{"_id":"597250594f1c1bbe618b4755","slug":"131500663897-jind-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"माय सिटी प्रथम पेज की प्रस्तावित लीड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
माय सिटी प्रथम पेज की प्रस्तावित लीड
Updated Sat, 22 Jul 2017 12:43 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आधार पर सिस्टम की मार, नौनिहालों को नहीं मिल रहा अधिकार
नागरिक अस्पताल में 15 दिन से आधार कार्ड बनाने का काम बंद
21 दिन के बाद लगेंगे चार्ज, अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे हैं अभिभावक
बिना आधार पंजीकरण के ही घर लौट गए 200 नौनिहाल
अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
एक तरफ तो सरकार हर योजना को आधार नंबर से जोड़ रही है। वहीं नागरिक अस्पताल में नवजात बच्चों के आधार कार्ड बनने का काम पिछले 15 दिन से बंद पड़ा है। अब अधिकारी ईमेल भेज कर इसे दोबारा शुरू करवाने की बात कह रहे हैं। प्रशासन की इस लापरवाही से करीब 200 नवजात बच्चों के आधार नहीं बन पाए हैं। बेशक सरकार आधार को आम आदमी का अधिकार बता रही है, लेकिन नागरिक अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों को यह अधिकार नहीं मिल रहा है।
दरअसल सरकार ने सरकारी अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों के लिए खास योजना चल रखी है। इन बच्चों का अस्पताल में ही आधार कार्ड मुफ्त बनाया जाता है। इसके लिए शर्त है कि बच्चे का आधार कार्ड जन्म के 21 दिन तक बन जाना चाहिए, लेकिन जिला के नागरिक अस्पताल में ही ऐसा नहीं हो रहा है। यहां पांच जुलाई के बाद से किसी भी बच्चे का आधार कार्ड नहीं बनाया जा सका है। इससे करीब 200 बच्चे बिना आधार कार्ड के ही अस्पताल से घर चले गए हैं।
बर्थ पैड पर एंट्री
नियमानुसार जन्म होने पर जब बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र तैयार किया जाता है, उसके साथ ही आधार नंबर भी जारी किया जाता है। यह व्यवस्था अब प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ गई है। इसके चलते अभिभावकों को दोबारा अस्पताल के चक्कर काटने पड़ेंगे।
विज्ञापन
तीन टैब पड़े बंद
बच्चों के आधार कार्ड बनाने के लिए नागरिक अस्पताल में सरकार द्वारा तीन टैब दिए गए हैं। दरअसल जींद के नागरिक अस्पताल में जिला के किसी भी अस्पताल के मुकाबले अधिक डिलिवरी होती हैं। सभी बच्चों के अधार कार्ड बनाए जा सकें, इसके लिए यह सुविधा दी गई है। जींद के नागरिक अस्पताल में प्रतिमाह करीब 350 डिलिवरी होती है। वहीं नागरिक अस्पताल के सूत्रों के अनुसार जिला भर में हर पीएचसी व सीएचसी स्तर पर भी यह सुविधा है। वहां भी आधार कार्ड नहीं बनाए जा रहे हैं। कुल मिलाकर जिला में एक हजार बच्चे हैं, जिसको सरकारी सुविधा का लाभ नहीं मिल पाया है।
काफी लोगों को हो रही परेशानी
मैंने 13 जुलाई को नागरिक अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था। इसके बाद जन्म प्रमाण पत्र बन तो गया, लेकिन स्टाफ ने इसे जारी करने से मना कर दिया। जब तक आधार कार्ड नहीं बन जाता, जन्म प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा सकता। बाद में जन्म प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करने पर 30 रुपये की फीस ली जाएगी। वहीं जल्द प्रमाण पत्र लेने के लिए 135 रुपये की फीस है। इससे लोगों को काफी परेशानी हो रही है।
सुनीता, धड़ौली।
डीएक्टीवेट किए गए हैं टैब
आधार कार्ड बनाने के लिए तीन टैब लिए गए हैं, लेकिन पिछले कुछ दिन यह टैब डिएक्टीवेट हैं। ऐसे में बच्चों के आधार कार्ड नहीं बनाए जा रहे हैं। इसके लिए विभाग के अधिकारियों को ईमेल की गई है, जल्द ही टैब एक्टीवेट होने की उम्मीद है।
