं कठिन परिस्थितियों को लांघते हुए अपनी पूरी तैयारी और हौसले के साथ एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया है। पांच सितंबर 2018 को राणा ने यूरोप महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस को फतेह कर स्कीइंग करते हुए नीचे आईं। इस बार विकास राणा ने हरियाणा की पर्वतारोहण कंपनी हिमालयाज एक्सपीडिशन का बैनर एवरेस्ट के शिखर पर लहराया।

जून में घर लौटेंगी विकास
एवरेस्ट फतेह करने के बाद विकास राणा को स्वास्थ्य संबंधित कुछ दिक्कत चल रही हैं, ऐसे में वे काठमांडू में स्वास्थ्यलाभ ले रही हैं। जून महीने में वे अपने घर लौटेंगी।
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