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जाट आरक्षण संघर्ष समिति की प्रदेश कार्यकारिणी के मंच से नेताओं का आह्वान, ईब मरण-मारण न तैयार हो जाइयो
Updated Tue, 06 Feb 2018 12:28 AM IST
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सतीश जागलान
जींद। 15 फरवरी को भाजपा की जींद में होने वाली रैली को रोकने के लिए अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने पूरा रोडमैप तैयार कर लिया है। यहां समिति की प्रदेश कार्यकारिणी में महासचिव अशोक बलहारा ने आक्रामक तेवर दिखाते हुए कहा कि या तो सरकार जाटों की मांगों को पूरा करे या फिर अमित शाह अपनी रैली हरियाणा की बजाय दूसरे प्रदेश में करें। समाज के लोगों से आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि ईब मरण-मारण न तैयार हो जाइयो। वहीं राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा कि जाटों के ट्रैक्टर-ट्रॉलियां स्टार्ट खड़े हैं, उनको केवल गियर लगाने की जरूरत है।
प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में राष्ट्रीय महासचिव अशोक बलहारा ने तेवर आक्रामक दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि अमित शाह या तो दो दिन पहले ही रैली स्थल पर आ जाएं, नहीं तो बाद में उन्हें आने के लिए रास्ते नहीं मिलेंगे। यदि भाजपा नेता हेलीकाप्टर से रैली स्थल पर आएंगे तो रैली में केवल भाजपा नेता ही रहेंगे बाकी कोई उनकी बात सुनने वाला भी नहीं पहुंच पाएगा। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के लोग 14 फरवरी शाम को ही अपने-अपने घरों से निकल जाएंगे और सुबह छह बजे से पहले जींद पहुंच जाएंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा ने केवल जाट समाज को गुमराह करने का काम किया है। गृह सचिव भी सीएम की बात नहीं मानता तो ऐसे में मनोहर लाल को सीएम नहीं रहना चाहिए।
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गांवों में मुख्यमंत्री के घुसने पर भी हो सकता है फैसला
इस दौरान समिति के महासचिव अशोक बलहारा ने कहा कि 19 मार्च को सरकार के साथ हुए समझौते को एक साल पूरा हो रहा है। 19 मार्च तक यदि जाटों की मांगें नहीं मानी गई तो इसके बाद मुख्यमंत्री को जाट लैंड के गांवों में घुसने से रोकने पर भी रणनीति बनेगी। उन्होंने कहा कि अब तक भाजपा ने पटेलों का ही आंदोलन देखा है अब जाटों के आंदोलन का हाड़ फोड़ खसरा दिखाया जाएगा।
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ये हैं पांच सवाल
1. 19 मार्च, 2017 को हुए समझौते जिनमें प्रदेश स्तर पर आरक्षण, मुकदमों की वापसी, धरनों पर शहादत देने वालों के आश्रितों को नौकरी देने संबंधी मांगें कब तक पूरी होंगी।
2. केंद्र के लिए लोकसभा में राष्ट्रीय सामाजिक व शैक्षणिक पिछड़ा वर्ग आयोग बिल कब तक पास हो जाएगा। उसके बाद जाट समाज को कितने दिनों में केंद्र में आरक्षण मिल जाएगा।
3. कैप्टन अभिमन्यु पर अपने निजी हितों के लिए सरकारी पदों का दुरुपयोग करने पर कब तक लगाम लगाई जा सकेगी।
4. सुभाष बराला व अन्य भाजपा नेताओं द्वारा समैण में जाट नेताओं पर हमला करने के आरोपियों को संरक्षण देने के मामले की जांच कब तक करवाई जाएगी।
5. भाईचारा तोड़ने वाले भाजपा के सांसदों व कार्यकर्ताओं पर भाजपा कब रोक लगा पाएगी।
छह मांगों पर समझौता हुआ था : यशपाल मलिक
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा कि पिछले वर्ष जाट आंदोलन के बाद 19 मार्च 2017 को सीएम मनोहर लाल, केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह व पीपी चौधरी के सामने जाटों के साथ छह मांगों पर समझौता हुआ था। भाजपा सरकार ने बार-बार इसको लटकाए रखा। इसके बाद 17 अगस्त को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के निवास पर सीएम मनोहर लाल, चौधरी बीरेंद्र सिंह, पीपी चौधरी, डॉ. संजीव बालियान, अनिल जैन की उपस्थिति में संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने समझौते को लागू करने में हो रही देरी पर अपनी आपत्ति दर्ज करवाई थी। बैठक में सीएम ने विश्वास दिलाया था कि जल्द ही समझौते की मांगें जो हरियाणा सरकार से संबंधित होंगी, पूरी कर दी जाएंगी, लेकिन आज तक सरकार ने एक भी कदम मांगों को पूरा करने के लिए आगे नहीं बढ़ाया है। इसलिए अब जाट समाज पीछे हटने वाला नहीं है।
