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11 फायर बिग्रेड गाड़ी और 21 कर्मचारियों के भरोसे लाखों एकड़ गेहूं की फसल
Updated Thu, 22 Mar 2018 12:11 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। गर्मी का मौसम दस्तक दे चुका है, लेकिन फायर ब्रिगेड की तैयारियां अभी तक अधूरी हैं। हर साल गेहूं के सीजन में फसल के साथ-साथ आगजनी की घटनाओं में काफी तेजी आती है, लेकिन जींद फायर ब्रिगेड के इंतजाम इन घटनाओं के आगे बोने साबित होते हैं।
फिलहाल अग्नि शमक विभाग के पास महज 11 फायर ब्रिगेड की गाड़ियां हैं और इनके लिए महज 21 कर्मचारी हैं। जरूरत के हिसाब से जिला में 20 गाड़ियां होनी चाहिए और 120 कर्मचारियों की तैनाती होनी चाहिए। फायर फाइटिंग सिस्टम के अनुसार एक गाड़ी पर एक शिफ्ट छह लोगों का स्टाफ होना चाहिए। इस हिसाब से रात-दिन की तीनों शिफ्टों में एक गाड़ी पर 18 फायर फाइटर्स की टीम होनी चाहिए। इसके विपरीत जिला में फायर ब्रिगेड के पास कुल 21 कर्मचारियों का स्टाफ है। इस हिसाब से फायर ब्रिगेड का स्टाफ महज एक गाड़ी को ही ऑपरेट कर सकता है। जिला अग्निशमन विभाग में गाड़ियों की कमी के साथ-साथ स्टाफ की भी भारी कमी सामने आई है। अग्निशमन विभाग में स्टाफ और गाड़ियों की कमी के कारण प्रतिवर्ष किसानों को गेहूं की फसल में आग लगने से भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। जिले में लाखों एकड़ भूमि पर गेहूं की फसल पककर तैयार हो चुकी है। इसमें प्रतिवर्ष आग लगने से किसानों की मेहनत पर पानी फिरता है। आगजनी के कारण प्रति वर्ष जिले में सैकड़ों एकड़ गेहूं की फसल जलती है। इसका मुख्य कारण विभाग के पास गाडिय़ों समेत स्टाफ की कमी रहती है।
नियमित स्टाफ का संकट
अग्निशमन विभाग के पास जिले भर में कुल 11 फायर ब्रिगेड की की गाड़ियां हैं। इनमें ज्यादातर कच्चे स्टाफ के भरोसे ही गाड़ियां चल रही हैं। विभाग पिछले कुछ समय से सरकार से स्टाफ की भी मांग कर रहा है, ताकि सभी गाड़ियों से आपात स्थिति में आग पर काबू पाने के लिए पर्याप्त स्टाफ मौजूद रहे। इससे आग पर तुरंत काबू पाने में मदद मिलेगी। अग्निशमन विभाग में स्टाफ की कमी पिछले कई सालों से है, लेकिन इस विभाग में इन कर्मियों की भर्ती अब तक नहीं की गई। इसके कारण जिले भर के किसानों की फसल पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। अग्निशमन विभाग ज्यादातर कच्चे कर्मचारियों के भरोसे ही चल रहा है। पिछले कई सालों से किसानों को गेहूं की खेतों में खड़ी फसल में आग लग जाने के कारण बहुत अधिक नुकसान हो रहा है। समय से फायर ब्रिगेड की गाड़ी नहीं पहुंचने के कारण सैंकड़ों एकड़ जमीन में हर साल गेहूं की खड़ी फसल जलकर राख हो जाती है।
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गाड़ियों की संख्या के अनुसार 55 कर्मियों की कमी
जिला अग्निशमन विभाग में गाड़ियों की संख्या के अनुसार लगभग 55 से ज्यादा कर्मचारियों की कमी है। इसके कारण प्रतिवर्ष किसानों का भारी नुकसान होता है। सरकार ने विभाग में कर्मचारियों की भर्ती के लिए पिछले लंबे समय से काई कदम नहीं उठाया। इसके कारण अब आने वाले गेहूं की कटाई के सीजन में किसानों की फसल को आगे भी खतरा बना रहेगा।
