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सड़कों पर फिर बढने लगी लावारिश सांडों की संख्या, खतरे में लोगों की जान
Updated Mon, 12 Mar 2018 12:20 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
करीब छह महीने की राहत के बाद एक बार फिर जींद शहर की सड़कों पर लावारिस पशुओं का कब्जा होने लगा है। शहर में नंदीशाला के नाम पर दूसरे जिलों व शहरों से पशुओं को छोड़ा जा रहा है। प्रशासन इनको रोकने में नाकाम साबित हो रहा है। एक बार फिर लावारिस सांडों के कारण हादसे बढ़ने लगे हैं।
जींद शहर की सड़कों पर पहले तीन हजार से अधिक लावारिस पशु होते थे। सभी पशु गोवंश हैं। इसके लिए प्रशासन ने पिछले साल अगस्त माह में अभियान चला कर जयंती देवी मंदिर के सामने अस्थाई नंदीशाला का निर्माण किया और यहां पशुओं को लाया गया। फिलहाल जयंती देवी मंदिर के सामने अस्थाई नंदीशाला और हांसी रोड पर स्थाई नंदीशाला में करीब चार हजार गायें, सांड और बछड़े रखे गए हैं। शहर की सड़कों से गोवंश को हटाने के बाद एक बार फिर से इनकी संख्या शहर में बढ़ने लगी है।
दूसरे जिलों से भी आ रहे हैं पशु
जींद में नंदीशाला बनने के बाद आसपास के गांवों के साथ-साथ दूसरे जिलों के किसान भी गोवंश को जींद शहर में छोड़ने लगे हैं। कई बार ट्रॉलियों में भर कर किसान गायों को नंदीशाला ही पहुंच जाते हैं, लेकिन जब वहां इनको रखने से मना कर दिया जाता है तो किसान इन पशुओं को शहर में ही छोड़कर चले जाते हैं।
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पहले जा चुकी हैं जान
शहर में लावारिस पशुओं की समस्या बहुत पुरानी है। इससे पहले नागरिक अस्पताल के पास सांडों के कारण हुए हादसे में डॉ. अश्वनी शर्मा की मौत हो चुकी है। इसके अलावा किनाना गांव के पास सांडों की चपेट में ही गाड़ी आने से हुए हादसे में एडवोकेट कमल गोस्वामी की जान चली गई थी। शहर में दर्जनों लोग घायल हो चुके हैं, जिनमें जींद के विधायक डॉ. हरिचंद मिढ़ा भी शामिल हैं। विधायक डॉ. हरिचंद मिढ़ा का लड़ते हुए सांडों ने अपनी चपेट में ले लिया था, जिससे वे काफी दिन चल नहीं पाए थे।
फिर होने लगे हादसे
छह माह की राहत के बाद फिर से सांडों के कारण हादसे होने लगे हैं। ऐसा ही एक हादसा आठ मार्च की शाम हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी सुशील कुमार के साथ हुआ। सुशील कुमार अपने परिवार के साथ शादी समारोह में जा रहे थे। जैसे ही उनकी गाड़ी सफीदों गेट के पास पहुंची, आपस में लड़ते हुए एक सांड उनकी गाड़ी के उपर आकर गिर गया। इससे उन्हें चोट तो नहीं लगी, गाड़ी को काफी नुकसान हो गया। वहीं चार-पांच दिन पहले शहर के सबसे व्यस्ततम बाजार तांगा चौक पर सांडों की लड़ाई हो गई। इसमें बड़ी मुश्किल से दुकानदारों ने उन्हें अलग किया।
800 से एक हजार सांड सड़कों पर
हालांकि प्रशासन ने करीब छह जार सांडों, गायों और बछड़ों को सड़कों से हटाकर नंदीशाला पहुंचाया है, लेकिन अब करीब एक महीने में फिर से लावारिस पशुओं की संख्या सड़क पर बढ़ने लगी है। फिलहाल शहर की सड़कों पर करीब 800 से एक हजार लावारिस पशु हैं।
लोगों ने दिया पूरा सहयोग
शहर में फिलहाल दो नंदिशालाओं में पशुओं को रखा जा रहा है। इसके लिए शहर के लोगों ने दिल खोलकर दान दिया है। इसके बावजूद लोगों को इनसे राहत नहीं मिल रही है। दोनों नंदिशालाओं में करीब डेढ़ करोड़ रुपये दान दिया जा चुका है।
रात को हादसों का डर
सांडों के कारण रात के समय हादसों का खतरा बढ़ गया है। सड़कों पर अधिकतर सांड काले हैं। रात को अंधेरे में यह सांड दिखाई नहीं देते और विशेषकर बाइक सवार लोग इससे टकराकर चोटिल हो रहे हैं।
फिर चलाएंगे अभियान
नंदीशाला में लोग पशुओं को छोड़ने आते हैं, लेकिन इनके लिए व्यवस्था करनी पड़ती है। ऐसे में उन्हें एकाएक यहां पशु रखने से मना करने पर वे शहर में ही पशुओं को छोड़ रहे हैं। प्रशासन को जानकारी मिली है कि हिसार जिला के कुछ गांवों से भी किसान जींद शहर में पशुओं को छोड़ रहे हैं। इस पर अंकुश लगाया जाएगा। प्रशासन जल्द ही सड़कों से पशुओं को नंदीशाला पहुंचाने के लिए अभियान चलाएगा।
