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रिटेल में ठीक चला कारोबार, थोक बाजार वीरान
Updated Sun, 02 Jul 2017 12:24 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद।
नई कर व्यवस्था भले ही शुक्रवार-शनिवार रात से लागू हो गई हो, लेकिन बाजार शनिवार को भी पुराने ढर्रे के हिसाब से ही चला। हालांकि, थोक बाजार में पूरी तरह वीराना रहा और व्यापारी परेशान रहे। हालांकि ग्राहक आए, लेकिन दुकानदारों ने कारोबार करने से साफ मना कर दिया। वहीं कुछ दुकानों पर पिछली तारीखों में बिल काट कर व्यापार जारी रखा। विशेषकर बारिश के बाद खेती के लिए उर्वरक लेने आए किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ा। वहीं बिक्री कर विभाग के अधिकारियों के अनुसार अभी व्यापारी नई कर व्यवस्था के अनुसार कंप्यूटर से प्रोफार्मा निकालकर कारोबार कर सकते हैं।
जीएसटी लागू होने के बाद बाजार की स्थिति जानने के लिए अमर उजाला टीम ने बाजारों का रुख किया। शहर के सबसे व्यस्ततम इंदिरा बाजार और जनता बाजार में थोक किराना कारोबार होता है। यहां दिन में 10 बजे से तीन बजे तक यहां अक्सर जाम की स्थिति रहती है और दुपहिया वाहन चालकों को भी बड़ी मुश्किल से रास्ता मिलता है। शनिवार को यह बाजार पूरी तरह वीरान रहा। हालांकि कुछ एक ग्राहक आ रहे थे, लेकिन कारोबारियों ने सामान देने से साफ मना कर दिया। कारण है, नई कर व्यवस्था के अनुसार बिल बुक नहीं होना। कारोबारियों को डर है कि बिना बिल बुक कारोबार करने पर वे जीएसटी के तहत कार्रवाई के दायरे में नहीं आ जाएं।
दिल्ली से भी नहीं मिल रहा सामान
किराना कारोबारियों का कहना है कि दिल्ली से भी शनिवार को माल का आर्डर नहीं हुआ। जनता बाजार के व्यापारी राजकुमार के अनुसार को मसूर दाल की जरूरत है, लेकिन दिल्ली के व्यापारी आर्डर लेने को तैयार नहीं हैं। कारण है कि खुली दाल कर नहीं है और पैकिंग की दाल पर कर है। दाल खुली आ नहीं सकती, ऐसे में मिल से भी दाल नहीं आ रही है।
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छपे दाम पर बेच रहे सामग्री
फव्वारा चौक पर किराना की दुकान चलाने वाले व्यापारी रमेश चंद्र के अनुसार सभी सामान अंकित मूल्य पर ही बेचा जा रहा है। पहले भी इसी रेट पर था। यदि अंकित मूल्य बढ़ कर आएगा तो रेट बढे़ंगे और दाम कम होगा तो कम कर दिए जाएंगे।
कपड़ा कारोबार रहा सामान्य
जीएसटी का सबसे अधिक विरोध कर रहे कपड़ा कारोबार पर मंदी की मार झेल रहे हैं। हालांकि व्यापारी इसका कारण जीएसटी को नहीं मान रहे हैं। वहीं कपड़ा कारोबार सामान्य रहा।
नहीं कटे बिल
बाजार में शनिवार को पहले की तरह ही कारोबार हुआ। इलेक्ट्रिॉनिक्स सामान को छोड़ कर अन्य बिना गारंटी वाले सामान को पहले की तरह ही बिना बिल के बेचे गए।
वीटा का घी 30 रुपये महंगा
