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एशियन यूथ गेम्स में जींद के हैप्पी ने जीता सिल्वर मेडल
Updated Fri, 06 Jul 2018 12:49 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। थाइलैंड के बैंकॉक में हुई एशियन यूथ गेम्स 2018 में जिले के ईगराह गांव के हैप्पी ने सिल्वर मेडल जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। वीरवार को जींद पहुंचने पर हैप्पी का जोरदार स्वागत किया गया।
पुरानी अनाज मंडी में महाराज मुकेश गिरी की ओर से हैप्पी के सम्मान में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यहां हैप्पी को जुलूस में लाया गया। मुकेश गिरी ने कहा कि प्रदेश में खिलाड़ियों की कोई कमी नहीं है। केवल जरूरत है, उनके अंदर छिपी प्रतिभा को निखारने की। मुकेश गिरी ने कहा कि ईगराह गांव का हैप्पी पहले भी देश के लिए मेडल जीतकर लाया है। हैप्पी आर्मी में कार्यरत है, इसके बावजूद देश के लिए खेलते हुए देश का नाम रोशन कर रहा है। ईगराह गांव के हैप्पी ने बताया कि उसके पिता का सपना था कि वह कुश्ती में अच्छा खिलाड़ी बने। इसी सोच के चलते उसके पिता उसे धड़ौली गांव में शमशेर पहलवान के अखाड़े में छोड़ आए थे। यहां पर उन्होंने अभ्यास किया। इसके बाद वह दलबीर सिंधु के संपर्क में आए और उन्होंने एक साल तक मेहनत की। इसके बाद वह डी बटालियन 14 में आर्मी में भर्ती हो गया। थाइलैंड में आयोजित के 61 किलोग्राम भार वर्ग में उसने सिल्वर मैडल जीतने का काम किया।
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जींद। थाइलैंड के बैंकॉक में हुई एशियन यूथ गेम्स 2018 में जिले के ईगराह गांव के हैप्पी ने सिल्वर मेडल जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। वीरवार को जींद पहुंचने पर हैप्पी का जोरदार स्वागत किया गया।
पुरानी अनाज मंडी में महाराज मुकेश गिरी की ओर से हैप्पी के सम्मान में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यहां हैप्पी को जुलूस में लाया गया। मुकेश गिरी ने कहा कि प्रदेश में खिलाड़ियों की कोई कमी नहीं है। केवल जरूरत है, उनके अंदर छिपी प्रतिभा को निखारने की। मुकेश गिरी ने कहा कि ईगराह गांव का हैप्पी पहले भी देश के लिए मेडल जीतकर लाया है। हैप्पी आर्मी में कार्यरत है, इसके बावजूद देश के लिए खेलते हुए देश का नाम रोशन कर रहा है। ईगराह गांव के हैप्पी ने बताया कि उसके पिता का सपना था कि वह कुश्ती में अच्छा खिलाड़ी बने। इसी सोच के चलते उसके पिता उसे धड़ौली गांव में शमशेर पहलवान के अखाड़े में छोड़ आए थे। यहां पर उन्होंने अभ्यास किया। इसके बाद वह दलबीर सिंधु के संपर्क में आए और उन्होंने एक साल तक मेहनत की। इसके बाद वह डी बटालियन 14 में आर्मी में भर्ती हो गया। थाइलैंड में आयोजित के 61 किलोग्राम भार वर्ग में उसने सिल्वर मैडल जीतने का काम किया।
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