महावीर प्रसाद, एसडीएम।
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जींद।
करीब छह महीने की राहत के बाद एक बार फिर जींद शहर की सड़कों पर लावारिस पशुओं का कब्जा होने लगा है। शहर में नंदीशाला के नाम पर दूसरे जिलों व शहरों से पशुओं को छोड़ा जा रहा है। प्रशासन इनको रोकने में नाकाम साबित हो रहा है। एक बार फिर लावारिस सांडों के कारण हादसे बढ़ने लगे हैं।
जींद शहर की सड़कों पर पहले तीन हजार से अधिक लावारिस पशु होते थे। सभी पशु गोवंश हैं। इसके लिए प्रशासन ने पिछले साल अगस्त माह में अभियान चला कर जयंती देवी मंदिर के सामने अस्थाई नंदीशाला का निर्माण किया और यहां पशुओं को लाया गया। फिलहाल जयंती देवी मंदिर के सामने अस्थाई नंदीशाला और हांसी रोड पर स्थाई नंदीशाला में करीब चार हजार गायें, सांड और बछड़े रखे गए हैं। शहर की सड़कों से गोवंश को हटाने के बाद एक बार फिर से इनकी संख्या शहर में बढ़ने लगी है।
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दूसरे जिलों से भी आ रहे हैं पशु
जींद में नंदीशाला बनने के बाद आसपास के गांवों के साथ-साथ दूसरे जिलों के किसान भी गोवंश को जींद शहर में छोड़ने लगे हैं। कई बार ट्रॉलियों में भर कर किसान गायों को नंदीशाला ही पहुंच जाते हैं, लेकिन जब वहां इनको रखने से मना कर दिया जाता है तो किसान इन पशुओं को शहर में ही छोड़कर चले जाते हैं।
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पहले जा चुकी हैं जान
शहर में लावारिस पशुओं की समस्या बहुत पुरानी है। इससे पहले नागरिक अस्पताल के पास सांडों के कारण हुए हादसे में डॉ. अश्वनी शर्मा की मौत हो चुकी है। इसके अलावा किनाना गांव के पास सांडों की चपेट में ही गाड़ी आने से हुए हादसे में एडवोकेट कमल गोस्वामी की जान चली गई थी। शहर में दर्जनों लोग घायल हो चुके हैं, जिनमें जींद के विधायक डॉ. हरिचंद मिढ़ा भी शामिल हैं। विधायक डॉ. हरिचंद मिढ़ा का लड़ते हुए सांडों ने अपनी चपेट में ले लिया था, जिससे वे काफी दिन चल नहीं पाए थे।
फिर होने लगे हादसे
छह माह की राहत के बाद फिर से सांडों के कारण हादसे होने लगे हैं। ऐसा ही एक हादसा आठ मार्च की शाम हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी सुशील कुमार के साथ हुआ। सुशील कुमार अपने परिवार के साथ शादी समारोह में जा रहे थे। जैसे ही उनकी गाड़ी सफीदों गेट के पास पहुंची, आपस में लड़ते हुए एक सांड उनकी गाड़ी के उपर आकर गिर गया। इससे उन्हें चोट तो नहीं लगी, गाड़ी को काफी नुकसान हो गया। वहीं चार-पांच दिन पहले शहर के सबसे व्यस्ततम बाजार तांगा चौक पर सांडों की लड़ाई हो गई। इसमें बड़ी मुश्किल से दुकानदारों ने उन्हें अलग किया।
800 से एक हजार सांड सड़कों पर
हालांकि प्रशासन ने करीब छह जार सांडों, गायों और बछड़ों को सड़कों से हटाकर नंदीशाला पहुंचाया है, लेकिन अब करीब एक महीने में फिर से लावारिस पशुओं की संख्या सड़क पर बढ़ने लगी है। फिलहाल शहर की सड़कों पर करीब 800 से एक हजार लावारिस पशु हैं।
लोगों ने दिया पूरा सहयोग
शहर में फिलहाल दो नंदिशालाओं में पशुओं को रखा जा रहा है। इसके लिए शहर के लोगों ने दिल खोलकर दान दिया है। इसके बावजूद लोगों को इनसे राहत नहीं मिल रही है। दोनों नंदिशालाओं में करीब डेढ़ करोड़ रुपये दान दिया जा चुका है।
रात को हादसों का डर
सांडों के कारण रात के समय हादसों का खतरा बढ़ गया है। सड़कों पर अधिकतर सांड काले हैं। रात को अंधेरे में यह सांड दिखाई नहीं देते और विशेषकर बाइक सवार लोग इससे टकराकर चोटिल हो रहे हैं।
फिर चलाएंगे अभियान
नंदीशाला में लोग पशुओं को छोड़ने आते हैं, लेकिन इनके लिए व्यवस्था करनी पड़ती है। ऐसे में उन्हें एकाएक यहां पशु रखने से मना करने पर वे शहर में ही पशुओं को छोड़ रहे हैं। प्रशासन को जानकारी मिली है कि हिसार जिला के कुछ गांवों से भी किसान जींद शहर में पशुओं को छोड़ रहे हैं। इस पर अंकुश लगाया जाएगा। प्रशासन जल्द ही सड़कों से पशुओं को नंदीशाला पहुंचाने के लिए अभियान चलाएगा।
महावीर प्रसाद, एसडीएम।