वीटा ने अपने घी का रेट प्रति किलोग्राम 30 रुपये बढ़ा दिया है। खुदरा मूल्य पर पहले एक लीटर का पॉलीपैक 470 रुपये का मिलता था, अब यह 500 रुपये प्रति लीटर मिलेगा। अन्य उत्पादों पर प्रभाव नहीं है। खीर की पैकिंग एक रुपये सस्ती हुई है। पहले यह 20 रुपये की मिलती थी, लेकिन अब 19 रुपये की मिलेगी। हालांकि वीटा अभी रेट लिस्ट को अंतिम रूप नहीं दे पाया है। रेट में एक-दो दिन में कुछ बदलाव आ सकते हैं।
एक कर के दावे गलत
व्यापारियों का कहना है सरकार के एक कर के दावे गलत हैं। नई व्यवस्था में स्लैब के आधार पर एकमुश्त कर भरने की व्यवस्था है। इसके तहत यदि 20 लाख रुपये 75 लाख रुपये तक कारोबार करने वाले व्यापारी एकमुश्त कर का भुगतान करते हैं तो उनको कर कम लगता है। ऐसे में सामान्य तरीके से भुगतान करने वाले व्यापारी प्रतियोगिता में पिछड़ जाएंगे।
कुछ सामान को देने से किया मना
देशभर में जीएसटी लागू हो गया है। यहां सामान खरीदने के लिए बाजार आए। कुछ सामान को दुकानदार देने से मना दिया। दुकानदारों ने कहा कि अभी नई डायरेक्शन नहीं आई है इसलिए हम सामान को नहीं बेच सकते। -सुदेश, ग्राहक।
अभी नहीं होगी जांच
फिलहाल व्यापारियों को डरने की जरूरत नहीं है। बिक्री कर अधिकारी हर प्रकार से मदद करने और जानकारी देने के लिए तैयार हैं। जिन व्यापारियों की बिल बुक नहीं छपी है, वे कंप्यूटर से प्रोफार्मा निकाल कर टैक्स का कॉलम बना सकते हैं। इसमें जो भी कर किसी वस्तु पर लगता है, उसमें राज्य और केंद्र का अलग-अलग कॉलम भर दें। -सुरेंद्र कुमार, डीटीसी।
रिटेल में ठीक चला कारोबार, थोक बाजार वीरान
नए तरीके के बिल बुक नहीं होने पर कई कारोबारियों ने सामान बेचने से किया इंकार
बिक्री कर विभाग के अधिकारी बोले- व्यापारी कंप्यूटर से बिल का प्रोफार्मा निकालकर करें व्यापार
जींद।
नई कर व्यवस्था भले ही शुक्रवार-शनिवार रात से लागू हो गई हो, लेकिन बाजार शनिवार को भी पुराने ढर्रे के हिसाब से ही चला। हालांकि, थोक बाजार में पूरी तरह वीराना रहा और व्यापारी परेशान रहे। हालांकि ग्राहक आए, लेकिन दुकानदारों ने कारोबार करने से साफ मना कर दिया। वहीं कुछ दुकानों पर पिछली तारीखों में बिल काट कर व्यापार जारी रखा। विशेषकर बारिश के बाद खेती के लिए उर्वरक लेने आए किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ा। वहीं बिक्री कर विभाग के अधिकारियों के अनुसार अभी व्यापारी नई कर व्यवस्था के अनुसार कंप्यूटर से प्रोफार्मा निकालकर कारोबार कर सकते हैं।
जीएसटी लागू होने के बाद बाजार की स्थिति जानने के लिए अमर उजाला टीम ने बाजारों का रुख किया। शहर के सबसे व्यस्ततम इंदिरा बाजार और जनता बाजार में थोक किराना कारोबार होता है। यहां दिन में 10 बजे से तीन बजे तक यहां अक्सर जाम की स्थिति रहती है और दुपहिया वाहन चालकों को भी बड़ी मुश्किल से रास्ता मिलता है। शनिवार को यह बाजार पूरी तरह वीरान रहा। हालांकि कुछ एक ग्राहक आ रहे थे, लेकिन कारोबारियों ने सामान देने से साफ मना कर दिया। कारण है, नई कर व्यवस्था के अनुसार बिल बुक नहीं होना। कारोबारियों को डर है कि बिना बिल बुक कारोबार करने पर वे जीएसटी के तहत कार्रवाई के दायरे में नहीं आ जाएं।
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दिल्ली से भी नहीं मिल रहा सामान
