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पति की लंबी उम्र की कामना
Updated Sun, 08 Oct 2017 11:07 PM IST
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सुहागिनों ने व्रत रख पति की लंबी उम्र की कामना
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। करवाचौथ के मौके पर रविवार को सुहागिनों ने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखा। वहीं पतियों ने भी पत्नियों को उपहार दिये। महिलाओं ने रात को चांद के दीदार कर व्रत खोला। इससे पहले महिलाओं ने दोपहर को करवा व्रत कथा सुनी और इसके बाद पानी ग्रहण किया।
मान्यता है कि करवाचौथ के दिन व्रत रखने से पति की उम्र लंबी होती है। इसके चलते महिलाओं ने खूब तैयारियों से पर्व को मनाया। वहीं करवा व्रत के बाद बुजुर्ग महिलाओं को उपहार देकर सुहागिनों ने पति की लंबी उम्र का आशीर्वाद भी लिया। करवा व्रत के चलते बाजारों में भी खासी चहल-पहल रही। व्रत के दौरान भी महिलाओं ने जमकर खरीददारी की। जहां सजना के सजने को महिलाओं की लाइनें ब्यूटी पार्लर पर लगी रही, वहीं पुरुष भी सैलून जाकर इस दिन को विशेष बनाने के लिए लाइनों में लगे दिखे। फैंसी हेयर सैलून के संचालक कुलदीप सैन के अनुसार अन्य दिनों में जहां एक से दो फेसियल होत थे, रविवार को 50 से अधिक फेसियल हुआ। इसके लिए ब्यूटी पार्लर व सैलून पर विशेष योजनाएं भी चलाई गई।
महिलाओं ने करवा चौथ पर सुनी कहानियां
नरवाना
करवाचौथ के त्यौहार पर महिलाओं ने अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखा और कहानी सुनी। पंडित राधेश्याम ने बताया कि करवाचौथ हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के चौथे दिन होता है। परंपराओं के अनुसार इस दिन शादीशुदा महिलाएं या जिनकी शादी होने वाली हैं वो अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत करती हैं। ये व्रत सुबह सूरज उगने से पहले से लेकर और रात्रि में चंद्रमा निकलने तक रहता है। ये एक दिवसीय त्योहार अधिकतर उत्तरी भारत के राज्यों में मनाया जाता है। इस दिन सिर्फ पति की लंबी आयु की ही नहीं उसके काम-धंधे धन आदि इच्छाओं की पूर्ति की प्रार्थना करती हैं। करवाचौथ की शुरुआत किसी एक कथा के कारण नहीं हुई थी इसलिए इस त्योहार की बहुत अधिक महत्व है। इस दिन के लिए कई सारी कथाओं का प्रचलन है। पूरे भारतवर्ष में हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले लोग बड़ी धूमधाम से करवाचौथ मनाते हैं।
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पति-पत्नी को जोड़ता है करवा पर्व
अमर उजाला ब्यूरो
सफीदों। जैन संत सत्यप्रकाश मुनि महाराज ने कहा कि करवा चौथ का पर्व पति-पत्नी को जोड़ने का काम करता है। वे रविवार को नगर की जैन स्थानक में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि भारतीय नारी महान है, जो अपने पति व बच्चों की लंबी उम्र के लिए इस व्रत को करती है। नारी की महानता का तो शास्त्रों में भी विशेष रूप से वर्णन है। कहा भी गया है कि जिस घर व समाज में नारी की इज्जत होती है, वहां पर देवता निवास करते हैं। नारी ही है जो अपने दोनों परिवारों की सेवा व देखभाल करती है तथा संपूर्ण समाज का भला चाहती है। नारी शक्ति व उसकी महानता का कोई भी मुकाबला नही कर सकता है। नारी सदैव दूसरों का मंगल चाहती है और अमंगल की भावना कभी उसके अंदर आई ही नहीं। उन्होंने कहा कि एक नारी में पांच गुण होने चाहिंए। नारी पूरी पवित्रता के साथ अपने पति व भगवान में अटल विश्वास रखे, अपने सास-ससुर व परिवार के अनूकुल चलने वाली हो, सुबह पूजा-पाठ, प्रार्थना करके भोजन करने वाली हो और हमेशा धर्मकर्म करने वाली हो। अगर एक नारी में यह सभी गुण विद्यमान हैं तो वह सौभाग्यवती व जीवन में खुशियां ही खुशियां लाने वाली है। उन्होंने कहा कि पर्व जीवन में नया मोड व खुशी लेकर आते हैं। पर्व सदैव जोड़ने का काम करते हैं। हमारे जीवन में समय-समय पर कभी आध्यात्मिक, कभी राष्ट्रीय, कभी सामाजिक तो कभी पारिवारिक पर्व आते हैं। भारत की महानता है कि यहां के लोग हर त्यौहार आपस में मिलकर सौहार्द के साथ मनाते हैं। विदेशों में लोग केवल अपने लिए जीते हैं, लेकिन भारत में लोग दूसरों के लिए जीते हैं और इस कार्य मे त्यौहारों का अहम योगदान है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। करवाचौथ के मौके पर रविवार को सुहागिनों ने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखा। वहीं पतियों ने भी पत्नियों को उपहार दिये। महिलाओं ने रात को चांद के दीदार कर व्रत खोला। इससे पहले महिलाओं ने दोपहर को करवा व्रत कथा सुनी और इसके बाद पानी ग्रहण किया।