शहर में हादसा हुआ तो कुछ नहीं कर पाएगा विभाग
स्टाफ और गाड़ियों की की के साथ-साथ फायर ब्रिगेड के पास शहर की संकरी गलियों में आग बुझाने के लिए छोटी गाड़ी तक नहीं है। फायर ब्रिगेड के पास जो गाड़ियां हैं, वे पुराने बाजारों तक नहीं जा पाती। कुछ दिन पहले तांगा चौक पर हुई घटना में भी फायर ब्रिगेड को इसकी कमी खली थी।
एक साल में 250 घटनाएं
वर्ष 2017 में जिला में आगजनी की कुल 250 घटनाएं हुई हैं। इनमें से आधी घटनाएं अप्रैल से जून महीने के बीच हुई, जिसमें गेहूं की फसल की कटाई का काम चलता है। इस दौरान कई बार फायर ब्रिगेड को आसपास के जिलों की मदद भी लेनी पड़ी। इससे जब तक गाड़ी पहुंचती है, नुकसान अधिक हो जाता है।
ऐसे है फायर ब्रिगेड की तैनाती
जींद मुख्यालय पर फायर ब्रिगेड की पांच गाड़ियां हैं। यहां दस की जरूरत है। इसके अलावा नरवाना में दो, सफीदों में दो, उचाना में एक, जुलाना में एक फायर ब्रिगेड की गाड़ी है। यहां तीन-चार का ही स्टाफ तैनात है।
खाली पड़े हैं पद
फायर ब्रिगेड अधिकारियों के अनुसार जिला भर में फायर ब्रिगेड के पद खाली पड़े हैं। जिला मुख्यालय पर स्वीकृत पदों में भी फायर ऑपरेट के 42, लोडिंग फायर मैन की छह, एसओ दो पद रिक्त पड़े हैं।
वर्जन
जिला में फायर ब्रिगेड के पास स्टाफ व गाड़ियों की भारी कमी है। इसके बावजूद स्टाफ कम संसाधनों के बावजूद हमेशा प्रयासरत रहता है। विभाग क स्टाफ की स्थिति की रिपोर्ट भेजी गई है। नियुक्तियां मुख्यालय के स्तर पर ही होती हैं।
यासिन खान, जिला अग्निशमक अधिकारी।
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जींद। गर्मी का मौसम दस्तक दे चुका है, लेकिन फायर ब्रिगेड की तैयारियां अभी तक अधूरी हैं। हर साल गेहूं के सीजन में फसल के साथ-साथ आगजनी की घटनाओं में काफी तेजी आती है, लेकिन जींद फायर ब्रिगेड के इंतजाम इन घटनाओं के आगे बोने साबित होते हैं।
फिलहाल अग्नि शमक विभाग के पास महज 11 फायर ब्रिगेड की गाड़ियां हैं और इनके लिए महज 21 कर्मचारी हैं। जरूरत के हिसाब से जिला में 20 गाड़ियां होनी चाहिए और 120 कर्मचारियों की तैनाती होनी चाहिए। फायर फाइटिंग सिस्टम के अनुसार एक गाड़ी पर एक शिफ्ट छह लोगों का स्टाफ होना चाहिए। इस हिसाब से रात-दिन की तीनों शिफ्टों में एक गाड़ी पर 18 फायर फाइटर्स की टीम होनी चाहिए। इसके विपरीत जिला में फायर ब्रिगेड के पास कुल 21 कर्मचारियों का स्टाफ है। इस हिसाब से फायर ब्रिगेड का स्टाफ महज एक गाड़ी को ही ऑपरेट कर सकता है। जिला अग्निशमन विभाग में गाड़ियों की कमी के साथ-साथ स्टाफ की भी भारी कमी सामने आई है। अग्निशमन विभाग में स्टाफ और गाड़ियों की कमी के कारण प्रतिवर्ष किसानों को गेहूं की फसल में आग लगने से भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। जिले में लाखों एकड़ भूमि पर गेहूं की फसल पककर तैयार हो चुकी है। इसमें प्रतिवर्ष आग लगने से किसानों की मेहनत पर पानी फिरता है। आगजनी के कारण प्रति वर्ष जिले में सैकड़ों एकड़ गेहूं की फसल जलती है। इसका मुख्य कारण विभाग के पास गाडिय़ों समेत स्टाफ की कमी रहती है।
