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नगूरां में जुटे देश भर के किसान, अनुभव किए साझा
Updated Sun, 04 Jun 2017 12:16 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
अलेवा (जींद)।
नगूरां गांव स्थित सरस्वती सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शनिवार को भारतीय किसान एवं कृषि का वर्तमान संकट पर संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी, सुखदेव सिंह सहित महाराष्ट्र, पंजाब व राजस्थान सहित कई राज्यों के किसान शामिल हुए। इस दौरान जींद किसानों द्वारा की जा रही कीटनाशक रहित खेती को देश भर से पहुंच किसानों ने काफी सराहा। इससे खेती की कम हो रही लागत को किसानों ने महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम में जहर मुक्त थाली तथा कीट मित्र डॉ. स्वर्गीय सुरेंद्र दलाल पर आधारित कार्यक्रम रहे। भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि आज कृषि का महत्वपूर्ण होना जरूरी हो गया है। कृषि को प्राकृतिक और मानव समर्थक दिशा में मोड़कर न केवल शुद्ध भोजन प्राप्त किया जा सकता है, बल्कि जीव जंतुओं को बचाने में सहयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक रिपोर्ट तथा किसानों के अनुभवों से सिद्ध हो चुका है कि औद्योगिक सहायता विनाश की तरफ बढ़ चली है।
कम खर्च, कम पानी की खेती पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान अपने-अपने तरीके से जैविक खेती के बारे में अनुभव साझा किए। किसानों ने बताया कि वे किस प्रकार कम पानी के बावजूद खेती की तकनीक में बदलाव कर बेहतर पैदावार लेते हैं। किसानों ने बिना कीटनाशक प्रयोग कर जैविक खेती पर मिल रही अच्छी कीमतों से हो रहे लाभ पर भी चर्चा की।
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नगूरां में जुटे देश भर के किसान, अनुभव किए साझा
जींद के किसानों के फार्मूले को सभी ने सराहा
फोटो कैप्शन
03जेएनडी 07 : मंच पर मौजूद किसान नेता।
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अलेवा (जींद)।
नगूरां गांव स्थित सरस्वती सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शनिवार को भारतीय किसान एवं कृषि का वर्तमान संकट पर संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी, सुखदेव सिंह सहित महाराष्ट्र, पंजाब व राजस्थान सहित कई राज्यों के किसान शामिल हुए। इस दौरान जींद किसानों द्वारा की जा रही कीटनाशक रहित खेती को देश भर से पहुंच किसानों ने काफी सराहा। इससे खेती की कम हो रही लागत को किसानों ने महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम में जहर मुक्त थाली तथा कीट मित्र डॉ. स्वर्गीय सुरेंद्र दलाल पर आधारित कार्यक्रम रहे। भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि आज कृषि का महत्वपूर्ण होना जरूरी हो गया है। कृषि को प्राकृतिक और मानव समर्थक दिशा में मोड़कर न केवल शुद्ध भोजन प्राप्त किया जा सकता है, बल्कि जीव जंतुओं को बचाने में सहयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक रिपोर्ट तथा किसानों के अनुभवों से सिद्ध हो चुका है कि औद्योगिक सहायता विनाश की तरफ बढ़ चली है।
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कम खर्च, कम पानी की खेती पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान अपने-अपने तरीके से जैविक खेती के बारे में अनुभव साझा किए। किसानों ने बताया कि वे किस प्रकार कम पानी के बावजूद खेती की तकनीक में बदलाव कर बेहतर पैदावार लेते हैं। किसानों ने बिना कीटनाशक प्रयोग कर जैविक खेती पर मिल रही अच्छी कीमतों से हो रहे लाभ पर भी चर्चा की।
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नगूरां में जुटे देश भर के किसान, अनुभव किए साझा
जींद के किसानों के फार्मूले को सभी ने सराहा
फोटो कैप्शन
03जेएनडी 07 : मंच पर मौजूद किसान नेता।