डॉ. राजेश गांधी, डिप्टी सिविल सर्जन, बर्थ-डैथ।
फोटो नंबर
21जेएनडी19: नागरिक अस्पताल में जच्चा-बच्चा वार्ड का फाइल फोटो।
विज्ञापन
नागरिक अस्पताल में 15 दिन से आधार कार्ड बनाने का काम बंद
21 दिन के बाद लगेंगे चार्ज, अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे हैं अभिभावक
बिना आधार पंजीकरण के ही घर लौट गए 200 नौनिहाल
अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
एक तरफ तो सरकार हर योजना को आधार नंबर से जोड़ रही है। वहीं नागरिक अस्पताल में नवजात बच्चों के आधार कार्ड बनने का काम पिछले 15 दिन से बंद पड़ा है। अब अधिकारी ईमेल भेज कर इसे दोबारा शुरू करवाने की बात कह रहे हैं। प्रशासन की इस लापरवाही से करीब 200 नवजात बच्चों के आधार नहीं बन पाए हैं। बेशक सरकार आधार को आम आदमी का अधिकार बता रही है, लेकिन नागरिक अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों को यह अधिकार नहीं मिल रहा है।
दरअसल सरकार ने सरकारी अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों के लिए खास योजना चल रखी है। इन बच्चों का अस्पताल में ही आधार कार्ड मुफ्त बनाया जाता है। इसके लिए शर्त है कि बच्चे का आधार कार्ड जन्म के 21 दिन तक बन जाना चाहिए, लेकिन जिला के नागरिक अस्पताल में ही ऐसा नहीं हो रहा है। यहां पांच जुलाई के बाद से किसी भी बच्चे का आधार कार्ड नहीं बनाया जा सका है। इससे करीब 200 बच्चे बिना आधार कार्ड के ही अस्पताल से घर चले गए हैं।
विज्ञापन
बर्थ पैड पर एंट्री
नियमानुसार जन्म होने पर जब बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र तैयार किया जाता है, उसके साथ ही आधार नंबर भी जारी किया जाता है। यह व्यवस्था अब प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ गई है। इसके चलते अभिभावकों को दोबारा अस्पताल के चक्कर काटने पड़ेंगे।
विज्ञापन
तीन टैब पड़े बंद
बच्चों के आधार कार्ड बनाने के लिए नागरिक अस्पताल में सरकार द्वारा तीन टैब दिए गए हैं। दरअसल जींद के नागरिक अस्पताल में जिला के किसी भी अस्पताल के मुकाबले अधिक डिलिवरी होती हैं। सभी बच्चों के अधार कार्ड बनाए जा सकें, इसके लिए यह सुविधा दी गई है। जींद के नागरिक अस्पताल में प्रतिमाह करीब 350 डिलिवरी होती है। वहीं नागरिक अस्पताल के सूत्रों के अनुसार जिला भर में हर पीएचसी व सीएचसी स्तर पर भी यह सुविधा है। वहां भी आधार कार्ड नहीं बनाए जा रहे हैं। कुल मिलाकर जिला में एक हजार बच्चे हैं, जिसको सरकारी सुविधा का लाभ नहीं मिल पाया है।
काफी लोगों को हो रही परेशानी
मैंने 13 जुलाई को नागरिक अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था। इसके बाद जन्म प्रमाण पत्र बन तो गया, लेकिन स्टाफ ने इसे जारी करने से मना कर दिया। जब तक आधार कार्ड नहीं बन जाता, जन्म प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा सकता। बाद में जन्म प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करने पर 30 रुपये की फीस ली जाएगी। वहीं जल्द प्रमाण पत्र लेने के लिए 135 रुपये की फीस है। इससे लोगों को काफी परेशानी हो रही है।
सुनीता, धड़ौली।
डीएक्टीवेट किए गए हैं टैब
आधार कार्ड बनाने के लिए तीन टैब लिए गए हैं, लेकिन पिछले कुछ दिन यह टैब डिएक्टीवेट हैं। ऐसे में बच्चों के आधार कार्ड नहीं बनाए जा रहे हैं। इसके लिए विभाग के अधिकारियों को ईमेल की गई है, जल्द ही टैब एक्टीवेट होने की उम्मीद है।
डॉ. राजेश गांधी, डिप्टी सिविल सर्जन, बर्थ-डैथ।
फोटो नंबर
21जेएनडी19: नागरिक अस्पताल में जच्चा-बच्चा वार्ड का फाइल फोटो।