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नियमित स्टाफ का संकट
अग्निशमन विभाग के पास जिले भर में कुल 11 फायर ब्रिगेड की की गाड़ियां हैं। इनमें ज्यादातर कच्चे स्टाफ के भरोसे ही गाड़ियां चल रही हैं। विभाग पिछले कुछ समय से सरकार से स्टाफ की भी मांग कर रहा है, ताकि सभी गाड़ियों से आपात स्थिति में आग पर काबू पाने के लिए पर्याप्त स्टाफ मौजूद रहे। इससे आग पर तुरंत काबू पाने में मदद मिलेगी। अग्निशमन विभाग में स्टाफ की कमी पिछले कई सालों से है, लेकिन इस विभाग में इन कर्मियों की भर्ती अब तक नहीं की गई। इसके कारण जिले भर के किसानों की फसल पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। अग्निशमन विभाग ज्यादातर कच्चे कर्मचारियों के भरोसे ही चल रहा है। पिछले कई सालों से किसानों को गेहूं की खेतों में खड़ी फसल में आग लग जाने के कारण बहुत अधिक नुकसान हो रहा है। समय से फायर ब्रिगेड की गाड़ी नहीं पहुंचने के कारण सैंकड़ों एकड़ जमीन में हर साल गेहूं की खड़ी फसल जलकर राख हो जाती है।
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गाड़ियों की संख्या के अनुसार 55 कर्मियों की कमी
जिला अग्निशमन विभाग में गाड़ियों की संख्या के अनुसार लगभग 55 से ज्यादा कर्मचारियों की कमी है। इसके कारण प्रतिवर्ष किसानों का भारी नुकसान होता है। सरकार ने विभाग में कर्मचारियों की भर्ती के लिए पिछले लंबे समय से काई कदम नहीं उठाया। इसके कारण अब आने वाले गेहूं की कटाई के सीजन में किसानों की फसल को आगे भी खतरा बना रहेगा।
शहर में हादसा हुआ तो कुछ नहीं कर पाएगा विभाग
स्टाफ और गाड़ियों की की के साथ-साथ फायर ब्रिगेड के पास शहर की संकरी गलियों में आग बुझाने के लिए छोटी गाड़ी तक नहीं है। फायर ब्रिगेड के पास जो गाड़ियां हैं, वे पुराने बाजारों तक नहीं जा पाती। कुछ दिन पहले तांगा चौक पर हुई घटना में भी फायर ब्रिगेड को इसकी कमी खली थी।
एक साल में 250 घटनाएं
वर्ष 2017 में जिला में आगजनी की कुल 250 घटनाएं हुई हैं। इनमें से आधी घटनाएं अप्रैल से जून महीने के बीच हुई, जिसमें गेहूं की फसल की कटाई का काम चलता है। इस दौरान कई बार फायर ब्रिगेड को आसपास के जिलों की मदद भी लेनी पड़ी। इससे जब तक गाड़ी पहुंचती है, नुकसान अधिक हो जाता है।
ऐसे है फायर ब्रिगेड की तैनाती
जींद मुख्यालय पर फायर ब्रिगेड की पांच गाड़ियां हैं। यहां दस की जरूरत है। इसके अलावा नरवाना में दो, सफीदों में दो, उचाना में एक, जुलाना में एक फायर ब्रिगेड की गाड़ी है। यहां तीन-चार का ही स्टाफ तैनात है।
खाली पड़े हैं पद
फायर ब्रिगेड अधिकारियों के अनुसार जिला भर में फायर ब्रिगेड के पद खाली पड़े हैं। जिला मुख्यालय पर स्वीकृत पदों में भी फायर ऑपरेट के 42, लोडिंग फायर मैन की छह, एसओ दो पद रिक्त पड़े हैं।
वर्जन
जिला में फायर ब्रिगेड के पास स्टाफ व गाड़ियों की भारी कमी है। इसके बावजूद स्टाफ कम संसाधनों के बावजूद हमेशा प्रयासरत रहता है। विभाग क स्टाफ की स्थिति की रिपोर्ट भेजी गई है। नियुक्तियां मुख्यालय के स्तर पर ही होती हैं।
यासिन खान, जिला अग्निशमक अधिकारी।