किराना कारोबारियों का कहना है कि दिल्ली से भी शनिवार को माल का आर्डर नहीं हुआ। जनता बाजार के व्यापारी राजकुमार के अनुसार को मसूर दाल की जरूरत है, लेकिन दिल्ली के व्यापारी आर्डर लेने को तैयार नहीं हैं। कारण है कि खुली दाल कर नहीं है और पैकिंग की दाल पर कर है। दाल खुली आ नहीं सकती, ऐसे में मिल से भी दाल नहीं आ रही है।
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छपे दाम पर बेच रहे सामग्री
फव्वारा चौक पर किराना की दुकान चलाने वाले व्यापारी रमेश चंद्र के अनुसार सभी सामान अंकित मूल्य पर ही बेचा जा रहा है। पहले भी इसी रेट पर था। यदि अंकित मूल्य बढ़ कर आएगा तो रेट बढे़ंगे और दाम कम होगा तो कम कर दिए जाएंगे।
कपड़ा कारोबार रहा सामान्य
जीएसटी का सबसे अधिक विरोध कर रहे कपड़ा कारोबार पर मंदी की मार झेल रहे हैं। हालांकि व्यापारी इसका कारण जीएसटी को नहीं मान रहे हैं। वहीं कपड़ा कारोबार सामान्य रहा।
नहीं कटे बिल
बाजार में शनिवार को पहले की तरह ही कारोबार हुआ। इलेक्ट्रिॉनिक्स सामान को छोड़ कर अन्य बिना गारंटी वाले सामान को पहले की तरह ही बिना बिल के बेचे गए।
वीटा का घी 30 रुपये महंगा
वीटा ने अपने घी का रेट प्रति किलोग्राम 30 रुपये बढ़ा दिया है। खुदरा मूल्य पर पहले एक लीटर का पॉलीपैक 470 रुपये का मिलता था, अब यह 500 रुपये प्रति लीटर मिलेगा। अन्य उत्पादों पर प्रभाव नहीं है। खीर की पैकिंग एक रुपये सस्ती हुई है। पहले यह 20 रुपये की मिलती थी, लेकिन अब 19 रुपये की मिलेगी। हालांकि वीटा अभी रेट लिस्ट को अंतिम रूप नहीं दे पाया है। रेट में एक-दो दिन में कुछ बदलाव आ सकते हैं।
एक कर के दावे गलत
व्यापारियों का कहना है सरकार के एक कर के दावे गलत हैं। नई व्यवस्था में स्लैब के आधार पर एकमुश्त कर भरने की व्यवस्था है। इसके तहत यदि 20 लाख रुपये 75 लाख रुपये तक कारोबार करने वाले व्यापारी एकमुश्त कर का भुगतान करते हैं तो उनको कर कम लगता है। ऐसे में सामान्य तरीके से भुगतान करने वाले व्यापारी प्रतियोगिता में पिछड़ जाएंगे।
कुछ सामान को देने से किया मना
देशभर में जीएसटी लागू हो गया है। यहां सामान खरीदने के लिए बाजार आए। कुछ सामान को दुकानदार देने से मना दिया। दुकानदारों ने कहा कि अभी नई डायरेक्शन नहीं आई है इसलिए हम सामान को नहीं बेच सकते। -सुदेश, ग्राहक।
अभी नहीं होगी जांच
फिलहाल व्यापारियों को डरने की जरूरत नहीं है। बिक्री कर अधिकारी हर प्रकार से मदद करने और जानकारी देने के लिए तैयार हैं। जिन व्यापारियों की बिल बुक नहीं छपी है, वे कंप्यूटर से प्रोफार्मा निकाल कर टैक्स का कॉलम बना सकते हैं। इसमें जो भी कर किसी वस्तु पर लगता है, उसमें राज्य और केंद्र का अलग-अलग कॉलम भर दें। -सुरेंद्र कुमार, डीटीसी।
रिटेल में ठीक चला कारोबार, थोक बाजार वीरान
नए तरीके के बिल बुक नहीं होने पर कई कारोबारियों ने सामान बेचने से किया इंकार
बिक्री कर विभाग के अधिकारी बोले- व्यापारी कंप्यूटर से बिल का प्रोफार्मा निकालकर करें व्यापार