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किसान को जो कुछ मिलेगा सड़क के संघर्ष से मिलेगा और कहीं से नहीं मिलेगा : योगेंद्र यादव
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योगेंद्र यादव को सम्मानित करते धरने पर मौजूद लोग। संवाद
- फोटो : Jhjhar
बेरी। झज्जर-रोहतक नेशनल हाईवे स्थित डीघल टोल प्लाजा पर चल रहे धरने को 19वें दिन समर्थन देने के लिए संयुक्त किसान संघर्ष समन्वय समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव धरनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने धरने पर बैठे किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि मंगलवार को जो सर्वोच्च न्यायालय ने तीनों कानूनों पर रोक लगाई है वह उस फैसले का स्वागत करते हैं। लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है, सिर्फ एक रोक लगाई गई है। यदि आप आंदोलन को छोड़कर चले गए तो एक माह बाद भी इसे वापस लाया जा सकता है या फिर कल परसों भी। कोर्ट ने जो चार सदस्यीय टीम बनाई है, उनमें तीन लोग तो ऐसे हैं जो इन कानूनों को बनाने वाले ही रहे हैं। वे कृषि कानूनों की वकालत करते हुए देश में पहले से ही डंका बजाते घूम रहे हैं। उनको कोर्ट ने कमेटी में बैठा दिया है। भगवान जाने ऐसी कमेटियां क्या करेंगी। उन्होंने कहा कि हमारा संघर्ष चल रहा है और आगे भी जारी रहेगा।
यादव ने कहा कि 26 जनवरी को हमारा जो लक्ष्य है, वह ज्यों का त्यों है। बिल्कुल कोई कार्यक्रम नहीं बदलेगा। उन्होंने कहा कि किसान को जो कुछ मिलेगा, सड़क के संघर्ष से मिलेगा और कहीं से नहीं। हमने किसी भी कमेटी से पंचायत नहीं करवानी है। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी को हर हाल में दिल्ली जाना है। किसानों के बीच में तरह-तरह की भ्रांतियां फैलाई जाएंगी। कई तरह की बातें की जाएंगी, लेेकिन आपको किसी बात पर विश्वास नहीं करना, सिर्फ आंदोलन में डटे रहना है।
भाकियू के सचिव डिंपी अहलावत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा कानूनों पर रोक लगाने के फैसले का स्वागत करते हैं, लेकिन इससे किसानों का आंदोलन खत्म नहीं होगा। जब तक सरकार तीनों कृषि कानूनों को रद्द नहीं कर देती, तब तक किसान अपना शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखेंगे। आंदोलन को खंडित करने के लिए असफल प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन किसान डटे हुए हैं। सरकार निजी कंपनियों के दबाव के चलते ये कानून रद्द नहीं कर रही है। मगर किसान सरकार की हठ के आगे झुकने वाला नही है। इस मौके पर पूर्व सरपंच मागेंराम, युवा किसान बिजेंद्र, दीपक, सतीश अहलावत व हंसराज आदि किसान मौजूद रहे।
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यादव ने कहा कि 26 जनवरी को हमारा जो लक्ष्य है, वह ज्यों का त्यों है। बिल्कुल कोई कार्यक्रम नहीं बदलेगा। उन्होंने कहा कि किसान को जो कुछ मिलेगा, सड़क के संघर्ष से मिलेगा और कहीं से नहीं। हमने किसी भी कमेटी से पंचायत नहीं करवानी है। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी को हर हाल में दिल्ली जाना है। किसानों के बीच में तरह-तरह की भ्रांतियां फैलाई जाएंगी। कई तरह की बातें की जाएंगी, लेेकिन आपको किसी बात पर विश्वास नहीं करना, सिर्फ आंदोलन में डटे रहना है।
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भाकियू के सचिव डिंपी अहलावत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा कानूनों पर रोक लगाने के फैसले का स्वागत करते हैं, लेकिन इससे किसानों का आंदोलन खत्म नहीं होगा। जब तक सरकार तीनों कृषि कानूनों को रद्द नहीं कर देती, तब तक किसान अपना शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखेंगे। आंदोलन को खंडित करने के लिए असफल प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन किसान डटे हुए हैं। सरकार निजी कंपनियों के दबाव के चलते ये कानून रद्द नहीं कर रही है। मगर किसान सरकार की हठ के आगे झुकने वाला नही है। इस मौके पर पूर्व सरपंच मागेंराम, युवा किसान बिजेंद्र, दीपक, सतीश अहलावत व हंसराज आदि किसान मौजूद रहे।
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