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पति पूछता रहा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई, एडीसी बताते रहे योजनाएं
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जींद। गांव खेड़ा खेमावती तालाब से मिट्टी निकालते समय तोंदा गिरने से दो महिला की मौत के 19 दिन बाद भी पीड़ित परिवारों को न्याय की दरकार है। इस हादसे में अपनी पत्नी को खोने वाला खेड़ा खेमावती गांव निवासी संजय शुक्रवार को डीसी दरबार पहुंचा। यहां पर वह बार-बार अधिकारियों से पूछता रहा कि हादसे के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? लेकिन अधिकारी सिर्फ उसके परिवार को विभिन्न योजनाओं से मिलने वाले लाभ के बारे में बताते रहे। संजय ने कहा कि इस हादसे ने उसके परिवार को बर्बाद कर दिया है, लेकिन अभी तक दोषी अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
जानकारी के लिए खेड़ा खेमावती गांव में मनरेगा के तहत स्कूल में मिट्टी डाली जा रही थी। इसके लिए तालाब से मिट्टी की खुदाई की जा रही थी। 24 मार्च को मिट्टी का तोंदा गिरने से दो महिला मजदूरों की दबने से मौत हो गई थी, जबकि आठ घायल हो गईं थी। इसके बाद प्रशासन ने मृतक महिलाओं के परिजनों को विभिन्न योजनाओं के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता तो दी, लेकिन अभी तक इसके लिए दोषी अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
हादसे में जान गंवाने वाली 28 वर्षीय निशा के पति इससे आहत होकर शुक्रवार को डीसी दरबार पहुंचे। यहां बार-बार संजय को अधिकारियों से मिलने के लिए अंदर बुलाया गया, लेकिन संजय अपने साथ आने वाले दूसरे लोगों का इंतजार करता रहा। इसके कुछ देर के बाद खुद एडीसी डॉ. मुनीष नागपाल बाहर आए और संजय से बातचीत शुरू की और वे तमाम लाभ गिनाए, जो विभिन्न योजनाओं के तहत उसके परिवार को दिए गए हैं। इस पर संजय बार-बार एडीसी से यही पूछताछ रहा कि इतना गहरा गड्ढा कैसे और किसकी अनुमति से खोदा गया? दोषी लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? पर एडीसी से कोई जवाब नहीं देते बना।
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अस्थायी नौकरी को ना
इस दौरान एडीसी ने संजय को अस्थयी नौकरी देने की बात कही तो वह प्रशासन की व्यवस्थाओं पर भड़क गया। संजय ने कहा कि आज आप अधिकारी हो, कल दूसरा अधिकारी आकर नौकरी से हटा देगा। ऐसे में मुझे स्थायी नौकरी चाहिए।
प्रशासन आचार संहिता की आड़ में गरीबों के साथ कर रहा अन्याय
इस दौरान संजय के परिवार के साथ प्रशासन से मिलने पहुंचे प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता कर्मवीर सैनी ने कहा कि 19 दिन बीत जाने के बाद भी आज तक सरकार की तरफ से मृतकों व घायलों के परिजनों को कोई मुआवजा नहीं दिया गया है। इस मामले में जिन अधिकारियों पर आरोप हैं, उन्हीं से जांच करवाई जा रही है। इसलिए इस जांच पर सवाल उठाते हुए उन्होंने किसी अन्य अधिकारी से इस मामले की जांच की मांग की। इस पर डीसी ने जांच नरवाना के एसडीएम को सौंप दी।
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जानकारी के लिए खेड़ा खेमावती गांव में मनरेगा के तहत स्कूल में मिट्टी डाली जा रही थी। इसके लिए तालाब से मिट्टी की खुदाई की जा रही थी। 24 मार्च को मिट्टी का तोंदा गिरने से दो महिला मजदूरों की दबने से मौत हो गई थी, जबकि आठ घायल हो गईं थी। इसके बाद प्रशासन ने मृतक महिलाओं के परिजनों को विभिन्न योजनाओं के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता तो दी, लेकिन अभी तक इसके लिए दोषी अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
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हादसे में जान गंवाने वाली 28 वर्षीय निशा के पति इससे आहत होकर शुक्रवार को डीसी दरबार पहुंचे। यहां बार-बार संजय को अधिकारियों से मिलने के लिए अंदर बुलाया गया, लेकिन संजय अपने साथ आने वाले दूसरे लोगों का इंतजार करता रहा। इसके कुछ देर के बाद खुद एडीसी डॉ. मुनीष नागपाल बाहर आए और संजय से बातचीत शुरू की और वे तमाम लाभ गिनाए, जो विभिन्न योजनाओं के तहत उसके परिवार को दिए गए हैं। इस पर संजय बार-बार एडीसी से यही पूछताछ रहा कि इतना गहरा गड्ढा कैसे और किसकी अनुमति से खोदा गया? दोषी लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? पर एडीसी से कोई जवाब नहीं देते बना।
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अस्थायी नौकरी को ना
इस दौरान एडीसी ने संजय को अस्थयी नौकरी देने की बात कही तो वह प्रशासन की व्यवस्थाओं पर भड़क गया। संजय ने कहा कि आज आप अधिकारी हो, कल दूसरा अधिकारी आकर नौकरी से हटा देगा। ऐसे में मुझे स्थायी नौकरी चाहिए।
प्रशासन आचार संहिता की आड़ में गरीबों के साथ कर रहा अन्याय
इस दौरान संजय के परिवार के साथ प्रशासन से मिलने पहुंचे प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता कर्मवीर सैनी ने कहा कि 19 दिन बीत जाने के बाद भी आज तक सरकार की तरफ से मृतकों व घायलों के परिजनों को कोई मुआवजा नहीं दिया गया है। इस मामले में जिन अधिकारियों पर आरोप हैं, उन्हीं से जांच करवाई जा रही है। इसलिए इस जांच पर सवाल उठाते हुए उन्होंने किसी अन्य अधिकारी से इस मामले की जांच की मांग की। इस पर डीसी ने जांच नरवाना के एसडीएम को सौंप दी।