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विश्व फेफड़ा कैंसर दिवस : फ्लेवर्ड हुक्के से सिकुड़ रही नसें

Fri, 01 Aug 2025 01:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़ Updated Fri, 01 Aug 2025 01:53 AM IST
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World Lung Cancer Day: Veins are shrinking due to flavored hookah
-फोटो 51 : बाढ़सा में स्थित एनएसआई एम्स। फाइल फोटो
बहादुरगढ़। फ्लेवर्ड हुक्के की लत युवाओं के फेफड़े और नस को कमजोर कर रही है। इसकी घातक गैसों से हृदय और दिमाग की कोशिकाएं भी प्रभावित हो रही हैं। एम्स चिकित्सकों का कहना है कि लंबे समय तक इसकी लत से कैंसर, हृदय और तंत्रिका तंत्र की बीमारियों में तीन गुना खतरा बढ़ जात है। लोगों को धूम्रपान-हुक्का न पीने की सलाह दी जा रही है।
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बाढ़सा एनएसआई एम्स में कैंसर विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र ने बताया कि ओपीडी में रोजाना 70 से 100 मरीज आ रहे हैं। इसमें से 10 से 12 मरीज ऐसे होते हैं, जिनको फेफड़ों मेें सूजन, सांस लेने में दर्द और तेज खांसी की दिक्कत होती है। ऐसे मरीजों की उम्र 20 से 32 साल रहती है। पूछताछ में ये फ्लेवर्ड हुक्का, स्मोकिंग के शौकीन पाए जाते हैं।
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फ्लेवर्ड धुएं में कार्बन मोनोऑक्साइड, पॉलीक्लीनिक एरोमैटिक, हाइड्रोजन, वॉलेटाइल, एल्डहाइड्स और भारी तत्व होते हैं। इससे फेफड़ों की कार्य क्षमता प्रभावित होती है। भविष्य में कैंसर पनपने की दर अधिक हो जाती है। सूजन से नसें सिकुड़ती हैं और हृदयाघात और अस्थमा अटैक होते हैं। एक ही पाइप का कई लोग उपयोग करते हैं, इससे हेपेटाइटिस बी और संक्रमण का भी खतरा होता है।
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कैंसर विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र ने बताया कि फ्लेवर्ड हुक्का की लत से मस्तिष्क के न्यूरो ट्रांसमोटर्स का संतुलन गड़बड़ हो जाता है। सोचने-समझने की शक्ति प्रभावित होती है। इनमें भावनाएं भी शून्य होने लगती हैं। एकांकी होने लगते हैं। नींद न आना और सिरदर्द की समस्या अधिक बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि लंग कैंसर के प्रमुख कारणों में धूम्रपान सबसे बड़ा कारण है। सिगरेट, सिगार और पाइप सभी लंग कैंसर के जोखिम को बढ़ाते हैं।
दूसरे व्यक्ति के धूम्रपान के धुएं के संपर्क में आना भी लंग कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है। उन्होंने युवाओं से हुक्के से बचने की सलाह दी है।



ऐसे पहचानें फेफड़ा कैंसर को

- लगातार खांसी, भूख की कमी से वजन गिरना, खांसी के साथ बलगम में खून, काले रंग का बलगम, धीरे-धीरे आवाज का बैठना, बदलना।
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