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जींद। 15 फरवरी को भाजपा की जींद में होने वाली रैली को रोकने के लिए अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने पूरा रोडमैप तैयार कर लिया है। यहां समिति की प्रदेश कार्यकारिणी में महासचिव अशोक बलहारा ने आक्रामक तेवर दिखाते हुए कहा कि या तो सरकार जाटों की मांगों को पूरा करे या फिर अमित शाह अपनी रैली हरियाणा की बजाय दूसरे प्रदेश में करें। समाज के लोगों से आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि ईब मरण-मारण न तैयार हो जाइयो। वहीं राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा कि जाटों के ट्रैक्टर-ट्रॉलियां स्टार्ट खड़े हैं, उनको केवल गियर लगाने की जरूरत है।
प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में राष्ट्रीय महासचिव अशोक बलहारा ने तेवर आक्रामक दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि अमित शाह या तो दो दिन पहले ही रैली स्थल पर आ जाएं, नहीं तो बाद में उन्हें आने के लिए रास्ते नहीं मिलेंगे। यदि भाजपा नेता हेलीकाप्टर से रैली स्थल पर आएंगे तो रैली में केवल भाजपा नेता ही रहेंगे बाकी कोई उनकी बात सुनने वाला भी नहीं पहुंच पाएगा। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के लोग 14 फरवरी शाम को ही अपने-अपने घरों से निकल जाएंगे और सुबह छह बजे से पहले जींद पहुंच जाएंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा ने केवल जाट समाज को गुमराह करने का काम किया है। गृह सचिव भी सीएम की बात नहीं मानता तो ऐसे में मनोहर लाल को सीएम नहीं रहना चाहिए।
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गांवों में मुख्यमंत्री के घुसने पर भी हो सकता है फैसला
इस दौरान समिति के महासचिव अशोक बलहारा ने कहा कि 19 मार्च को सरकार के साथ हुए समझौते को एक साल पूरा हो रहा है। 19 मार्च तक यदि जाटों की मांगें नहीं मानी गई तो इसके बाद मुख्यमंत्री को जाट लैंड के गांवों में घुसने से रोकने पर भी रणनीति बनेगी। उन्होंने कहा कि अब तक भाजपा ने पटेलों का ही आंदोलन देखा है अब जाटों के आंदोलन का हाड़ फोड़ खसरा दिखाया जाएगा।
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ये हैं पांच सवाल
1. 19 मार्च, 2017 को हुए समझौते जिनमें प्रदेश स्तर पर आरक्षण, मुकदमों की वापसी, धरनों पर शहादत देने वालों के आश्रितों को नौकरी देने संबंधी मांगें कब तक पूरी होंगी।
2. केंद्र के लिए लोकसभा में राष्ट्रीय सामाजिक व शैक्षणिक पिछड़ा वर्ग आयोग बिल कब तक पास हो जाएगा। उसके बाद जाट समाज को कितने दिनों में केंद्र में आरक्षण मिल जाएगा।
3. कैप्टन अभिमन्यु पर अपने निजी हितों के लिए सरकारी पदों का दुरुपयोग करने पर कब तक लगाम लगाई जा सकेगी।
4. सुभाष बराला व अन्य भाजपा नेताओं द्वारा समैण में जाट नेताओं पर हमला करने के आरोपियों को संरक्षण देने के मामले की जांच कब तक करवाई जाएगी।
5. भाईचारा तोड़ने वाले भाजपा के सांसदों व कार्यकर्ताओं पर भाजपा कब रोक लगा पाएगी।
छह मांगों पर समझौता हुआ था : यशपाल मलिक
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा कि पिछले वर्ष जाट आंदोलन के बाद 19 मार्च 2017 को सीएम मनोहर लाल, केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह व पीपी चौधरी के सामने जाटों के साथ छह मांगों पर समझौता हुआ था। भाजपा सरकार ने बार-बार इसको लटकाए रखा। इसके बाद 17 अगस्त को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के निवास पर सीएम मनोहर लाल, चौधरी बीरेंद्र सिंह, पीपी चौधरी, डॉ. संजीव बालियान, अनिल जैन की उपस्थिति में संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने समझौते को लागू करने में हो रही देरी पर अपनी आपत्ति दर्ज करवाई थी। बैठक में सीएम ने विश्वास दिलाया था कि जल्द ही समझौते की मांगें जो हरियाणा सरकार से संबंधित होंगी, पूरी कर दी जाएंगी, लेकिन आज तक सरकार ने एक भी कदम मांगों को पूरा करने के लिए आगे नहीं बढ़ाया है। इसलिए अब जाट समाज पीछे हटने वाला नहीं है।