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भैंसों को नहला रहे युवक की तालाब में डूबने से मौत
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जींद। तालाब में भैंसों को नहलाते समय गहरे पानी में डूबने से किशोर की मौत हो गई। मरने वाला युवक जिला सोनीपत के निजामपुर का रहने वाला था। 17 वर्षीय किशोर शनिवार दोपहर में दो बजे तालाब डूबा था। रविवार सुबह नागरिक अस्पताल में युवक के शव का पोस्टमार्टम करवाकर पुलिस ने परिजनों को सौंप दिया। युवक के पिता की 14 वर्ष पहले ही मौतो हो चुकी थी। उसकी मां खेती करके अपने बेटे और बेटी का पालन-पोषण कर रही थी। किशोर 11वीं कक्षा का छात्र था।
शनिवार दोपहर को लगभग दो बजे आशीष अपनी भैंसों को पानी पिलाने के लिए गांव के ही तालाब पर गया था। वह तालाब में भैंसों को नहलाने लगा। इसी बीच वह गहरे पानी में चला गया जिससे डूबने से उसकी मौत हो गई। लगभग एक घंटे बाद भैंस अपने आप घर पहुंच गईं, लेकिन आशीष नहीं पहुंचा। आशीष के ताऊ आनंद ने बताया कि भैंस घर आने के बाद उन्होंने सोचा कि आशीष किसी दोस्त के पास गया होगा। काफी देर बाद भी जब वह वापस नहीं आया तो उसकी तलाश शुरू की गई। शाम पांच बजे आशीष का शव तालाब में उतराता हुआ मिला। इसकी जानकारी तुरंत पुलिस को दी गई। सूचना पाकर गोहाना पुलिस मौके पर पहुंची और देर शाम को आशीष के शव को पोस्टमार्टम के लिए जींद के नागरिक अस्पताल में लाया गया। रविवार सुबह शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया गया। आशीष गांव के ही सरकारी स्कूल में 11वीं कक्षा का छात्र था। इसी स्कूल में उसकी बहन सुनैना भी नौवीं कक्षा में पढ़ती है। आशीष की मां गीता ने आशीष व उसकी बहन को मुश्किल से पाला था। पुलिस ने आशीष के ताऊ आनंद के बयान दर्ज करने के बाद शव उनको सौंप दिया। रविवार दोपहर को गांव निजामपुर में आशीष के शव का अंतिम संस्कार किया गया।
14 वर्ष पहले हुई थी आशीष के पिता की मौत
आशीष के पिता जय दयाल की मौत 14 वर्ष पहले हुई थी। जय दयाल के दोनों गुर्दे खराब हो गए थे। आशीष के पिता एक ट्रक पर ड्राइवरी करते थे। उनके पास एक एकड़ से कम जमीन है। पिता की मौत के बाद आशीष व सुनैना को उनकी मां गीता ने अपनी खेतीबाड़ी के सहारे ही बड़ी मुश्किल से पाला था। गीता को उम्मीद थी कि अब उसका बेटा बड़ा हो गया है और जल्द ही वह कमाने लगेगा। इसके बाद उसके सारे दुख दूर हो जाएंगे लेकिन उसे क्या पता था कि भगवान उसके बेटे को छीनकर उसे और अधिक दुख दे देगा।
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तीन परिवारों का लाडला था आशीष
आशीष के पिता जय दयाल की मौत के बाद आशीष उनके तीन परिवारों में सबका लाडला था। जय दयाल के भाई आनंद व जय कुमार ने आशीष का बहुत ख्याल रखा। आनंद गांव में परचून की दुकान चलाते हैं तथा जय कुमार दिल्ली में गाड़ी चलाते हैं। भाई की मौत के बाद दोनों ने आशीष के परिवार का बहुत ध्यान रखते थे। जय कुमार दिल्ली से जब भी आता आशीष के लिए कुछ न कुछ लाया करता था। आनंद भी अपनी दुकान में कभी-कभी आशीष को बैठा लिया करता था।
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शनिवार दोपहर को लगभग दो बजे आशीष अपनी भैंसों को पानी पिलाने के लिए गांव के ही तालाब पर गया था। वह तालाब में भैंसों को नहलाने लगा। इसी बीच वह गहरे पानी में चला गया जिससे डूबने से उसकी मौत हो गई। लगभग एक घंटे बाद भैंस अपने आप घर पहुंच गईं, लेकिन आशीष नहीं पहुंचा। आशीष के ताऊ आनंद ने बताया कि भैंस घर आने के बाद उन्होंने सोचा कि आशीष किसी दोस्त के पास गया होगा। काफी देर बाद भी जब वह वापस नहीं आया तो उसकी तलाश शुरू की गई। शाम पांच बजे आशीष का शव तालाब में उतराता हुआ मिला। इसकी जानकारी तुरंत पुलिस को दी गई। सूचना पाकर गोहाना पुलिस मौके पर पहुंची और देर शाम को आशीष के शव को पोस्टमार्टम के लिए जींद के नागरिक अस्पताल में लाया गया। रविवार सुबह शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया गया। आशीष गांव के ही सरकारी स्कूल में 11वीं कक्षा का छात्र था। इसी स्कूल में उसकी बहन सुनैना भी नौवीं कक्षा में पढ़ती है। आशीष की मां गीता ने आशीष व उसकी बहन को मुश्किल से पाला था। पुलिस ने आशीष के ताऊ आनंद के बयान दर्ज करने के बाद शव उनको सौंप दिया। रविवार दोपहर को गांव निजामपुर में आशीष के शव का अंतिम संस्कार किया गया।
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14 वर्ष पहले हुई थी आशीष के पिता की मौत
आशीष के पिता जय दयाल की मौत 14 वर्ष पहले हुई थी। जय दयाल के दोनों गुर्दे खराब हो गए थे। आशीष के पिता एक ट्रक पर ड्राइवरी करते थे। उनके पास एक एकड़ से कम जमीन है। पिता की मौत के बाद आशीष व सुनैना को उनकी मां गीता ने अपनी खेतीबाड़ी के सहारे ही बड़ी मुश्किल से पाला था। गीता को उम्मीद थी कि अब उसका बेटा बड़ा हो गया है और जल्द ही वह कमाने लगेगा। इसके बाद उसके सारे दुख दूर हो जाएंगे लेकिन उसे क्या पता था कि भगवान उसके बेटे को छीनकर उसे और अधिक दुख दे देगा।
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तीन परिवारों का लाडला था आशीष
आशीष के पिता जय दयाल की मौत के बाद आशीष उनके तीन परिवारों में सबका लाडला था। जय दयाल के भाई आनंद व जय कुमार ने आशीष का बहुत ख्याल रखा। आनंद गांव में परचून की दुकान चलाते हैं तथा जय कुमार दिल्ली में गाड़ी चलाते हैं। भाई की मौत के बाद दोनों ने आशीष के परिवार का बहुत ध्यान रखते थे। जय कुमार दिल्ली से जब भी आता आशीष के लिए कुछ न कुछ लाया करता था। आनंद भी अपनी दुकान में कभी-कभी आशीष को बैठा लिया करता था।