मान्यता है कि करवाचौथ के दिन व्रत रखने से पति की उम्र लंबी होती है। इसके चलते महिलाओं ने खूब तैयारियों से पर्व को मनाया। वहीं करवा व्रत के बाद बुजुर्ग महिलाओं को उपहार देकर सुहागिनों ने पति की लंबी उम्र का आशीर्वाद भी लिया। करवा व्रत के चलते बाजारों में भी खासी चहल-पहल रही। व्रत के दौरान भी महिलाओं ने जमकर खरीददारी की। जहां सजना के सजने को महिलाओं की लाइनें ब्यूटी पार्लर पर लगी रही, वहीं पुरुष भी सैलून जाकर इस दिन को विशेष बनाने के लिए लाइनों में लगे दिखे। फैंसी हेयर सैलून के संचालक कुलदीप सैन के अनुसार अन्य दिनों में जहां एक से दो फेसियल होत थे, रविवार को 50 से अधिक फेसियल हुआ। इसके लिए ब्यूटी पार्लर व सैलून पर विशेष योजनाएं भी चलाई गई।
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महिलाओं ने करवा चौथ पर सुनी कहानियां
नरवाना
करवाचौथ के त्यौहार पर महिलाओं ने अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखा और कहानी सुनी। पंडित राधेश्याम ने बताया कि करवाचौथ हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के चौथे दिन होता है। परंपराओं के अनुसार इस दिन शादीशुदा महिलाएं या जिनकी शादी होने वाली हैं वो अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत करती हैं। ये व्रत सुबह सूरज उगने से पहले से लेकर और रात्रि में चंद्रमा निकलने तक रहता है। ये एक दिवसीय त्योहार अधिकतर उत्तरी भारत के राज्यों में मनाया जाता है। इस दिन सिर्फ पति की लंबी आयु की ही नहीं उसके काम-धंधे धन आदि इच्छाओं की पूर्ति की प्रार्थना करती हैं। करवाचौथ की शुरुआत किसी एक कथा के कारण नहीं हुई थी इसलिए इस त्योहार की बहुत अधिक महत्व है। इस दिन के लिए कई सारी कथाओं का प्रचलन है। पूरे भारतवर्ष में हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले लोग बड़ी धूमधाम से करवाचौथ मनाते हैं।
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पति-पत्नी को जोड़ता है करवा पर्व
अमर उजाला ब्यूरो
सफीदों। जैन संत सत्यप्रकाश मुनि महाराज ने कहा कि करवा चौथ का पर्व पति-पत्नी को जोड़ने का काम करता है। वे रविवार को नगर की जैन स्थानक में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि भारतीय नारी महान है, जो अपने पति व बच्चों की लंबी उम्र के लिए इस व्रत को करती है। नारी की महानता का तो शास्त्रों में भी विशेष रूप से वर्णन है। कहा भी गया है कि जिस घर व समाज में नारी की इज्जत होती है, वहां पर देवता निवास करते हैं। नारी ही है जो अपने दोनों परिवारों की सेवा व देखभाल करती है तथा संपूर्ण समाज का भला चाहती है। नारी शक्ति व उसकी महानता का कोई भी मुकाबला नही कर सकता है। नारी सदैव दूसरों का मंगल चाहती है और अमंगल की भावना कभी उसके अंदर आई ही नहीं। उन्होंने कहा कि एक नारी में पांच गुण होने चाहिंए। नारी पूरी पवित्रता के साथ अपने पति व भगवान में अटल विश्वास रखे, अपने सास-ससुर व परिवार के अनूकुल चलने वाली हो, सुबह पूजा-पाठ, प्रार्थना करके भोजन करने वाली हो और हमेशा धर्मकर्म करने वाली हो। अगर एक नारी में यह सभी गुण विद्यमान हैं तो वह सौभाग्यवती व जीवन में खुशियां ही खुशियां लाने वाली है। उन्होंने कहा कि पर्व जीवन में नया मोड व खुशी लेकर आते हैं। पर्व सदैव जोड़ने का काम करते हैं। हमारे जीवन में समय-समय पर कभी आध्यात्मिक, कभी राष्ट्रीय, कभी सामाजिक तो कभी पारिवारिक पर्व आते हैं। भारत की महानता है कि यहां के लोग हर त्यौहार आपस में मिलकर सौहार्द के साथ मनाते हैं। विदेशों में लोग केवल अपने लिए जीते हैं, लेकिन भारत में लोग दूसरों के लिए जीते हैं और इस कार्य मे त्यौहारों का अहम योगदान है।