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जब धर्म की हानि होती है, भगवान प्रकट होते हैं : अजय सती
Thu, 26 Sep 2024 06:33 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Thu, 26 Sep 2024 06:33 AM IST
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बेरी। कस्बे की श्री 108 जयराम गोशाला में चल रही भागवत कथा के चौथे दिन भागवत सुनने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। कथा वाचक जयराम आश्रम के आचार्य अजय सती ने बताया कि जब-जब धर्म की हानि होती है, पाप कर्म करने वालों का विनाश करने के लिए और धर्म की स्थापना करने के लिए ईश्वर हर युग में प्रकट होते हैं।
द्वापर युग में अपने भक्तों की रक्षा के लिए प्रकट हुए भगवान नारायण भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र दिन बुधवार की अंधेरी रात में भगवान कृष्ण ने देवकी के आठवें संतान के रूप में जन्म लिया। श्रीकृष्ण के जन्म लेते ही कोठरी प्रकाशमय हो गया. तब तक आकाशवाणी हुई कि विष्णुजी ने कृष्ण के अवतार में देवकी के कोख में जन्म लिया है। उन्हें गोकुल में बाबा नंद के पास छोड़ आएं और उनके घर एक कन्या जन्मी है। उसे मथुरा ला कर कंस को सौंप दे। भगवान विष्णु के आदेश से वासुदेवजी भगवान कृष्ण को सूप में अपने सिर पर रखकर नंदजी के घर की ओर चल दिए। भगवान विष्णु की माया से सभी पहरेदार सो गए, कारागार के दरवाजे खुल गए। कान्हा चले गोकुलधाम आकाशवाणी सुनते ही वासुदेव के हाथों की हथकड़ी खुल गई। वासुदेवजी ने सूप में बाल गोपाल को रखकर सिर पर रख लिया और गोकुल की ओर चल पड़े। वासुदेव भगवान कृष्ण को लेकर नंदजी के यहां सकुशल पहुंच गए और वहां से उनकी नवजात कन्या को लेकर वापस आ गए। जब कंस को देवकी की आठवीं संतान के जन्म की सूचना मिली। वह तत्काल कारागार में आया और उस कन्या को छीनकर पृथ्वी पर पटकना चाहा। लेकिन वह कन्या उसके हाथ से निकल कर आसमान में चली गई। इस मौके गोशाला के उप प्रधान राजीव मित्तल, दिनेश शर्मा, प्रकाश बंसल, मंदीप कादयान, पंडित सुरेंद्र, धर्मेंद्र मौजूद रहे।
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द्वापर युग में अपने भक्तों की रक्षा के लिए प्रकट हुए भगवान नारायण भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र दिन बुधवार की अंधेरी रात में भगवान कृष्ण ने देवकी के आठवें संतान के रूप में जन्म लिया। श्रीकृष्ण के जन्म लेते ही कोठरी प्रकाशमय हो गया. तब तक आकाशवाणी हुई कि विष्णुजी ने कृष्ण के अवतार में देवकी के कोख में जन्म लिया है। उन्हें गोकुल में बाबा नंद के पास छोड़ आएं और उनके घर एक कन्या जन्मी है। उसे मथुरा ला कर कंस को सौंप दे। भगवान विष्णु के आदेश से वासुदेवजी भगवान कृष्ण को सूप में अपने सिर पर रखकर नंदजी के घर की ओर चल दिए। भगवान विष्णु की माया से सभी पहरेदार सो गए, कारागार के दरवाजे खुल गए। कान्हा चले गोकुलधाम आकाशवाणी सुनते ही वासुदेव के हाथों की हथकड़ी खुल गई। वासुदेवजी ने सूप में बाल गोपाल को रखकर सिर पर रख लिया और गोकुल की ओर चल पड़े। वासुदेव भगवान कृष्ण को लेकर नंदजी के यहां सकुशल पहुंच गए और वहां से उनकी नवजात कन्या को लेकर वापस आ गए। जब कंस को देवकी की आठवीं संतान के जन्म की सूचना मिली। वह तत्काल कारागार में आया और उस कन्या को छीनकर पृथ्वी पर पटकना चाहा। लेकिन वह कन्या उसके हाथ से निकल कर आसमान में चली गई। इस मौके गोशाला के उप प्रधान राजीव मित्तल, दिनेश शर्मा, प्रकाश बंसल, मंदीप कादयान, पंडित सुरेंद्र, धर्मेंद्र मौजूद रहे।
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